Sawan Special Story: सावन में खुलते हैं भोलेनाथ के इन 5 रहस्यमयी मंदिरों के राज, किसी में हवा में झूलता है शिवलिंग तो कहीं खुद बदल जाता है जल का रंग

सावन के दौरान इन मंदिरों में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं. इनसे जुड़ी पौराणिक कथाएं, ऐतिहासिक महत्व और अनोखी परंपराएं हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. हालांकि, इन मंदिरों से जुड़ी कई मान्यताएं धार्मिक विश्वास और स्थानीय परंपराओं पर आधारित हैं.

सावन 2026 (Photo Credits: File Image)

Sawan Special Story: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है. इस दौरान देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. लेकिन भारत में कुछ ऐसे शिव मंदिर भी हैं, जिनसे जुड़े रहस्य आज तक वैज्ञानिकों के लिए भी चर्चा का विषय बने हुए हैं. कहीं शिवलिंग हवा में लटका हुआ नजर आता है, कहीं मंदिर में जल का रंग बदलने की मान्यता है, तो कहीं हजारों साल पुराना शिवलिंग लगातार बढ़ने का दावा किया जाता है. आइए जानते हैं भगवान शिव के ऐसे ही पांच रहस्यमयी मंदिरों के बारे में. Sawan Special: भोलेनाथ के इन मंदिरों की अनोखी परंपरा का राज क्या है? सिगरेट और शराब से जुड़ी है कहानी

1. अचलेश्वर महादेव मंदिर, राजस्थान – जहां शिवलिंग नहीं, अंगूठे की होती है पूजा

राजस्थान के धौलपुर नहीं बल्कि सिरोही जिले के अचलगढ़ में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है. यहां शिवलिंग की जगह भगवान शिव के दाहिने पैर के अंगूठे की पूजा की जाती है. स्थानीय मान्यता है कि यही अंगूठा पूरे अरावली पर्वत को संतुलित रखे हुए है.

2. भोजेश्वर महादेव मंदिर, मध्य प्रदेश – जहां है दुनिया का सबसे विशाल शिवलिंग

भोपाल से करीब 30 किलोमीटर दूर भोजपुर में स्थित भोजेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग भारत के सबसे विशाल एकाश्म (एक ही पत्थर से बने) शिवलिंगों में गिना जाता है. इसकी ऊंचाई करीब 18 फीट और परिधि लगभग 21 फीट बताई जाती है. यह मंदिर अधूरा होने के बावजूद लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है.

3. लिंगराज मंदिर, ओडिशा – जहां हर दिन बदल जाता है पूजा का स्वरूप

भुवनेश्वर का प्रसिद्ध लिंगराज मंदिर भगवान शिव और भगवान विष्णु की संयुक्त आराधना का प्रतीक माना जाता है. यहां की पूजा-पद्धति और दैनिक अनुष्ठान सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार होते हैं. सावन के दौरान यहां विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं, जिनमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.

4. बैद्यनाथ धाम, झारखंड – जहां रावण ने किया था शिवलिंग की स्थापना

झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम को 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, रावण भगवान शिव को लंका ले जाना चाहता था, लेकिन मार्ग में शिवलिंग यहीं स्थापित हो गया. सावन में यहां लगने वाली कांवड़ यात्रा देश की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल है.

5. गुप्तेश्वर महादेव गुफा, छत्तीसगढ़ – जहां प्राकृतिक गुफा में विराजमान हैं भोलेनाथ

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में स्थित गुप्तेश्वर महादेव मंदिर एक प्राकृतिक गुफा के भीतर है. यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को संकरे रास्तों और गुफाओं से होकर गुजरना पड़ता है. सावन के महीने में यह स्थान शिवभक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है.

सावन में क्यों बढ़ जाती है इन मंदिरों की महिमा?

सावन के दौरान इन मंदिरों में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं. इनसे जुड़ी पौराणिक कथाएं, ऐतिहासिक महत्व और अनोखी परंपराएं हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. हालांकि, इन मंदिरों से जुड़ी कई मान्यताएं धार्मिक विश्वास और स्थानीय परंपराओं पर आधारित हैं.

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