नयी दिल्ली, 19 मई पश्चिमी दिल्ली के नारायणा इलाके में विभिन्न होटलों, सड़क किनारे स्थित भोजनालयों और कारखानों से 14 बाल मजदूरों को मुक्त कराया है, जिनमें से ज्यादातर स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हैं और उनके शरीर पर जलने के घाव हैं।
दिल्ली पुलिस, दिल्ली श्रम विभाग और ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ द्वारा बृहस्पतिवार रात की गई संयुक्त छापेमारी के दौरान 12 से 17 साल के बच्चों को मुक्त कराया गया।
‘बचपन बचाओ आंदोलन’ नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित एक गैर सरकारी संगठन है।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। बच्चों को काम पर रखने वाली नौ काराखानों और होटलों को सील कर दिया गया है।
‘बचपन बचाओ आंदोलन’ ने एक बयान में कहा, “मुक्त कराए गए बच्चे दयनीय और खतरनाक परिस्थितियों में काम कर रहे थे और उनमें से ज्यादातर के हाथों और शरीर के बाकी हिस्सों पर जलने के निशान हैं।”
बयान में कहा गया है कि चार बच्चे दृष्टिबाधित हैं, जबकि एक बच्चे की एक आंख की रोशनी नहीं है।
बयान में कहा गया है कि मुक्त गए अधिकतर बच्चे बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के रहने वाले हैं और नारायणा में सड़क किनारे स्थित भोजनालयों, होटलों, वाहन मरम्मत की दुकानों और मांस व मिठाई की दुकानों पर काम कर रहे थे।
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