देश की खबरें | भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे को भस्म करने की प्रक्रिया शुरू

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मध्यप्रदेश के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के एक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे में से 10 टन अपशिष्ट को परीक्षण के तौर पर जलाकर भस्म किए जाने के पहले दौर की प्रक्रिया बृहस्पतिवार को कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच शुरू कर दी गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

धार/इंदौर, 27 फरवरी मध्यप्रदेश के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के एक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे में से 10 टन अपशिष्ट को परीक्षण के तौर पर जलाकर भस्म किए जाने के पहले दौर की प्रक्रिया बृहस्पतिवार को कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच शुरू कर दी गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े अपशिष्ट को धार जिले के पीथमपुर में एक निजी कम्पनी के संचालित संयंत्र में स्थानांतरित करने और उसका निपटान करने के मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति ए जी मसीह की पीठ ने ‘यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड’ के संयंत्र से निकले अपशिष्ट के निपटान के बृहस्पतिवार को होने वाले परीक्षण पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया।

प्रदेश सरकार के मुताबिक यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे में इस बंद पड़ी इकाई के परिसर की मिट्टी, रिएक्टर अवशेष, सेविन (कीटनाशक) अवशेष, नेफ्थाल अवशेष और "अर्द्ध प्रसंस्कृत" अवशेष शामिल हैं।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि वैज्ञानिक प्रमाणों के मुताबिक इस कचरे में सेविन और नेफ्थाल रसायनों का प्रभाव अब ‘‘लगभग नगण्य’’ हो चुका है।

बोर्ड के मुताबिक फिलहाल इस कचरे में मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का कोई अस्तित्व नहीं है और इसमें किसी तरह के रेडियोधर्मी कण भी नहीं हैं।

बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी श्रीनिवास द्विवेदी ने संवाददाताओं को बताया,‘‘यूनियन कार्बाइड कारखाने के पांच तरह के कचरे को पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र में मिक्सर से उचित अनुपात में मिलाकर इसके 10 टन हिस्से को भस्मक में डाला जाएगा। इससे पहले, भस्मक को खाली चलाकर इसका तापमान 850 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचाया जाएगा।’’

उन्होंने बताया कि कचरे को दहकते भस्मक में डाले जाने की प्रक्रिया शुक्रवार सुबह 10-11 बजे से शुरू होने की उम्मीद है और इसमें 10 टन कचरे को परीक्षण के तौर पर जलाकर नष्ट करने में लगभग 72 घंटे लगेंगे।

द्विवेदी ने बताया कि निपटान की पूरी प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले ठोस अवशेषों, पानी और गैसों का भी उचित निपटारा किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि यूनियन कार्बाइड के कचरे के निपटान से जुड़े कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उन्हें मास्क, चश्मे, दस्ताने और अन्य उपकरण दिए गए हैं।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इस कचरे के निपटान की प्रक्रिया शुरू होने के बीच पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में 24 थानों के करीब 500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर हैं।

इंदौर संभाग के आयुक्त दीपक सिंह ने बताया कि कचरे को भस्म किए जाने की प्रक्रिया केंद्र और राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिकों की मौजूदगी में संपन्न हो रही है।

सिंह ने बताया कि पीथमपुर के जिस औद्योगिक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में यूनियन कार्बाइड कारखाने का कचरा भस्म किया जाना है, उसमें ऐसी व्यवस्था है कि अगर कचरा जलाए जाने के दौरान किसी गैस का उत्सर्जन तय सीमा से अधिक होगा, तो यह संयंत्र अपने आप बंद हो जाएगा।

इस बीच, कचरे के निपटान का विरोध कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने उनकी बात सुनी और उन्हें उच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखने को कहा।

प्रदर्शनकारियों में से एक संदीप रघुवंशी ने कहा,"हमारे वकीलों ने कहा है कि वे उच्च न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। हमारा आंदोलन जारी रहेगा।हम अपने वकीलों के जरिये पीथमपुर के लोगों से बात करेंगे और उनके बताए तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।"

भोपाल में दो और तीन दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ था। इससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए थे और हजारों लोग अपंग हो गए थे।इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में से एक माना जाता है।

भोपाल में बंद पड़े यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे के निपटान की योजना के तहत इसे सूबे की राजधानी से करीब 250 किलोमीटर दूर पीथमपुर में एक औद्योगिक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में दो जनवरी को पहुंचाया गया था।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन ने 18 फरवरी को दिए आदेश में कहा था कि सुरक्षा मानदंडों का पालन करते हुए 27 फरवरी को 10 टन कचरे का पहला परीक्षण किया जाए और इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता है, तो चार मार्च को दूसरा परीक्षण और 10 मार्च को तीसरा परीक्षण किया जाए।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि उसके सामने तीनों परीक्षणों की रिपोर्ट 27 मार्च को पेश की जाए।

यूनियन कार्बाइड कारखाने का कचरा भोपाल से पीथमपुर लाए जाने के बाद इस औद्योगिक क्षेत्र में कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने इस कचरे के निपटान से इंसानी आबादी और आबो-हवा को नुकसान की आशंका जताई है जिसे प्रदेश सरकार ने सिरे से खारिज किया है।

प्रदेश सरकार का कहना है कि पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे के सुरक्षित निपटान के पक्के इंतजाम हैं।

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