देश की खबरें | मणिपुर के तीन जिलों में 15 हथियार पुलिस को सौंपे गए

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. हिंसा प्रभावित मणिपुर में लोगों से लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करने के लिए राज्यपाल अजय कुमार भल्ला के आग्रह करने के कुछ दिनों बाद तीन जिलों में कम से कम 15 आग्नेयास्त्र पुलिस को सौंप दिए गए। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

इंफाल, 25 फरवरी हिंसा प्रभावित मणिपुर में लोगों से लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करने के लिए राज्यपाल अजय कुमार भल्ला के आग्रह करने के कुछ दिनों बाद तीन जिलों में कम से कम 15 आग्नेयास्त्र पुलिस को सौंप दिए गए। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

एक अधिकारी ने बताया कि इंफाल पश्चिम जिले के सिंगजामेई पुलिस थाने में एक एसएमसी कार्बाइन सहित एक मैगजीन और एक डबल बैरल गन, तथा तीन हथगोले सहित चार आग्नेयास्त्रों को पुलिस को सौंप दिया गया।

एंड्रो पुलिस थाने को एक सेल्फ-लोडिंग राइफल सौंपी गई। इंफाल पूर्व जिले के सागोलमांग पीएस में लोगों ने पांच आग्नेयास्त्र पुलिस को सौंपे।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इंफाल पूर्व जिले के हीनिंगंग थाने के पुलिस कर्मियों के समक्ष एक 9 मिमी पिस्तौल और गोला-बारूद तथा चुराचांदपुर में चार बंदूकें पुलिस को सौंपी गईं।

भल्ला ने 20 फरवरी को लोगों से लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को सात दिनों के भीतर स्वेच्छा से पुलिस के सुपुर्द करने का आग्रह किया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि इस अवधि के दौरान हथियार छोड़ने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी।

मणिपुर के मुख्य सचिव पी के सिंह ने रविवार को कहा था कि अगर कोई हथियार त्यागना चाहता है तो लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को स्वेच्छा से पुलिस के सुपुर्द करने के लिए दिया गया सात दिन का समय पर्याप्त है।

उन्होंने जोर दे कर कहा कि ऐसे हथियार बरामद करने के लिए अवधि समाप्त होने के बाद सुरक्षा बल कार्रवाई करेंगे।

मई 2023 से इंफाल घाटी में मेइती और आसपास की पहाड़ियों पर बसे कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।

मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के अपने पद से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद पूर्वोत्तर राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता पैदा हो गई थी। इसके बाद केंद्र ने 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, मणिपुर विधानसभा को निलंबित कर दिया गया है। विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है।

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