विदेश की खबरें | गोलाबारी के नये दौर को लेकर आर्मीनिया और आजरबैजान के बीच आरोप-प्रत्यारोप
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

आर्मीनिया के रक्षा मंत्रालय ने आजरबैजान के सुरक्षा बलों पर रात भर जर्मुक के आर्मीनियाई रिजॉर्ट की दिशा में लड़ाकू ड्रोन दागने, सेवन झील के पास जर्मुक और वेरिन शोरझा गांव की दिशा में तोप और मोर्टार से हमले करने का आरोप लगाया।

आजरबैजान की सेना ने भी आरोप लगाया कि आर्मीनिया सुरक्षा बलों ने अलगाववादी नागोर्नो-काराबाख क्षेत्रों में कलबजार और लाचिन जिलों में हमला किया।

आर्मीनिया का कहना है कि उसके कम से कम 49 जवान मारे गए, जबकि आजरबैजान ने कहा कि उसके 50 सैनिकों की मौत हुई है।

दोनों देश नागोर्नो-काराबाख पर कब्जे के लिए पहले भी लड़ते आये हैं। यह आजरबैजान का हिस्सा है, लेकिन 1994 में एक अलगाववादी युद्ध समाप्त होने के बाद से आर्मीनिया द्वारा समर्थित जातीय अमेरिकी के सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है।

रूस के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को दोनों पक्षों से “हमलों से बचने और संयम दिखाने” का आग्रह किया।

मास्को दोनों पूर्व सोवियत देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने की मांग कर रहा है।

आजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपील और संघर्ष विराम समझौते पर पहुंचने के बावजूद, आर्मीनिया सशस्त्र बलों ने तोपखाने और अन्य भारी हथियारों का उपयोग करके राज्य की सीमा पर हमले और उकसावे की कार्रवाई जारी रखी है।’’

मंत्रालय ने कहा कि कलबजार और लाचिन जिलों में आर्मीनियाई गोलाबारी में आजरबैजान के दो नागरिक घायल हो गए।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी दोनों देशों से शांति की अपील की है।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि मिशन सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) सदस्य देशों के नेताओं को घटनाक्रम के संबंध में एक रिपोर्ट देगा।

पेसकोव ने बुधवार को पत्रकारों से कहा, ‘‘स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।’’

एपी

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