युवाओं की महिला विरोधी सोच और यौन कुंठा को दिखा रही 'एडोलसेंस' सीरीज

नेटफ्लिक्स पर हाल में रिलीज हुई सीरीज ‘एडोलसेंस’ युनाइटेड किंग्डम और उसके बाहर भी लोकप्रिय हो रही है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

नेटफ्लिक्स पर हाल में रिलीज हुई सीरीज ‘एडोलसेंस’ युनाइटेड किंग्डम और उसके बाहर भी लोकप्रिय हो रही है. यह महिला विरोध, लिंग आधारित हिंसा, बदमाशी और आज की युवा पीढ़ी पर विषाक्त मर्दानगी के असर को दिखाती है.पुलिस स्टेशन में जांच के लिए एक बिस्तर जेमी मिलर का इंतजार कर रहा है. नर्स एरिका कहती है, "जेमी, क्या तुम बिस्तर पर बैठोगे? अगर तुम ठीक महसूस कर रहे हो, तो मैं तुम्हारा बस थोड़ा सा खून निकालूंगी.” लड़का हकलाते हुए कहता है, "मुझे सुई पसंद नहीं है.”

जेमी सिर्फ 13 साल का है. अभी बच्चा है. उसके पिता उसे बचाने की कोशिश करते हैं. वह कहते हैं, "उसे सुइयों से डर लगता है.”

जेमी के पिता को अभी तक इस बात का अहसास नहीं है कि उनका बच्चा सुइयों से डरता है, लेकिन चाकुओं से नहीं. 24 घंटे से भी कम समय पहले, जेमी ने अपनी सहपाठी कैटी लियोनार्ड को पार्किंग में चाकू से सात बार वार करके मार डाला था.

यह दृश्य ‘एडोलसेंस' के पहले एपिसोड का है, जो रिकॉर्ड तोड़ने वाली ब्रिटिश नेटफ्लिक्स मिनी सीरीज है. रिलीज होने के 10 दिनों के अंदर ही इसे 6.6 करोड़ बार देखा जा चुका है. ब्रिटिश संसद में भी इस सीरीज पर चर्चा हुई.

कोई भी लड़का जेमी हो सकता है

चारों एपिसोड को एक बार में ही फिल्माया गया है और वह भी बिना किसी कट के. इससे दर्शकों को ऐसा महसूस होता है जैसे वे खुद वहां उस समय मौजूद हैं जब जेमी गिरफ्तारी के दौरान पाजामे में पेशाब कर देता है, जब वह पुलिस हिरासत में डर के मारे रोता है या जब वह मनोवैज्ञानिक जांच के दौरान गुस्सा करता है.

जेमी दोषी है. यह बात पहले एपिसोड के अंत में पता चलती है, जब जांचकर्ता जेमी और उसके पिता को सीसीटीवी फुटेज दिखाते हैं, जिसमें लड़का कैटी को पीछे से चाकू मार रहा है. मिनी सीरीज यह नहीं पूछती कि उसने ऐसा किया या नहीं, बल्कि यह पूछती है कि उसने ऐसा क्यों किया.

इस किशोर के अंदर चल रही मानसिक लड़ाई में कई संकेत मिलते हैं. जैसे, मर्दाना दिखने का लगातार सामाजिक दबाव, खुद के आकर्षक न होने की चिंता, और लड़कियों द्वारा पसंद किए जाने की चाहत. ये सब मिलकर उसे कट्टर सोच की ओर ले जाते हैं.

आज कोई भी लड़का जेमी बन सकता है. स्कूल के बाद वह किसी गलत जगह या खराब संगत में नहीं जाता था, बल्कि अपने कमरे में चला जाता था, दरवाजा बंद कर लेता था और देर रात तक कंप्यूटर पर बैठा रहता था. आखिर उसने वहां ऐसा क्या देखा होगा?

खुद से घृणा और महिला विरोध

इस सीरीज में एक ऑनलाइन सब-कल्चर यानी ऑनलाइन समूह का जिक्र किया गया है, जिससे जेमी का सामना हुआ: ‘इन्सेल्स' या ‘इनवॉलंटरी सेलिबेट'. इस समूह में ऐसे विषमलिंगी पुरुष होते हैं जो महिलाओं को इसलिए दोष देते हैं क्योंकि उन्हें यौन संबंध बनाने या रोमांस करने के लिए कोई साथी नहीं मिलता. वे महिलाओं के प्रति अपमानजनक और अमानवीय बातें कहते हैं.

उदाहरण के लिए, वे कहते हैं कि ‘महिलाओं को सिर्फ अच्छे दिखने वाले पुरुष चाहिए' या ‘महिलाएं सिर्फ पैसों के पीछे भागती हैं'. ये पुरुष महिलाओं को इसलिए बुरा-भला कहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि महिलाएं उनसे संबंध नहीं बनातीं.

इन्सेल कम्युनिटी ‘मैनोस्फीयर' का हिस्सा है. यह पुरुषों के लिए बने ऑनलाइन फोरम, किताबों, कंटेंट क्रिएटर्स और ब्लॉग का एक समूह है. यह महिला विरोधी समूह है और यहां पुरुषों को बेहतर बनने का तरीका सिखाया जाता है. इनका मकसद लड़कों और पुरुषों को सिखाना है कि वे मजबूत, सफल और शारीरिक रूप से फिट कैसे बनें कि महिलाएं उन्हें पसंद करें.

हालांकि, इस समूह में महिलाओं के खिलाफ नफरत फैलाई जाती है और हिंसक विचारों को बढ़ावा दिया जाता है. साथ ही, यह भी बताते हैं कि महिलाओं को कैसे अपने इर्द-गिर्द घुमाया जाए. इस समूह का सबसे प्रमुख व्यक्ति एंड्रयू टेट है, जो खुद को महिला-विरोधी कहता है. रोमानिया में उस पर बलात्कार और लोगों की तस्करी करने के आरोप लगे हैं.

‘एडोलसेंस' से पता चलता है कि न सिर्फ जेमी इस समूह के बारे में जानता है, बल्कि यह आज के युवाओं द्वारा साझा की जाने वाली सामान्य संस्कृति का हिस्सा है. सीरीज के सभी बच्चे कुछ खास इमोजी का मतलब जानते हैं, जैसे कि ‘रेड पिल'. यह 1999 की साइंस-फिक्शन फिल्म ‘द मैट्रिक्स' से लिया गया है और उन पुरुषों के समूहों को दिखाता है जो महिलाओं के प्रति नफरत रखते हैं और मानते हैं कि वे लैंगिक संबंधों की 'सच्चाई' को जान गए हैं.

सिर्फ डर या वास्तविक खतरा?

ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में स्थित ग्रिफिथ विश्वविद्यालय में पुरुष हिंसा पर शोध करने वाले शेन सैटरली कहते हैं, "मुख्यधारा की चर्चा में इन्सेल्स के बारे में जो कुछ मैं देखता हूं, वह ज्यादातर नैतिक डर यानी मोरल पैनिक लगता है.”

सैटरली के अनुसार, यह समूह असल में महिला विरोधी नहीं, बल्कि आत्मघृणा और आत्महत्या जैसी सोच से जुड़ा है. उनका कहना है कि महिला विरोध इस घटना की सिर्फ एक ‘सतही' व्याख्या है.

सैटरली बताते हैं कि इस सोच के पीछे असली कारण हैं अकेलापन, पुरुष रोल मॉडल की कमी, पिता का न होना और यौन जीवन की कमी. इसके अलावा, समाज ने धीरे-धीरे पुरुषों के लिए बने विशेष स्थान खत्म कर दिए हैं. इसलिए, अब वे इंटरनेट पर सिर्फ पुरुषों के लिए जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

सैटरली के अनुसार, यौन रूप से कुंठित ये युवा पुरुष दूसरों के लिए नहीं, बल्कि मुख्य रूप से खुद के लिए खतरनाक हैं. ब्रिटिश सरकार के एक अध्ययन में पाया गया कि इन्सेल्स आमतौर पर अवसाद और आत्महत्या जैसे विचारों से जूझते हैं. इसलिए, उन्हें कलंक मानने और बदनाम करने के बजाय उनकी मदद की जरूरत है.

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पिछले दशकों में, पुरुषों में आत्महत्या की दर में काफी ज्यादा वृद्धि हुई है. सिर्फ अमेरिका में, साल 2000 के बाद से 37 फीसदी की वृद्धि हुई है.

सैटरली का मानना है कि जो युवा अपनी पहचान को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, उनके लिए मैनोस्फीयर मददगार हो सकता है, नुकसानदायक नहीं. वह कहते हैं, "मैनोस्फीयर खतरनाक नहीं है, बल्कि इसका उल्टा है.”

हालांकि, ब्रिटेन के पोर्ट्समाउथ विश्वविद्यालय में साइबर क्राइम और जेंडर की प्रोफेसर लीजा सुगिउरा इससे सहमत नहीं हैं. वह कहती हैं, "विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तीन में से एक महिला अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार यौन हिंसा का सामना करती है. यह किसी एक जगह या एक बार होने वाली घटना नहीं है.”

पीड़ित की भूमिका निभा रहे पुरुष

एक इन्सेल फोरम में, पुरुष चर्चा करते हैं कि उन्हें बलात्कार ‘नैतिक' क्यों लगता है. एक पोस्ट में लिखा गया है, "बलात्कार इन्सेल्स के सेक्स का अधिकार है, जो उनसे छीना जा रहा है.”

इस तरह का कॉन्टेंट खोजने के लिए आपको ज्यादा स्क्रॉल करने की जरूरत नहीं है और न ही किसी अकाउंट से लॉग इन करने की. यह फोरम के लैंडिंग पेज पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है.

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सुगिउरा ने कहा, "ऐसा नहीं है कि आपको इस कॉन्टेंट को खोजने के लिए डार्क नेट पर जाना होगा. आप इसे हर जगह पा सकते हैं, न सिर्फ इन्सेल फोरम पर, बल्कि टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर भी.”

मैनोस्फीयर के अनुसार, पुरुषों का सेक्स पर अधिकार है, जिसे महिलाएं उन्हें देने से मना करती हैं. सवाल यह है कि क्या ऐसे विचार रखने वाले पुरुषों पर दया की जानी चाहिए जो यौन कुंठा से ग्रस्त हैं और चाहते हैं कि महिलाएं उन्हें पसंद करें?

सवाल यह उठता है कि क्या महिलाओं के प्रति नफरत को इसलिए स्वीकार किया जाना चाहिए कि यह 'सिर्फ' मर्दानगी के संकट का एक सतही लक्षण है? लंदन के किंग्स कॉलेज के एक अध्ययन के अनुसार, 16 से 29 वर्ष की उम्र के चार में से एक पुरुष मानते हैं कि आज के समय में पुरुष होना, महिला होने से ज्यादा मुश्किल है.

सुगिउरा ने बताया, "मैनोस्फीयर में हमेशा पुरुषों को पीड़ित के रूप में दिखाया जाता है. यह दावा किया जाता है कि समाज में महिलाओं के हाथों पुरुषों का शोषण किया जाता है और उन्हें अपने अस्तित्व के लिए लड़ने की जरूरत है. हालांकि, जब इस पीड़ित मानसिकता का इस्तेमाल महिलाओं के प्रति नफरत को सही ठहराने के लिए किया जाता है, तो यह खतरनाक हो जाता है.”

महिला विरोध एक संरचनात्मक समस्या है

सुगिउरा ने कहा कि इन्सेल कम्युनिटी और मैनोस्फीयर महिला विरोधी सोच का सिर्फ एक हिस्सा हैं. असली समस्याएं इससे भी गहरी हैं. युवा पुरुषों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और उनकी हताशा के साथ-साथ, पुरुषों और महिलाओं के बीच गहरा अविश्वास भी मौजूद है.

पोलिंग इंस्टीट्यूट व्हाइटस्टोन इनसाइट की ओर से हाल ही में किए गए सर्वे में पाया गया कि 18 से 24 वर्ष की 62 फीसदी महिलाएं अधिकांश युवा पुरुषों से डरती हैं. ‘एडोलसेंस' के पटकथा लेखक जैक थॉर्न ने युवाओं के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था, जिसे ऑस्ट्रेलिया में लागू भी किया गया है. हालांकि, सुगिउरा का मानना है कि यह कोई स्थायी समाधान नहीं है. इसके बजाय, समाज और संस्थानों में गहरे और व्यापक बदलाव की जरूरत है.

सुगिउरा ने कहा, "जेमी सिर्फ 13 साल का है. इन्सेल्स के बारे में बात करने से पहले, हमें समाज के उन दबावों पर चर्चा करनी होगी जो विषमलिंगी सेक्स (हेट्रोनॉर्मेटिव सेक्स) के साथ-साथ लोकप्रियता और सफलता की लैंगिक अपेक्षाओं से जुड़े हुए हैं. अगर बचपन से ही बच्चों पर ये दबाव न डाले जाएं, तो मैनोस्फीयर जैसे समूह इन कमजोरियों का फायदा नहीं उठा पाएंगे.”

इस सीरीज के निर्माताओं के अनुसार, ‘एडोलसेंस' एक चेतावनी है. बीबीसी से बात करते हुए थॉर्न ने कहा, "यह कुछ ऐसा है जिसके बारे में लोगों को बात करनी चाहिए. उम्मीद है कि यह सीरीज इस चर्चा को बढ़ाने में मदद करेगी.”

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