First Sawan Somvar 2026: 3 अगस्त को रखा जाएगा सावन का पहला सोमवार; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत के नियम
उत्तर भारत में पवित्र सावन (श्रावण) महीने की शुरुआत 30 जुलाई से हो चुकी है, जो 28 अगस्त 2026 तक रहेगा. सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव के भक्त व्रत रखते हैं और सुख-समृद्धि व आरोग्य की कामना के लिए जलाभिषेक करते हैं.
First Sawan Somvar 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, भगवान शिव (Bhagwan Shiv) को समर्पित पवित्र सावन (श्रावण) मास 2026 (Sawan Maas) की शुरुआत 30 जुलाई (गुरुवार) से हो चुकी है और इसका समापन 28 अगस्त (शुक्रवार) को सावन पूर्णिमा के दिन होगा. उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली आदि) के श्रद्धालुओं के लिए सावन का पहला सोमवार (First Sawan Somvar) 3 अगस्त 2026 को पड़ेगा.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार का व्रत रखने और विधि-विधान से शिव पूजा करने से साधकों को आरोग्य, सुख-समृद्धि, मनोवांछित वर और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है. यह भी पढ़ें: Shravan 2026 Dates Difference: महाराष्ट्र और उत्तर भारत में अलग-अलग तिथियों पर क्यों शुरू होता है सावन? जानें कारण और 2026 का कैलेंडर
सावन सोमवार का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब सृष्टि को बचाने के लिए हलाहल विष निकला था, तब भगवान शिव ने उसका पान कर उसे अपने कण्ठ में धारण किया था, जिससे वे 'नीलकंठ' कहलाए. विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवी-देवताओं ने उन पर शीतल जल अर्पित किया था.
इसी कारण सावन के महीने में शिवजी को जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने का विशेष महत्व है. इस महीने में कई श्रद्धालु 'सोलह सोमवार व्रत' की शुरुआत भी पहले सावन सोमवार से ही करते हैं.
पूजा का समय और शुभ मुहूर्त
3 अगस्त 2026 को पहले सावन सोमवार के अवसर पर सुबह सूर्योदय के बाद से ही मंदिर में जलाभिषेक और पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है.
- प्रातः काल पूजा समय: सुबह स्नानादि के बाद सूर्योदय से दोपहर तक पूजा और जलाभिषेक का उत्तम समय रहेगा.
- प्रदोष काल मुहूर्त: यदि प्रातः काल पूजा संभव न हो, तो सूर्यास्त के आसपास (प्रदोष काल में) शिव पूजा और आरती की जा सकती है.
स्थानीय पंचांग के अनुसार शहरों में अमृत और शुभ चौघड़िया के समय जलाभिषेक करना फलदायी माना जाता है.
व्रत के नियम और पूजा सामग्री
सावन सोमवार का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को कुछ मुख्य नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है:
व्रत के प्रमुख नियम:
- सात्विक जीवन: व्रत के दौरान तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) से पूरी तरह परहेज करें.
- आहार: फलाहार में दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सेंधा नमक और मेवे शामिल कर सकते हैं. कई श्रद्धालु निर्जला व्रत भी रखते हैं.
- पारणा: संध्या आरती और चंद्रमा/शिव पूजन के बाद सात्विक भोजन के साथ व्रत खोला जाता है.
पूजन सामग्री और अर्पण:
- जल एवं गंगाजल: शिवलिंग पर तांबे के लोटे से शुद्ध जल और गंगाजल चढ़ाएं.
- पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण से शिवलिंग का अभिषेक करें.
- बेलपत्र और धतूरा: कटा-फटा न हो ऐसा तीन पत्तियों वाला स्वच्छ बेलपत्र, धतूरा, भांग और कनेर के सफेद फूल अर्पित करें.
- मंत्र जप: पूजा के दौरान "ॐ नमः शिवाय" और "महामृत्युंजय मंत्र" का निरंतर जाप करें.
- आरती एवं भोग: देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और मौसमी फलों तथा मिठाइयों का भोग लगाकर प्रसाद बांटें.