नेपाल में 7 दिन बाद भी लोगों के जिंदा फंसे होने की उम्मीद
नेपाल में राहत और बचाव के काम में जुटे अधिकारियों को उम्मीद है कि पावर प्लांट के भूमिगत हिस्से में फंसे मजदूर अब भी जीवित हैं.
नेपाल में राहत और बचाव के काम में जुटे अधिकारियों को उम्मीद है कि पावर प्लांट के भूमिगत हिस्से में फंसे मजदूर अब भी जीवित हैं. हिमस्खलन के बाद आई भयानक बाढ़ के बाद वहां कई लोग फंसे हुए हैं.नेपालके रासुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्लांट की भूमिगत सुरंग में के करीब 46 लोगों के फंसे होने की उम्मीद है. नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के बोर्ड सदस्य अंशु किरण शाही ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "हमें पूरी उम्मीद है कि वे लोग एक हफ्ते बाद भी जीवित हैं...उनके पास वहां उस इमारत में खाना और पानी है."
चीन के साथ लगती सीमा पर हिमस्खलन के बाद भारी मात्रा में बर्फ, मिट्टी और मलबे की बाढ़ ने इस प्लांट को पूरी तरह ढंक दिया. नेपाल के अधिकारियों ने अब तक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से 279 लोगों को सुरक्षित निकाला है. हालांकि अब भी 639 लोग लापता हैं.
माना जा रहा है कि कुछ लोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे हो सकते हैं. नेपाल, भारत और चीन के बचावकर्मी जमीन खोद कर इन लोगों तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं.
पीड़ितों तक पहुंचने की बार-बार कोशिश
111 मेगावाट का रासुवागढ़ी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट रासुवा जिले में है. यह पहाड़ की घाटी में नेपाल चीन की सीमा से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर है.
अंशु किरण शाही का कहना है, "यह अकेला ऐसा प्रोजेक्ट है जिसमें सुरंगों के जरिए चल कर जाया जा सकता है. सेना तीन दिन से कोशिश कर रही है लेकिन उस जगह तक नहीं पहुंच सकी है. हम दोबारा जा रहे हैं."
बचावकर्मी सुरंग में दूसरी जगह फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं. नेपाली सेना के प्रवक्ता राजा राम बासनेट के मुताबिक इन प्लांटों में ऐसी जगहें और कमरे हैं जहां लोग रह सकते हैं. ऊपरी त्रिशुली 3ए फैसिलिटी एक और प्लांट है जो बाढ़ की चपेट में आया है. शाही ने बताया कि यहां इतना ज्यादा मलबा जमा हो गया था कि बचावकर्मियों को सुरंग का पता लगाने में तीन दिन लग गए.
उनका यह भी कहना है, "हम लोगों के जिंदा होने की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि हमें बताया गया है कि अंदर सूखी जगहें हैं. हम सुरंगों को तोड़ कर उनमें घुसने की कोशिश कर रहे हैं."
अधिकारियों के मुताबिक नेपाल में जो भी तकनीक उपलब्ध है उसका इस्तेमाल जिंदा लोगों का पता लगाने में किया जा रहा है. उन्हें भारतीय, चायनीज, कोरियन यहां तक कि ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों से भी मदद मिल रही है.
सांकेतिक अंतिम संस्कार
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक इस आपदाकी वजह से करीब 22 लाख टन मलबा पैदा हुआ है. इनमें इमारतों के हिस्से, चट्टान और तलछट शामिल हैं. यह न्यूयॉर्क की इम्पायर स्टेट की छह इमारतों के बराबर है.
इस आपदा में नेपाल में अब तक 1,118 लोगों के मरने की पुष्टि हुई है और लगभग 3,900 लोग लापता हैं. राहत और बचाव के अभियान में अब तक 324 विदेशी नागरिकों को बचाया गया है जबकि 39 देशों के 590 लोग लापता हैं.
हादसे में सबसे ज्यादा प्रभावित नुवाकोट जिले के कुछ परिवारों ने अब भी लापता कुछ रिश्तेदारों का सांकेतिक अंतिम संस्कार किया है. उन्होंने अब उनके जीवित होने की उम्मीद छोड़ दी है और उनकी आत्मा की शांति के लिए उनका अंतिम संस्कार किया.
इस बीच नेपाल के अधिकारी उन लोगों के शव अस्थाई कब्रों में दफना रहे हैं जिनकी पहचान नहीं हो पाई है. उनके चेहरों की तस्वीरें, पहचान के निशान और डीएनए सैंपल रिकॉर्ड के लिए रखा गया है ताकि अगर बाद में उनके शवों की पहचान हो जाए तो उन्हें परिजनों को सौंपा जा सके.
इस बीच चीन ग्यिरोंग पोर्ट से नेपाल की सीमा तक बचावकर्मियों के लिए अस्थाई एक्सेस रोड बना रहा है. बुधवार को चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी ने इसकी जानकारी दी.
सीमावर्ती क्षेत्र में भारी बचाव अभियान और मलबा हटाने के लिए भारी मशीनें इस सड़क से प्रभावित इलाकों तक पहुंचेंगी. वहां जो सड़क पहले से थी वह पूरी तरह से पानी, कीचड़ और चट्टानों के नीचे दब गई है. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक चीन में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई है और 541 लोग लापता हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 03, 2026 12:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

