Fact Check: क्या राहुल गांधी ने पुणे के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में टेलीप्रॉम्प्टर का इस्तेमाल किया? जानें सच्चाई
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर 'Boiled Anda' नाम के एक यूजर समेत कई अन्य खातों द्वारा राहुल गांधी की मंच पर खड़ी तस्वीरों को साझा किया गया. इसमें मंच के सामने लगी स्क्रीनों को टेलीप्रॉम्प्टर बताते हुए तंज कसा गया था.
Fact Check: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पुणे दौरे के दौरान उनके संबोधन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि 22 अगस्त को आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में राहुल गांधी ने भाषण देने के लिए टेलीप्रॉम्प्टर (Teleprompter) का सहारा लिया. हालांकि, फैक्ट चेक में यह दावा पूरी तरह से गलत और भ्रामक साबित हुआ है.
वायरल दावे का सच
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर 'Boiled Anda' नाम के एक यूजर समेत कई अन्य खातों द्वारा राहुल गांधी की मंच पर खड़ी तस्वीरों को साझा किया गया. इसमें मंच के सामने लगी स्क्रीनों को टेलीप्रॉम्प्टर बताते हुए तंज कसा गया था.
जानें खबर की सच्चाई
फैक्ट चेक जांच में पाया गया कि वायरल फोटो और वीडियो में दिख रही स्क्रीन टेलीप्रॉम्प्टर नहीं, बल्कि 'प्रोडक्शन मॉनिटर' (Production Monitor) और 'कॉन्फिडेंस मॉनिटर' (Confidence Monitor) हैं.
प्रोडक्शन मॉनिटर और टेलीप्रॉम्प्टर में अंतर
प्रसारण और इवेंट विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े सम्मेलनों और आयोजनों में मंच पर दो अलग-अलग प्रकार की स्क्रीन इस्तेमाल होती हैं:
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टेलीप्रॉम्प्टर: इसका उपयोग वक्ता (Speaker) द्वारा लिखित भाषण पढ़ने के लिए किया जाता है, जिसमें स्क्रीन पर टेक्स्ट ऊपर की ओर स्क्रॉल होता है.
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प्रोडक्शन / कॉन्फिडेंस मॉनिटर: इसका उपयोग इवेंट आयोजकों और तकनीकी टीम के लिए होता है. इसमें लाइव कैमरा फीड, समय (टाइमर), स्टेज दिशा-निर्देश और स्टेज पर प्रस्तुत हो रही विजुअल सामग्री दिखाई देती है.
पुणे के कार्यक्रम में लगी स्क्रीन पर केवल लाइव वीडियो फीड और तकनीकी निर्देश दिखाई दे रहे थे, न कि राहुल गांधी के पढ़ने के लिए कोई लिखित स्क्रिप्ट.
'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का संदर्भ
राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' संवाद कार्यक्रम 22 अगस्त 2026 को पुणे के एसएसपीएमएस कॉलेज मैदान में आयोजित हुआ था. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों, विशेष रूप से छात्राओं से शिक्षा, सुरक्षा, प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं और रोजगार के मुद्दों पर सीधा संवाद करना था. इस आयोजन के लिए पुणे पुलिस ने 30 शर्तों के साथ अनुमति जारी की थी.
निष्कर्षतः, राहुल गांधी द्वारा भाषण के लिए टेलीप्रॉम्प्टर का उपयोग करने का दावा गलत है. मंच पर मौजूद स्क्रीनें इवेंट मैनेजमेंट और लाइव कवरेज के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रॉडक्शन मॉनिटर थे.