बाढ़ की चेतावनी के बीच नेपाल में लापता लोगों की तलाश जारी
नेपाल के आपदा प्रबंधन विभाग ने चीन की तरफ से सूचना आने के बाद फिर से बाढ़ की चेतावनी जारी की है.
नेपाल के आपदा प्रबंधन विभाग ने चीन की तरफ से सूचना आने के बाद फिर से बाढ़ की चेतावनी जारी की है.नेपाल में अधिकारियों ने फिर से बाढ़ आने की आशंका जताई है. रविवार को भोटेकोशी नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ प्रभावित जिलों के निवासियों को हाई अलर्ट पर रहने का आग्रह किया है. रविवार की सुबह लोगों के फोन पर बाढ़ की चेतावनी के संदेश भेजे गए. नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी धर्म राज उप्रेती ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि चीनी अधिकारियों ने अपने नेपाली समकक्षों को ऊपरी क्षेत्र में पानी का बहाव बढ़ने की सूचना दी जिसके बाद बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है.
लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों के निवासियों ने कहा कि 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद से उन्हें मिलने वाले लगातार अलर्ट को समझना उनके लिए मुश्किल हो रहा है. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि लगातार बदलती खबरों के बीच वे अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें. स्थानीय निवासी गोविंद श्रेष्ठ ने कहा, "कभी-कभी वे कहते हैं कि बाढ़ आ रही है, फिर हमें रात में भी ऊंची जगहों पर भागना पड़ता है. बारिश भी हो रही है. यह मेरे लिए वास्तव में बहुत मुश्किल है. मेरे पिता 72 साल के हैं और मां 70 साल की हैं. मुझे उन्हें उठाकर ले जाना पड़ता है और मैं थक चुका हूं. जो लोग अभी जिंदा हैं, उनके लिए स्थिति ऐसी ही बनी हुई है.”
26 अगस्त को आए भयावह सैलाब में अब तक नेपाल और तिब्बत में मृतकों की संख्या बढ़कर 750 हो गई और 3,000 से अधिक लोग लापता हैं. लेकिन खराब मौसम और जलस्तर बढ़ने के कारण खतरे की संभावना बनी हुई है. इससे राहत कार्य में रुकावटें आ रही हैं. प्रभावित इलाकों में से एक रोशुकी बाजार के पास जलस्तर बढ़ने के कारण वहां के निवासियों को ऊंची जगह पर जाकर शरण लेनी पड़ी. वहां के निवासी बिपिन लुइटल ने बताया कि इस इलाके में चल रहे बचावकार्य को अचानक जलस्तर बढ़ने के कारण रोकना पड़ा.
वहीं, गलछी शहर में निवासियों ने भी बाढ़ की चेतावनी के बाद ऊंची जगहों पर जाकर शरण ली. प्रभावित इलाकों में बड़े कंक्रीट और छोटे सस्पेंशन ब्रिज नष्ट हो गए, जिससे नदी के दूसरी तरफ के समुदायों के लिए आवाजाही कठिन हो गई है. 47 साल के सत्तन सिंह तामांग बुधवार को बाढ़ आने के समय एक पुल के पास काम कर रहे थे. वह बताते हैं, "जो लोग वहां हैं वे अब वहीं फंसे हुए हैं. जो लोग यहां हैं वे यहां फंसे हुए हैं. यह बहुत मुश्किल होने वाला है.”
हाइड्रोपावर साइट पर फंसे कर्मचारियों को बचाने की जद्दोजहद
इस आपदा में करीब 900 से ज्यादा हाइड्रोपावर प्लांट कर्मचारी लापता हैं जिनमें से कई के सुरंग में फंसे होने की आशंका है. उन लोगों की तलाश तेजी से की जा रही है ताकि उन्हें जिंदा बचाया जा सके. नेपाल की सेना और इंजीनियरों की टीम मिलकर त्रिशूली 3ए हाइड्रोइलेक्ट्रिक साइट में फंसे कर्मचारियों को निकालने के अभियान में लगी है.
नेपाल के गृह मंत्री ने जानकारी दी है कि टीम इस साइट पर निकासी के लिए एक छोटा सा रास्ता बनाने में सफल हुई है. लेकिन बीती रात हुई बारिश के कारण जलस्तर बढ़ा और बचावकार्य को रोकना पड़ा और सुरंग में फिर से पानी भर गया. अनुमान है कि इस साइट पर 100 से ज्यादा कामगार फंसे हुए हैं.
ऐसी और सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को बचाने के लिए युद्धस्तर पर काम जारी है. इसमें चीन और भारत की टीमें भी नेपाल की मदद कर रही हैं. लेकिन सिर्फ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के आस पास ही नहीं बल्कि कई ऐसी जगहों पर रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना प पड़ा, जहां बाढ़ खतरा है और बारिश हो रही है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने नेपाल के विदेश मंत्री से फोन पर बातचीत की और इसे अब तक की सबसे भयानक क्रॉस बॉर्डर आपदा कहा.
लावारिस शवों का अंतिम संस्कार
आपदा में मारे गए कई ऐसे लोग भी हैं जिनकी पहचान नहीं की जा सकी है और उनके शव अब सड़ने लगे हैं. प्रशासन ने अब उनके लिए सामूहिक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी है. लेकिन प्रशासन उनकी तस्वीरें, डीएनए सैंपल भी इकट्ठा कर रहा है ताकि अंतिम संस्कार के बाद भी उनके परिवारवालों का पता लगाया जा सके.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत के दौरान पुलिस अधिकारी अनिल थापा ने कहा, "जितने भी शव हमें मिले हैं उनमें से आधे पहचाने जाने की हालत में नहीं हैं. कई के सिर नहीं हैं तो कई शवों के सिर्फ हाथ और पैर बचे हैं. ज्यादातर शवों के आधे से ज्यादा सिर नहीं हैं. "बीते शनिवार को 100 से ज्यादा ऐसे शवों को दफनाने के बाद प्रशासन अब और भी बड़े स्तर पर लोगों के अंतिम संस्कार के लिए कब्र खोद रहा है. हालांकि, लापता लोगों के परिजन अभी भी अस्पतालों और राहत केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं कि शायद उनके अपने जिंदा हों.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 30, 2026 03:21 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

