अमेरिकी युद्धपोत के आने से थाईलैंड में खुशी और चिंता दोनों
मध्यपूर्व में लंबी तैनाती के बाद अमेरिका नौसेना का युद्धपोत अब्राहम लिंकन थाईलैंड के पटाया पहुंच रहा है.
मध्यपूर्व में लंबी तैनाती के बाद अमेरिका नौसेना का युद्धपोत अब्राहम लिंकन थाईलैंड के पटाया पहुंच रहा है. इससे यहां की अर्थव्यवस्था सुधरने की उम्मीद है, पर सेक्स टूरिज्म बढ़ने का डर भी.विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन और उसके साथ चल रहे अमेरिकी नौसेना के दो जहाज लाएम चाबांग के पास बुधवार, 2 सितंबर को डॉक करेंगे. थाई अधिकारियों के मुताबिक जहाज पर तैनात करीब 5,000 नाविक और मरीन 200 दिनों तक सागर में रहने के बाद जमीन पर उतरेंगे.
उनके पहुंचने पटाया पहुंचने से पहले ही पुलिस तैयारियों में जुट गई है.
पटाया के मुख्य बीच और नाइटलाइफ वाले इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि सप्ताहांत के दौरान यहां कथित देह व्यापार से जुड़े 40-50 संदिग्धों को हिरासत में भी लिया गया है.
पुलिस प्रमुख आनेक स्राथोंग्यू ने सोमवार को समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि यौनकर्मी सार्वजनिक इलाकों में अधिकारियों की जानकारी के बगैर कुछ गतिविधियां कर सकते हैं. अधिकारी उन्हें रोकना चाहते हैं पर यह आसान नहीं. स्राथोंग्यू ने कहा, "हम पूरी कोशिश कर रहे हैं लेकिन यह कठिन है."
थाईलैंड में देह व्यापार गैरकानूनी है. हालांकि इसके खिलाफ सरकार की कभी कभी होने वाली कार्रवाइयों के बावजूद सैलानियों के प्रमुख इलाके में इसे खुले तौर पर देखा जा सकता है. इनमें बैंकॉक और पटाया के भी कुछ इलाके शामिल हैं.
यूएसएस अब्राहम लिंकन का सफर
विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन पिछले साल नवंबर में सैन डिएगो से रवाना हुआ था. बाद में इसे ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इस्राएली युद्ध में सहयोग के लिए मध्यपूर्व भेज दिया गया. अमेरिका के डेमोक्रैटिक सांसदों का कहना है कि इतने दिनों तक लगातार सागर में रह कर इसने आधुनिक दौर के लिए रिकॉर्ड बनाया है.
हालांकि लंबे समय की तैनाती ने युद्धपोत पर सैनात सैन्यकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए चुनौतियां पैदा की हैं. साथ ही युद्धपोत की सुविधाओं की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई जा रही है. सेना पर नजर रखने वाली दो अंतरराष्ट्रीय जानकारों का कहना है कि सैनिकों में आत्महत्या का रुझान और घटते मनोबल की प्रवृत्ति उभरी है.
थाई अर्थव्यवस्था की उम्मीदें
वियतनाम युद्ध के दौर में पटाया में मछुआरों के एक गांव के कुछ हिस्से को टूरिज्म सेंटर के रूप में बदल दिया गया था. युद्ध में शामिल अमेरिकी सैनिकों की सहायता के लिए यह काम हुआ. पटाया के कुछ हिस्सों को उम्मीद है कि सैनिकों के यहां आने से उनका कारोबार बढ़ेगा.
पटाया के मेयर का कहना है कि अमेरिकी सैनिक हर दिन 30-90 अमेरिकी डॉलर खर्च कर सकते हैं. उनका खर्च इस पर निर्भर करेगा कि वे कितनी देर तटों पर रहते हैं और क्या वे वहां रात गुजारते हैं. सैनिकों को एक साथ जहाज छोड़ कर जाने की अनुमति नहीं मिलती. मेयर पोरामेज एनगामपिचे ने रॉयटर्स से कहा, "इससे पटाया की अर्थव्यवस्था को कुछ समय के लिए राहत मिलनी चाहिए."
यौन शोषण का खतरा
हालांकि बहुत से सैन्यकर्मी पटाया के मनोरंजन उद्योग वाले हिस्सों में भी जा सकते हैं. यह हिस्सा इतना बड़ा है कि अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने दशक भर पहले, "दुनिया में सेक्स टूरिज्म का प्रमुख ठिकानों में से एक कहा था." बैंकॉक यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड टूरिज्म मैनेजमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर पिपातोंग फाकफारे का कहना है, "सेहत और सुरक्षा के लिए जोखिम है क्योंकि बड़ी संख्या में ग्राहकों के आने से यौन शोषण बढ़ सकता है और साथ ही एसटीडी (यौन रोगों) के भी फैलने का खतरा है."
उन्होंने युद्धपोत पर सवार सैनिकों और आम लोगों में तनाव की खबरों और आत्महत्या की कोशिशों से जुड़ी रिपोर्टों को चिंता की एक और वजह बताया.
पटाया की अर्थव्यवस्था पर असर
पटाया में लगभग 3 लाख कमरे हैं. एसोसिएशन ऑफ चोनबुरी टूरिज्म फेडरेशन के प्रेसिडेंट थानेट सुपोर्नसाहसरुंग्सी का कहना है कारोबार पर क्या असर पड़ेगा यह कहना मुश्किल है. यह इस बात पर निर्भर है कि ये लोग अपना समय वहीं बिताते हैं या फिर राजधानी बैंकॉक चले जाते हैं.
पटाया नाइटलाइफ बिजनेस एसोसिएशन की प्रमुख लिसा हैमिल्टन का कहना है, "जब हमें यह खबर मिली कि अमेरिकी नौसेना का जहाज पटाया में डॉक कर रहा है तो यह हमारे लिए उम्मीद की एक किरण बन गई. मैं पटाया में 20 साल से ज्यादा रही हूं लेकिन इस साल कारोबार यहां जितना धीमा है, वैसा कभी नहीं था."
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 01, 2026 06:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

