देश की खबरें | एआई सहायता कर सकता है लेकिन यह मानव की तरह निर्णय नहीं ले सकता : पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पूर्व प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ ने बृहस्पतिवार को यहां कहा कि ‘वर्चुअल’ अदालतों ने न्याय पाने को सुगम किया है लेकिन इससे निष्पक्ष सुनवाई को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं तथा नवाचार और न्यायिक सत्यनिष्ठा के बीच संतुलन होना चाहिए।

मुंबई, 27 फरवरी पूर्व प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ ने बृहस्पतिवार को यहां कहा कि ‘वर्चुअल’ अदालतों ने न्याय पाने को सुगम किया है लेकिन इससे निष्पक्ष सुनवाई को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं तथा नवाचार और न्यायिक सत्यनिष्ठा के बीच संतुलन होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कानूनी ढांचे को उभरती डिजिटल वास्तविकताओं के अनुरूप होना चाहिए ताकि शासन निष्पक्ष, लचीला और भविष्य के लिए तैयार हो सके।

पूर्व प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मुकदमों के प्रबंधन में बदलाव ला रही है, कानूनी प्रक्रियाओं को तेज और अधिक कुशल बना रही है। उन्होंने कहा कि लेकिन मशीन सहायता तो कर सकती है, लेकिन वह मानव की तरह निर्णय नहीं ले सकती।

वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने कहा, ‘‘वर्चुअल अदालतों ने न्याय पाने को सुगम किया है, लेकिन निष्पक्ष सुनवाई और डेटा सुरक्षा के बारे में चिंता भी बढ़ाई है। जैसे-जैसे हम इन प्रगति को अपनाते हैं, हमें न्यायिक सत्यनिष्ठा के साथ नवाचार को संतुलित करना चाहिए। निष्पक्षता, जवाबदेही और विश्वास के बिना दक्षता का कोई मतलब नहीं है।’’

पूर्व प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि विविधता को बढ़ावा देने और अन्याय को खत्म करने के लिए सकारात्मक कार्रवाई संबंधी नीतियां महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, महिलाएं, अल्पसंख्यक जैसे हाशिए पर मौजूद समूहों को विभिन्न बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जो शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व की भूमिकाओं तक उनकी पहुंच को सीमित करती हैं। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी को समान अवसर मिले।’’

उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रांति ने हमारे अस्तित्व को फिर से परिभाषित किया है, लेकिन इसने ‘‘हमें सामूहिक रूप से खतरे में डालने वाले नए बीज’’ बोये हैं, ‘‘हमारे द्वारा सृजन की गई अपनी ही चीजें हमारे भविष्य के लिए खतरा हैं।’’

उन्होंने जोर देकर कहा कि नवाचार और प्रौद्योगिकी को शासन के ऐसे ढांचे द्वारा संतुलित किया जाना चाहिए जो समय के साथ आगे बढ़ता रहे।

चंद्रचूड़ ने कहा, ‘‘चुनौती स्पष्ट है। हमें एक स्मार्ट कानूनी ढांचे की आवश्यकता है जो नवाचारों को खत्म किए बिना उपयोगकर्ताओं की रक्षा करे। इसके लिए एआई जवाबदेही के लिए स्पष्ट विनियमन लागू करने और डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा कानूनों को मजबूत करने की आवश्यकता है।’’

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