ताजा खबरें | अधिवक्ता विधेयक चर्चा दो लोस
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. उन्होंने कहा कि इस तरह के काम में लगे गरीब लोगों को तो पहचाना जा सकता है, लेकिन जो लोग पांच सितारा होटलों में अपने काम को अंजाम देते हैं, असल में उन्हें पहचानना और व्यवस्था से दूर करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के काम में लगे गरीब लोगों को तो पहचाना जा सकता है, लेकिन जो लोग पांच सितारा होटलों में अपने काम को अंजाम देते हैं, असल में उन्हें पहचानना और व्यवस्था से दूर करना जरूरी है।
बनर्जी ने यह भी कहा, ‘‘देश में अदालतों में आदेश पाने, न्याय पाने के लिए ‘चेहरा’ बहुत महत्वपूर्ण है, जहां बड़े उद्योगपतियों का मामला झट से ले लिया जाता है, लेकिन लाखों गरीबों को दशकों से न्याय नहीं मिल रहा।’’
उन्होंने निराशा जताते हुए कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय समलैंगिक विवाह जैसे मुद्दों पर संविधान पीठ का गठन करके नियमित आधार पर सुनवाई करता है, लेकिन गरीबों के मामलों पर ध्यान नहीं दिया जाता।’’
बनर्जी ने कहा कि न्यायाधीशों के स्थानांतरण के लिए एक नीति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस विधेयक का समर्थन करते हैं, लेकिन भारतीय न्यायपालिका को भावी पीढ़ियों के लिए बचाना जरूरी है और सरकार को इस ओर ध्यान देना होगा।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के एन. रेड्डप्पा रेड्डी ने विधेयक को स्वागत योग्य बताया।
बीजू जनता दल (बीजद) के भर्तृहरि महताब ने सुझाव दिया कि अधिवक्ताओं के पेशेवर विकास के लिए प्रावधान होने चाहिए और उनकी एक राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक पंजी होनी चाहिए ताकि वकीलों के बारे में सभी को जानकारी मिल सके और दलालों की जरूरत न पड़े।
उन्होंने यह भी कहा कि अधिवक्ताओं को निडरता से काम करने का माहौल मिलना चाहिए।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के मलूक नागर ने कहा कि देश में विधिक शिक्षा का मूल्यांकन होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अदालतों में दलालों की पहचान हो, उन्हें सजा मिले और उन पर पाबंदी लगनी चाहिए। नागर ने कहा कि ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए कि फर्जी मामले और फर्जी कानूनी नोटिसों पर भी रोक लगे।
नागर ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के निवासियों की सुविधा के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक पीठ मेरठ में स्थापित करने की मांग दोहराई, वहीं कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में राज्य उच्च न्यायालय की एक पीठ गठित करने की लंबित मांग पर विचार करने का सरकार से आग्रह किया।
आईयूएमएल के ईटी मोहम्मद बशीर ने न्यायाधीशों की पुन: नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाया।
चर्चा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के हसनैन मसूदी और भाजपा के जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने भी भाग लिया।
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