Nepal Flash Floods: नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 392 हुआ; 290 भारतीय लापता, नई बनी झील से फिर बाढ़ का खतरा
नेपाल और तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर ढहने और हिम-चट्टान भूस्खलन के बाद आई भीषण बाढ़ में मृतकों की संख्या बढ़कर 392 हो गई है, जबकि दोनों तरफ कुल 1,468 लोग लापता हैं. लापता लोगों में 290 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जिनकी तलाश के लिए भारत और नेपाल की एजेंसियां लगातार जुटी हुई हैं. इस बीच, भोटे कोशी नदी के ऊपरी हिस्से में प्राकृतिक अवरोध से बनी एक नई झील में भारी जलजमाव होने से निचले इलाकों में फिर से बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। भारत ने अब तक कुल 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी है.
काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने से भोटे कोशी (Bhote Koshi) और त्रिशूली (Trishuli) नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के बहाव के बाद स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों में अब तक 392 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1,400 से अधिक लोग अब भी लापता हैं.
नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में सड़कें और पुल बह जाने के कारण राहत व बचाव दल को दुर्गम इलाकों तक पहुंचने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. यह भी पढ़ें: Nepal Flash Floods: नेपाल बाढ़ का कहर, सेना की गोद में सुरक्षित पहुंचे जुड़वां बच्चे, मौत का आंकड़ा 350 के पार, सैकड़ों अब भी लापता
हताहतों और लापता लोगों के आंकड़े
आपदा प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार:
- मृतकों की संख्या: कुल 392 मौतों में से 389 मौतें नेपाल में दर्ज की गई हैं, जबकि 3 मौतें तिब्बत क्षेत्र में हुई हैं.
- लापता लोगों की स्थिति: नेपाल में 910 लोग लापता बताए जा रहे हैं, वहीं तिब्बत सीमा में 558 लोग लापता हैं.
- बचाव कार्य: नेपाल पुलिस और सेना ने हेलिकॉप्टरों के जरिए 796 लोगों (जिनमें 50 विदेशी नागरिक शामिल हैं) को सुरक्षित एयरलिफ्ट किया है, जबकि इतने ही लोगों को जमीनी रास्ते से निकाला गया है.
290 भारतीय लापता, विदेश मंत्रालय ने शुरू किए विशेष प्रयास
बाढ़ प्रभावित इलाकों से लापता 290 भारतीय नागरिकों का पता लगाने के लिए भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने नेपाल प्रशासन, राज्य सरकारों और टूर ऑपरेटरों के साथ समन्वय तेज कर दिया है.
- रेस्क्यू किए गए भारतीय: अब तक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें त्रिशूली-I जलविद्युत परियोजना के 63 कर्मचारी और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं.
- तिब्बत में फंसे लोग: तिब्बत की तरफ भी लगभग 200 भारतीय नागरिकों ने सुरक्षित निकासी के लिए सहायता मांगी है.
- 24-घंटे कंट्रोल रूम: विदेश मंत्रालय ने लापता लोगों की खोजबीन और राहत कार्यों के लिए 24 घंटे सक्रिय रहने वाला विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया है.
नई बैरियर झील से निचले इलाकों में दोबारा बाढ़ का खतरा
राहत अभियानों के बीच भोटे कोशी नदी प्रणाली के स्रोत के पास प्राकृतिक रूप से बनी एक नई बैरियर झील (Barrier Lake) ने खतरे की घंटी बजा दी है.
चीनी अधिकारियों के अनुसार, झील में लगभग 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका है और अगले तीन दिनों में इसमें 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी और बढ़ सकता है. यदि यह प्राकृतिक अवरोध टूटता है, तो निचले इलाकों में पानी का एक और तेज सैलाब आ सकता है. नेपाल के जलविज्ञान और मौसम विभाग ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी जारी की है.
भूकंप नहीं, ग्लेशियर ढहने से उत्पन्न हुई त्रासदी
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के संशोधित विश्लेषण के अनुसार, इस घटना के दौरान दर्ज की गई भूकंपीय तरंगें किसी भूकंप की नहीं, बल्कि भारी ग्लेशियर ढहने और हिम-चट्टान मलबे के अचानक बहाव के कारण उत्पन्न हुई थीं.
इस मलबे ने पहले ल्हेंडे नदी के प्रवाह को रोका और बाद में बांध टूटने से भारी मात्रा में पानी, बर्फ और चट्टानें निचले इलाकों में विनाश का कारण बनीं.
बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान, भारत से भेजी गई 47.5 टन राहत सामग्री
- ढांचागत क्षति: बेत्रावती से रसुवागढ़ी के बीच 42 किलोमीटर लंबा सड़क मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया है. लगभग 35 मोटर वाहन पुल, 45 झूला पुल और त्रिशूली व देवीघाट जैसी प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है.
- भारत की मानवीय सहायता: भारत ने अपनी राहत सहायता का दायरा बढ़ाते हुए गुरुवार को 5 टन अतिरिक्त सामग्री भेजी. इसके साथ ही भारत की कुल मानवीय सहायता 47.5 टन हो गई है, जिसमें अस्थायी टेंट, कंबल, दवाइयां, सोलर लैंप, हाइजीन किट और भोजन के पैकेट शामिल हैं.