वीजा, मास्टरकार्ड, एप्पल पे और गूगल पे जैसे अमेरिकी पेमेंट सिस्टम को चुनौती देगा ईयू
वीजा, मास्टरकार्ड, एप्पल पे और गूगल पे, इन भुगतान प्रणालियों अमेरिकी टेक कंपनियां नियंत्रित करती हैं.
वीजा, मास्टरकार्ड, एप्पल पे और गूगल पे, इन भुगतान प्रणालियों अमेरिकी टेक कंपनियां नियंत्रित करती हैं. यूरोपीय संघ, अपने डिजिटल यूरो से इस सिस्टम को चुनौती देने जा रहा है.यूरोपीय संघ का मानना है कि डिजिटल यूरो, उसकी अमेरिकी भुगतान प्रणालियों पर निर्भरता कम कर सकता है. अमेरिकी भुगतान प्रणालियों में वीजा, मास्टरकार्ड, एप्पल पे और गूगल पे जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं. संघ का लक्ष्य वित्तीय लेन देन के इस क्षेत्र में यूरोपीय कंपनियों को बढ़ावा देना है.
ब्रसेल्स को उम्मीद है कि डिजिटल यूरो, भुगतान का एक गैर अमेरिकी और स्थानीय विकल्प बन सकेगा. डिजिटल यूरो के जरिए, लोग दुकानों और इंटरनेट पर आसानी से भुगतान कर सकेंगे. इसे कार्ड, मोबाइल ऐप या बैंकिंग ऐप पर भी इस्तेमाल किया जा सकेगा.
कैशलेस होती दुनिया में कैश लेना अनिवार्य बनाएगा ऑस्ट्रेलिया
मंगलवार को यूरोपीय संघ इस दिशा में एक अहम कदम उठाने जा रहा है. लंबे समय से लंबित पड़े डिजिटल यूरो प्रस्ताव पर 23 जून को यूरोपीय संसद में मतदान होगा. यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने साल 2020 में पहली बार डिजिटल यूरो का प्रस्ताव रखा था.
डिजिटल यूरो को लागू करने से पहले प्रस्ताव को मंजूरी मिलनी जरूरी है. और इस मंजूरी के लिए संघ के सदस्य देशों और यूरोपीय संसद की सहमति अनिवार्य है. यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ईसीबी) को उम्मीद है कि 2026 के अंत तक मंजूरी व अन्य औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी और 2029 में डिजिटल यूरो, लोगों के पास उपलब्ध होगा.
क्या है डिजिटल यूरो और ये कैसे काम करेगा
डिजिटल यूरो, बैंक खाते में रखी नकदी जैसा नहीं होगा. फिलहाल जब हम कार्ड, एप्पल या गूगल पे इस्तेमाल करते हैं तो हम सीधे बैंक खाते में रखे पैसे को इस्तेमाल कर रहे होते हैं. इसके उलट डिजिटल यूरो, एक अलग वर्चुअल वॉलेट होगा. डिजिटल यूरो का मूल्य, बैंक नोट वाले यूरो के बराबर ही होगा.
कोई भी यूजर डिजिटल यूरो का एक अकाउंट बनाकर अपने बैंक खाते, पोस्ट ऑफिस खाते या कैश डिपॉजिट से इसमें पैसा ट्रांसफर करेगा. ट्रांसफर किए गए पैसे को डिजिटल यूरो में बदला जाएगा, या दूसरे शब्दों में कहें तो, इस पैसे से डिजिटल यूरो खरीदे जाएंगे. डिजिटल यूरो से भुगतान करते समय, पैसा सीधे बैंक अकाउंट से कटने के बजाए, डिजिटल यूरो वॉलेट से कटेगा.
अधिकारियों का दावा है कि यह सिस्टम भुगतानकर्ता की निजता की सुरक्षा करेगा. इस तरह पेमेंट रिसीव करने वाला, भुगतान करने वाले की और उसके बैंक खाते से जुड़ी कोई भी जानकारी हासिल नहीं कर सकेगा. अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि ये सिस्टम नगदी की तरह, ऑफलाइन भी काम करेगा.
ईसीबी में डिजिटल यूरो डायरेक्टर के सलाहकार अलेसांद्रो जियोवानिनी कहते हैं, "यह हर चीज नहीं बदलेगा. कैश आगे भी उपलब्ध रहेगा, और लोग भुगतान के अन्य मौजूदा तरीकों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं."
क्यों डिजिटल यूरो अपनाना चाहता है ईयू
यूरोपीय संसद के फ्रांस के मध्यमार्गी सांसद गिल्स बोए ने कहा, "हम यूरोपियों को अमेरिका पर अपनी निर्भरता को लेकर कई बार चेतावनी मिल चुकी है. अब हम पूरी तरह जाग चुके हैं, लेकिन हर बार उस तरह कदम नहीं उठा रहे हैं." बोए के मुताबिक मंगलवार का मतदान पूरे यूरोप की भुगतान प्रणाली को एक संप्रभुता भरी हकीकत में बदल सकता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी भुगतान प्रणाली तटस्थ नहीं होती, बल्कि शक्ति का एक साधन होती है.
यूरोपीय संघ के अधिकारी बार बार, 2025 में अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत के जजों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों का उदाहरण देते हैं. फ्रांसीसी जज निकोला गीयू के मुताबिक उन प्रतिबंधों की वजह से उनकी वीजा कार्ड तक पहुंच खत्म हो गई थी.
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के मुताबिक, यूरो क्षेत्र में कार्ड से होने वाले करीब दो तिहाई भुगतान गैर यूरोपीय कंपनियों के सहारे होते हैं. इनमें अधिकतर वीजा और मास्टरकार्ड हैं.
इसके अलावा, यूरोजोन के 21 में से 13 देशों के पास रोजमर्रा के भुगतान के लिए अपनी कोई राष्ट्रीय कार्ड प्रणाली नहीं है. दुकानों या ऑनलाइन खरीदारी के लिए वह विदेशी भुगतान प्रणालियों पर निर्भर हैं.
कौन कर रहा है डिजिटल यूरो का विरोध और क्यों
यूरोपीय संघ के देशों के ज्यादातर बैंक, लागत का लेकर इस योजना से घबरा रहे हैं. यूरोपीय बैंकिंग फेडरेशन की अप्रैल में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकिंग प्रणाली को डिजिटल यूरो के हिसाब से ढालने में करीब 18 अरब यूरो यानी लगभग 20 अरब डॉलर का खर्च आएगा.
वहीं, यूरोपीय सेंट्रल बैंक का कहना है कि यह लागत काफी कम होगी. ईसीबी मुताबिक, बैंकिंग क्षेत्र को चार से 5.8 अरब यूरो के बीच निवेश करना होगा.
बैंकों को अपनी वित्तीय पूंजी पर असर पड़ने का भी डर है. फेडरेशन का कहना है कि अगर ग्राहक अपने पैसे को डिजिटल यूरो में बदल लेते हैं, तो बैंकों में जमा राशि तेजी से घट सकती है. ईसीबी ने इस जोखिम से इनकार किया है.
बैंकों को यह आशंका भी है कि इससे उनकी अपनी ऑनलाइन सेवाओं की मांग घट सकती है. मसलन, डिजिटल यूरो, पूरे यूरोप की भुगतान प्रणाली वेरो का एक प्रतिस्पर्धी बन सकता है.
डिजिटल यूरो लॉन्च करने के लिए ईसीबी ने फिलहाल एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया है. सब कुछ टाइमटेबल के हिसाब से हुआ तो पायलट प्रोजेक्ट 2027 के मध्य से, यानी साल भर बाद शुरू किया जाएगा. इसे देरी करार दे रहे आलोचकों से ईसीबी अधिकारी जियोवानिनी ने कहा, "बैंक और व्यवसायियों को इसे बड़े स्तर और सुचारू रूप से लागू करने के लिए तैयारी का समय चाहिए."
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 23, 2026 03:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

