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जर्मनी में स्वास्थ्य बीमा में सुधार की कोशिश आगे बढ़ी

जर्मनी में स्वास्थ्य बीमा के बढ़ते खर्च से कामकाजी लोग और कंपनियां दोनों परेशान हैं.

जर्मनी में स्वास्थ्य बीमा में सुधार की कोशिश आगे बढ़ी
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जर्मनी में स्वास्थ्य बीमा के बढ़ते खर्च से कामकाजी लोग और कंपनियां दोनों परेशान हैं. लंबे समय के बाद लाया गया स्वास्थ्य बीमा में सुधार का बिल क्या इस परेशानी से राहत देगा?जर्मनी में स्वास्थ्य बीमा के खर्चों को नियंत्रित करने की उद्देश्य से लाए गए बिल को संसद के निचले सदन बुंडेसटाग ने पास कर दिया है. दवा कंपनियां इस बिल का विरोध कर रही हैं उनका कहना है कि इससे उनका मुनाफा घटेगा और निवेश के लिए उनके पास पैसा नहीं रहेगा.

सरकार इस बिल के माध्यम से 2027 से स्वास्थ्य सेवा पर होने वाले खर्च को घटाना चाहती है. खर्च में कटौती के कई उपाय किए गए हैं जो डॉक्टरों की प्रैक्टिस, अस्पतालों, दवा की दुकानों और दवा उद्योगों पर असर डालेगी.

बिल के प्रस्तावों में दवा पर्चे के जरिए मिलने वाली दवा के लिए ज्यादा पैसा संयुक्त भुगतान के जरिए देना और शादीशुदा कर्मचारी के पार्टनर को मिलने वाली मुफ्त सरकारी स्वास्थ्य बीमा पर लगाम कसने की तैयारी है.

शुक्रवार को बुंडेसटाग में पारित होने का बाद यह बिल अब संसद के ऊपरी सदन बुंडेसराट में भेजा जाएगा जो जर्मनी के 16 राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है. अगर यह बिल बुंडेसराट में पास नहीं हो सका तो फिर इसे मध्यस्थता कमेटी के पास भेजा जाएगा. इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने समाचार रॉयटर्स को खबर दी है कि बिल के बुंडेसराट में भी पास हो जाने की उम्मीद है. हालांकि विपक्षी दल इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है, "इन कदमों से स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम में कोई स्थिरता नहीं आएगी बल्कि अस्पताल दिवालिया हो जाएंगे और जनरल प्रैक्टिशनर डॉक्टरों पर बोझ बढ़ेगा"

जर्मनी में स्वास्थ्य बीमा का खर्च

जर्मनी में रहने वाले हर आदमी के पास स्वास्थ्य बीमा का होना जरूरी है. आमतौर पर इसका आधा खर्च कर्मचारी खुद और आधा कंपनियां उठाती हैं. बीते सालों में इसका बोझ लगातार बढ़ता गया है. चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने अपने चुनावी अभियान में अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए इसमें सुधार करने की बात कही थी. उनका कहना है कि वह कारोबारियों पर वित्तीय और प्रशासनिक बोझ घटा अर्थव्यवस्था में सुधार करना चाहते हैं.

जर्मनी की स्वास्थ्य मंत्री नीना वार्केन का कहना है, "कई सालों से स्वास्थ्य बीमा के बढ़ते योगदान के बाद हमने आखिरकार सरकारी स्वास्थ्य बीमा (तंत्र) के स्थिर वित्तीय स्थिति की नींव तैयार कर ली है." खर्च बढ़ने के साथ बीमा का प्रीमियम भी बढ़ता गया. इसके नतीजे में एक तरह कंपनियों का कर्मचारियों पर खर्च बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ कर्मचारियों के हाथ में आने वाला पैसा घटता जा रहा है. ऐसे में स्वास्थ्य बीमा एक प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा बन गया है.

वार्केन का कहना है, "संक्षेप में हम पूरे सिस्टम में कटौती नहीं कर रहे हैं बल्कि भविष्य की वृद्धि को अर्थव्यवस्था के विकास के हिसाब से सीमित कर रहे हैं. यह बीमा कराने वाले व्यक्ति के योगदान से मिले पैसे को संभालने का जिम्मेदार तरीका है"

हेल्थकेयर में सुधार सरकार के व्यापक आर्थिक सुधार पैकेज का हिस्सा है. लंबे समय के इंतजार के बाद पिछले हफ्ते इस आर्थिक सुधार पैकेज की घोषणा की गई.

दवा कंपनियां सुधारों के विरोध में

यह बिल स्वास्थ्य तंत्र में बढ़ती कमी को घटाने के उद्देश्य से लाया गया है. इसके जरिए दवा कंपनियों के लिए आवश्यक छूटों को ऊंचा किया जा रहा है साथ ही अस्पतालों के खर्च बढ़ने पर नियंत्रण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए होने वाले भुगतान में बदलाव होगा.

दवा कंपनियां खास तौर से पेटेंट वाली वैक्सीन पर 15.5 प्रतिशत के मैन्यूफैक्चरर डिस्काउंट और इन वैक्सीनों की कीमत 2027-30 तक नहीं बढ़ाने का विरोध कर रही हैं. दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका की जर्मनी के लिए प्रेसीडेंट अलैक्जैंड्रा बिशप का कहना है कि सरकार का यह कदम नई खोजों के लिए सजा बन जाएगा और निवेश को जोखिम में डाल देगा. बिशप का कहना है, "यह भविष्य के लिए संकेत नहीं है. हमें ऐसी नीति की जरूरत है जो स्वास्थ्य और आर्थिक मजबूती को समान भाव से देखे और खोजों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त के रूप में मान्यता दे ना कि कटौती लक्ष्य बनाए.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 10, 2026 08:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).