USA Independence Day History: अमेरिका की स्वतंत्रता का इतिहास, 4 जुलाई सिर्फ एक दिन नहीं, एक लंबे संघर्ष की कहानी है

अमेरिका की स्वतंत्रता की कहानी ब्रिटेन द्वारा लगाए गए अन्यायपूर्ण करों के विरोध से शुरू हुई. 4 जुलाई, 1776 को स्वतंत्रता की घोषणा की गई, जिसके कारण एक लंबा क्रांतिकारी युद्ध हुआ. अंततः, 1783 में पेरिस की संधि के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ.

American Independence Day: जब हम अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में 4 जुलाई (4th of July) की तारीख, आतिशबाजी और जश्न की तस्वीरें आती हैं. लेकिन अमेरिका की आजादी की कहानी सिर्फ एक दिन में नहीं लिखी गई. यह दशकों के असंतोष, वैचारिक क्रांति, साहसी विरोध और एक लंबे सशस्त्र संघर्ष का परिणाम थी. चलिए, इस ऐतिहासिक सफर को विस्तार से जानते हैं.

क्रांति के बीज कैसे बोए गए

18वीं शताब्दी के मध्य में, उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट पर ब्रिटेन की 13 कॉलोनियां (बस्तियां) थीं. शुरुआत में इन कॉलोनियों को काफी हद तक अपनी सरकार चलाने की आजादी थी. ब्रिटेन और इन कॉलोनियों के बीच संबंध काफी हद तक ठीक थे. लेकिन यह स्थिति जल्द ही बदलने वाली थी.

1. सात वर्षीय युद्ध का प्रभाव: 1756 से 1763 तक ब्रिटेन और फ्रांस के बीच सात वर्षीय युद्ध हुआ, जिसका एक बड़ा मोर्चा उत्तरी अमेरिका में भी था. इस युद्ध में ब्रिटेन की जीत तो हुई, लेकिन इसकी उसे भारी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ी. युद्ध के खर्चों से ब्रिटिश सरकार पर भारी कर्ज हो गया.

2. "प्रतिनिधित्व के बिना कराधान नहीं": अपने खजाने को फिर से भरने के लिए, ब्रिटिश संसद ने अमेरिकी कॉलोनियों पर सीधे टैक्स लगाने का फैसला किया. यहीं से संघर्ष की शुरुआत हुई.

बढ़ता तनाव और प्रमुख घटनाएं

ब्रिटेन की नीतियों ने कॉलोनियों के लोगों में गुस्सा और अविश्वास भर दिया था. छोटी-छोटी घटनाएँ अब बड़े टकराव का रूप ले रही थीं.

स्वतंत्रता संग्राम का आरंभ

अब विरोध प्रदर्शन एक सशस्त्र क्रांति का रूप ले चुका था.

1. प्रथम महाद्वीपीय कांग्रेस (1774): 13 में से 12 कॉलोनियों के प्रतिनिधि फिलाडेल्फिया में मिले. उन्होंने ब्रिटिश सामानों के बहिष्कार का आह्वान किया और राजा जॉर्ज तृतीय को अपनी शिकायतें बताते हुए एक याचिका भेजी.

2. लेक्सिंगटन और कॉनकॉर्ड की लड़ाइयां (1775): अप्रैल 1775 में, ब्रिटिश सैनिकों को लेक्सिंगटन और कॉनकॉर्ड शहरों में क्रांतिकारियों के हथियारों के जखीरे को जब्त करने के लिए भेजा गया. यहीं पर अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम की पहली गोली चली. यह लड़ाई "दुनिया भर में सुनी गई गोली" (The shot heard 'round the world) के नाम से प्रसिद्ध हुई.

3. द्वितीय महाद्वीपीय कांग्रेस (1775): लड़ाइयां शुरू होने के बाद, फिलाडेल्फिया में फिर से कांग्रेस की बैठक हुई. इस बार, उन्होंने एक कॉन्टिनेंटल आर्मी (महाद्वीपीय सेना) बनाने का फैसला किया और वर्जीनिया के जॉर्ज वॉशिंगटन को इसका कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया.

स्वतंत्रता की ऐतिहासिक घोषणा (4 जुलाई, 1776)

युद्ध तो शुरू हो गया था, लेकिन अभी तक लक्ष्य पूर्ण स्वतंत्रता नहीं था. बहुत से लोग अभी भी ब्रिटेन के साथ सुलह की उम्मीद कर रहे थे. लेकिन 1776 की शुरुआत में थॉमस पेन की एक छोटी पुस्तिका "कॉमन सेंस" ने सब कुछ बदल दिया. इस पुस्तिका ने सरल और प्रभावी भाषा में राजशाही की आलोचना की और पूर्ण स्वतंत्रता की जोरदार वकालत की. यह बहुत लोकप्रिय हुई और इसने आम लोगों को आजादी के विचार के लिए तैयार किया.

इसी माहौल में, द्वितीय महाद्वीपीय कांग्रेस ने 4 जुलाई, 1776 को "स्वतंत्रता की घोषणा" (Declaration of Independence) को अपनाया. मुख्य रूप से थॉमस जेफरसन द्वारा लिखे गए इस दस्तावेज़ ने घोषणा की कि 13 कॉलोनियां अब स्वतंत्र और संप्रभु राज्य हैं. इसमें यह प्रसिद्ध पंक्ति भी शामिल थी कि सभी मनुष्य समान बनाए गए हैं और उन्हें कुछ अहरणीय अधिकार प्राप्त हैं, जिनमें "जीवन, स्वतंत्रता और खुशी की तलाश" शामिल है.

क्रांतिकारी युद्ध और विजय

घोषणा करना एक बात थी, और इसे हकीकत में बदलना दूसरी. अमेरिकी सेना को दुनिया की सबसे शक्तिशाली ब्रिटिश सेना का सामना करना था.

शांति और मान्यता: पेरिस की संधि (1783)

यॉर्कटाउन में हार के बाद, ब्रिटेन ने शांति वार्ता शुरू की. 3 सितंबर, 1783 को पेरिस में एक संधि पर हस्ताक्षर किए गए. इस "पेरिस की संधि" के तहत, ब्रिटेन ने आधिकारिक तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी.

अमेरिका की स्वतंत्रता एक लंबी और कठिन यात्रा थी. यह "प्रतिनिधित्व के बिना कराधान" जैसे मुद्दों पर शुरू हुई और जीवन और स्वतंत्रता के सार्वभौमिक सिद्धांतों पर आधारित एक नए राष्ट्र के जन्म पर समाप्त हुई. इसलिए, जब आज अमेरिकी 4 जुलाई मनाते हैं, तो वे सिर्फ एक दिन की छुट्टी नहीं मनाते, बल्कि वे उन नेताओं के साहस, सैनिकों के बलिदान और उन आदर्शों को याद करते हैं जिन्होंने दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्रों में से एक को जन्म दिया.

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