देश की खबरें | परिवार में दरिंदा: अदालत ने नाबालिग भांजी से बलात्कार के दोषी को 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई

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नयी दिल्ली, 18 जनवरी राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने नाबालिग भांजी के बलात्कार के दोषी व्यक्ति को यह कहते हुए 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई कि जब परिवार में ही कोई दरिंदा मौजूद हो तो बच्चों की सुरक्षा कौन करेगा।

स्थानीय अदालत ने 16 वर्षीय लड़की से 2020 में बलात्कार के लिए मामा को दोषी ठहराया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुशील बाला डागर ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब वह नाबालिग लड़की के बलात्कार मामले में दोषी व्यक्ति की सजा पर संबंधित पक्षों की दलीलें सुन रही थीं।

आरोपी व्यक्ति को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा-छह (गंभीर यौन उत्पीड़न) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 376(2)(एफ) (भरोसे के व्यक्ति द्वारा बलात्कार) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दोषी ठहराया गया था।

अतिरिक्त लोक अभियोजक योगिता कौशिक दहिया ने कहा कि दोषी ‘‘निंदनीय कृत्य’’ के लिए किसी सहानुभूति का हकदार नहीं है।

उन्होंने रेखांकित किया कि दोषी ने नाबालिग को ‘‘घृणित’’ अपराध के दौरान और उसके बाद गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी।

दोषी ऑटोरिक्शा चालक है।

अदालत ने 15 जनवरी को सुनाये अपने आदेश में कहा, ‘‘दोषी पीड़िता का मामा है। घर को बच्चों के लिए दुनिया में सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है और साझा घर में रहने वाले लोगों को सबसे भरोसेमंद व्यक्ति माना जाता है।’’

अदालत ने कहा कि ‘‘यौन उत्पीड़न के रूप में बच्चों के खिलाफ़ अनाचार’’ में वृद्धि हुई है और बच्चों को उनके परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, शिक्षकों तथा परिचितों द्वारा यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया जा रहा है।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अपनी उम्र के हिसाब से मासूम लड़के और लड़कियों दोनों के साथ यौन-उत्पीड़न किया जाता है। जब परिवार में ही कोई दरिंदा हो तो कौन सुरक्षा करेगा?’’

अदालत ने कहा, ‘‘यह धारणा कि बच्चे परिवार और परिचित लोगों के साथ सबसे सुरक्षित होते हैं, एक मिथक साबित हुई है, क्योंकि इस मामले के दोषी जैसे लोग अपने ही परिवार के बच्चों के साथ घिनौने अपराध में लिप्त होते हैं। इस मामले में भांजी के साथ घिनौना कृत्य किया गया।’’

अदालत ने दोषी को पॉक्सो अधिनियम की धारा-छह के तहत 20 साल के सश्रम कारावास और आपराधिक धमकी के लिए एक साल की अतिरिक्त सजा सुनाई।

अदालत ने कहा कि दोनों सजाएं साथ-साथ लागू होंगी।

अदालत ने पीड़िता को 10 लाख 50 हजार रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश पारित किया।

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