घरेलू कामगारों से दुर्व्यवहार के आरोपों के बीच राजनयिक छूट के दुरुपयोग पर उठे सवाल
राजनयिकों के हाथों शोषण का शिकार होने वाले घरेलू कामगारों को अक्सर न्याय नहीं मिल पाता, क्योंकि उनके साथ बुरा बर्ताव करने वालों को ‘राजनयिक छूट’ का सुरक्षा कवच मिला होता है.
राजनयिकों के हाथों शोषण का शिकार होने वाले घरेलू कामगारों को अक्सर न्याय नहीं मिल पाता, क्योंकि उनके साथ बुरा बर्ताव करने वालों को ‘राजनयिक छूट’ का सुरक्षा कवच मिला होता है. हालांकि इसमें सुधार की कुछ उम्मीदें जगी हैं.फिलीपींस की रहने वाली घरेलू नौकरानी मलाया (बदला हुआ नाम) को 12 सालों तक ऐसा महसूस होता रहा जैसे उनकी जिंदगी उनके पूर्व मालिक के खिलाफ चल रहे अदालती मुकदमे के उतार-चढ़ाव के भरोसे ही चल रही थी. उनका पूर्व मालिक संयुक्त अरब अमीरात का एक राजनयिक था. मलाया साल 2013 में उस विदेशी राजनयिक और उसके परिवार के साथ लंदन आने से पहले, संयुक्त अरब अमीरात में ही उसके लिए काम कर रही थी.
अदालती दस्तावेजों से पता चलता है कि मलाया को 89 दिनों तक ऐसी परिस्थितियों में रखा गया, जिन्हें गुलामी जैसी स्थिति बताया गया है. वहां से भागने के बाद भी उनके लिए न्याय पाना आसान नहीं था. मामला दर्ज कराने में उन्हें वर्षों तक सरकारी अड़चनों और केस खारिज होने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, क्योंकि उनके नियोक्ता को राजनयिक छूट (डिप्लोमैटिक इम्युनिटी) हासिल थी.
इस साल की शुरुआत में ब्रिटेन की एक अदालत ने यूएई सरकार को मलाया को 2.7 लाख पाउंड (करीब 3.12 लाख यूरो या 3.62 लाख डॉलर) मुआवजा देने का आदेश दिया. यह मुआवजा गलत तरीके से कैद रखने, वेतन नहीं देने और मानसिक आघात के लिए दिया गया. जब डीडब्ल्यू ने उनसे बात की, तो उनकी आंखें भर आईं. उन्होंने कहा, "मैं सच में पूरी दुनिया को चिल्लाकर बताना चाहती हूं कि हमने यह कर दिखाया. यह मैं हूं. मैंने कभी हार नहीं मानी. मैं कह सकती हूं कि यह एक जीत है.”
वह आगे बताती हैं, "हमें लड़ते रहना होगा, क्योंकि मैं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए लड़ रही हूं. मैं नहीं चाहती कि किसी और को भी वैसे ही भयानक अनुभव से गुजरना पड़े.”
जब इस मामले में लंदन में स्थित यूएई दूतावास की प्रतिक्रिया के लिए अनुरोध किया गया, तो अनुरोध वाले ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया गया.
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अदालतों ने राजनयिक छूट पर सीमाएं तय की हैं
मलाया का मामला अकेले उनका नहीं है, बल्कि ऐसे कई मामलों में से एक है जो दिखाते हैं कि अब राजनयिक छूट को लेकर कानूनी नियम पूरी दुनिया में बदल रहे हैं. साल 2022 में, ब्रिटेन की अदालतों ने फैसला सुनाया था कि आधुनिक गुलामी या मानव तस्करी के मामलों में राजनयिक अपनी ‘छूट' का बहाना नहीं बना सकते. वहीं साल 2025 में, स्विट्जरलैंड की अदालत ने भी एक ऐसा ही रास्ता खोला, जिसके तहत घरेलू नौकरों के शोषण के मामलों की जांच अब सीधे मालिक और कर्मचारी के सामान्य श्रम विवाद की तरह की जा सकती है.
दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ रहे हैं स्कैम सेंटर
जिनेवा में एसआईटी वर्कर्स यूनियन की प्रमुख मिरेला फाल्को ने डीडब्ल्यू को बताया, "अब इन सभी लाचार और बेबस कर्मचारियों को इंसाफ मिलने की उम्मीद है. आखिरकार, इन्हीं लोगों की मदद से राजनयिक अपने रोजमर्रा के कामों की चिंता से मुक्त होकर अपने आधिकारिक दायित्व निभा पाते हैं.”
कोरा एस्पेंटो और उनके दो बच्चों ने साल 2012 में नीदरलैंड्स में एक सऊदी राजनयिक के यहां काम किया था. सुबह तड़के एक सुनियोजित तरीके से भागने के बाद, एस्पेंटो को पता चला कि वह अपने मालिक पर मुकदमा भी नहीं कर सकतीं, क्योंकि उसे राजनयिक छूट हासिल है.
एस्पेंटो अब एम्स्टर्डम की एक मानवाधिकार संस्था ‘फेयरवर्क' में कल्चरल मीडिएटर के रूप में काम करती हैं. वह दुर्व्यवहार और शोषण का सामना करने वाले अन्य प्रवासी मजदूरों की मदद कर रही हैं, जिनमें से कई लोगों का शोषण राजनयिकों द्वारा किया गया है.
एस्पेंटो ने डीडब्ल्यू को बताया, "बुरा बर्ताव करने वाले राजनयिकों से जुड़ी समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है. अदालतों को ऐसे और भी फैसले सुनाने चाहिए जो यह साफ करें कि राजनयिक छूट का नियम ऐसे मामलों में लागू नहीं होता, खासकर जब मामला घरेलू नौकरों के शोषण से जुड़ा हो.”
वियना कन्वेंशन का फायदा उठा रहे राजनयिक
राजनयिक छूट एक कानूनी सुरक्षा है, जो 1961 के वियना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशंस के तहत विदेशी राजनयिकों को दी जाती है. इसका मकसद राजनयिकों को दीवानी और आपराधिक मुकदमों से बचाना है, ताकि वे बिना किसी रोक-टोक के अपना काम कर सकें. हालांकि, कुछ राजनयिकों ने इस नियम की कमियों का फायदा उठाकर कानूनी कार्रवाई से पूरी तरह बचने की कोशिश की है.
फिलीपींस के न्यूज आउटलेट ‘रैपलर' की साल 2023 की एक ग्लोबल इन्वेस्टिगेशन ने इस समस्या की गंभीरता को दुनिया के सामने रखा. ओपन-सोर्स डॉक्युमेंट और घरेलू नौकरों के इंटरव्यू से यह साफ हुआ कि साल 1988 से 2021 के बीच 18 अलग-अलग देशों में 200 से ज्यादा घरेलू नौकरों ने 160 राजनयिकों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं. हालांकि, इनमें से ज्यादातर मामलों को राजनयिक छूट के कारण खारिज कर दिया गया था.
यह कानूनी अड़चन तो उन सामान्य मुश्किलों के अलावा, एक और बड़ी मुसीबत की तरह है जिससे बाहर निकलने के लिए दुनिया भर के लाखों घरेलू कामगार हर दिन संघर्ष करने को मजबूर हैं. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के एक अनुमान के मुताबिक, पूरी दुनिया में 7.5 करोड़ से ज्यादा लोग घरेलू कामगार के तौर पर काम कर रहे हैं. इनमें से करीब 81 फीसदी लोग अनौपचारिक रूप से काम पर रखे गए हैं. इसी वजह से उन्हें न्यूनतम वेतन और यौन उत्पीड़न से सुरक्षा जैसे बुनियादी कामकाजी अधिकार नहीं मिल पाते. हालांकि, ‘आईएलओ डोमेस्टिक वर्कर्स कन्वेंशन, नंबर 189', श्रम कानूनों और नियमों में घरेलू कामगारों को शामिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तय करता है.
यूरोप और लैटिन अमेरिका से अच्छे संकेत
क्लेयर हॉब्डेन, आईएलओ में घरेलू कामगारों के मामलों की तकनीकी विशेषज्ञ हैं. उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया कि अब पहले से कहीं ज्यादा देशों ने घरेलू नौकरों के वेतन, काम के घंटों और अन्य फायदों को लेकर कानूनी सुरक्षा लागू की है. हालांकि, इन नियमों को जमीन पर उतारने का काम हर जगह एक जैसा नहीं रहा है. आज भी अनौपचारिक तरीके से काम करने वाले कई मजदूर अस्पष्ट कानून में फंसे हुए हैं जहां उन्हें कोई सुरक्षा नहीं मिलती.
हॉब्डेन ने समझाया कि जहां लैटिन अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों ने इस दिशा में अच्छी तरक्की दिखाई है. वहीं, अफ्रीका, एशिया-प्रशांत और अरब देशों में घरेलू नौकरों को आज भी कानूनी अधिकारों से बाहर रखना एक आम बात है. कार्यस्थल पर हिंसा, उत्पीड़न, और उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा से जुड़े खतरे अब भी उनके लिए बहुत बड़ी चिंता बने हुए हैं.
फिलीपींस के राजदूत द्वारा फिलीपीनी नौकरानी के साथ दुर्व्यवहार
फिर भी, कई लोग हालिया अदालती फैसलों और कानूनी बदलावों को उम्मीद की किरण के रूप में देखते हैं.
एलेन सना, मनीला स्थित सेंटर फॉर माइग्रेंट एडवोकेसी की कार्यकारी निदेशक हैं. उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, "अदालतों के ये फैसले सभी कामगारों के साथ एक जैसा बर्ताव करने और उन पर श्रम कानूनों को समान रूप से लागू करने की बात पर मुहर लगाते हैं, चाहे वे स्थानीय कामगार हों या विदेशी प्रवासी कामगार. हम उम्मीद करते हैं कि दूसरे देश भी इसी रास्ते पर चलेंगे और राजनयिक छूट के दायरे को साफ तौर पर तय करेंगे, खासकर जब वे अपने घरों में काम करने के लिए घरेलू कामगारों को रखते हैं.”
फिलीपींस दुनिया भर के कई देशों के लिए प्रवासी कामगारों का एक बहुत बड़ा जरिया है, खासकर घरेलू सहायकों और नर्सों के मामले में.
इंसाफ के 25 साल: जब जर्मनी ने मानी नाजी दौर के बंधुआ मजदूरों के प्रति अपनी जवाबदेही
सना ने फिलीपींस सरकार से गुजारिश की है कि वह विदेशी सरकारों से बातचीत करे और प्रवासी कामगारों के अधिकारों को मजबूत बनाए. साथ ही, उन्होंने फिलीपींस से अपने खुद के राजनयिकों की मनमानी पर भी लगाम लगाने को कहा है.
साल 2021 में, एक ऐसा ही वीडियो वायरल हुआ था जिसमें ब्राजील में फिलीपींस की तत्कालीन राजदूत मारीचू मौरो अपने ही घर में काम करने वाली 51 साल की फिलीपीनी महिला के साथ मारपीट करती दिखाई दे रही थीं. इस घटना के बाद मौरो को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था.
सना ने सवाल उठाया, "फिलीपींस दुनिया भर में प्रवासी कामगारों की सुरक्षा के लिए मिसाल कैसे बन सकता है, जब खुद देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाले बड़े अधिकारी ही हमारे अपने ही लोगों का शोषण करने की हिम्मत करते हैं? सामने आए सबूतों और खोजी रिपोर्टों के आधार पर, राजनयिकों के लिए नियम और सख्त होने चाहिए.”
इस प्रोजेक्ट की रिपोर्टिंग के लिए पुलित्जर सेंटर से ग्रांट के जरिए मदद मिली है. साथ ही, इस रिपोर्ट में कामगारों की सुरक्षा और निजता को ध्यान में रखते हुए उनके नाम बदल दिए गए हैं.