देश की खबरें | बोरवेल के लिए स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना ‘एक तरह का घोटाला’ है: एनजीटी

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नयी दिल्ली, पांच फरवरी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा है कि दिल्ली के पहाड़गंज क्षेत्र में सैकड़ों होटल या अतिथि गृह स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना (वीडीएस) के नाम पर 10 वर्षों से अधिक समय से अवैध रूप से भूजल का दोहन रहे हैं। अधिकरण ने मुख्य सचिव को इस संबंध में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने 29 जनवरी को एक आदेश में कहा कि यह योजना ‘‘एक तरह का घोटाला’’ है, जिससे राज्य के खजाने को नुकसान पहुंचने के अलावा पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। कथित तौर पर इस योजना के तहत होटलों को बोरवेल संचालन के लिए रियायतें दी गईं।

इसने कहा, ‘‘इससे हमारी पहले व्यक्त की गई आशंका की पुष्टि होती है कि किसी प्रकार का घोटाला हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप न केवल राजस्व और सार्वजनिक धन का भारी नुकसान हुआ है, बल्कि पहाड़गंज क्षेत्र में सैकड़ों होटलों/अतिथि गृहों द्वारा भूजल का अवैध, अनियमित दोहन किया जा रहा है, जिससे भूजल स्तर में गिरावट आई है और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।’’

अधिकरण ने कहा कि सरकार द्वारा वीडीएस तैयार नहीं किए जाने के बावजूद, तत्कालीन पर्यावरण सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने 21 अप्रैल, 2014 को एक बैठक में ट्यूबवेल या बोरवेल के स्वैच्छिक प्रकटीकरण के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी करने का निर्णय लिया था।

इसने कहा कि इसके बाद एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया और स्वैच्छिक प्रकटीकरण आवेदन स्वीकार कर लिए गए।

पीठ ने कहा कि होटलों या अतिथि गृहों द्वारा स्वैच्छिक खुलासे के बाद एक ‘‘गंभीर’’ मुद्दा सामने आया है, क्योंकि निकाले गए पानी की मात्रा को मापने के लिए कोई जल मीटर नहीं लगाया गया था और कोई शुल्क नहीं लगाया गया था।

अधिकरण ने कहा, ‘‘इस प्रकार, पहाड़गंज क्षेत्र में सैकड़ों होटल या अतिथि गृह 10 वर्षों से अधिक समय से बिना किसी नियमन, माप या किसी शुल्क के भुगतान के भूजल निकाल रहे हैं।’’

इसने दिल्ली के मुख्य सचिव को जांच करने, इस तरह की अनियमित निकासी के कारण राजकोष तथा पर्यावरण को हुए नुकसान का पता लगाने का निर्देश दिया।

अधिकरण ने मुख्य सचिव को तीन महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई की तिथि आठ मई तय की गई।

हरित निकाय पहाड़गंज में 536 होटलों द्वारा भूजल के अवैध दोहन के मामले की सुनवाई कर रहा था।

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