दिल्ली की दमघोंटू हवा से बचाएगी आर्टिफिशियल बारिश? जानें क्लाउड सीडिंग ट्रायल का क्या हुआ
दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. सर्दी के साथ घना स्मॉग राजधानी को अपनी चपेट में ले चुका है. सोमवार सुबह दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 452 दर्ज किया गया, जो ‘सीवियर प्लस’ श्रेणी में आता है.
दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. सर्दी के साथ घना स्मॉग राजधानी को अपनी चपेट में ले चुका है. सोमवार सुबह दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 452 दर्ज किया गया, जो ‘सीवियर प्लस’ श्रेणी में आता है. आनंद विहार, आरके पुरम, द्वारका और वजीरपुर जैसे इलाकों में AQI 450 से 500 के बीच रहा. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के डेटा के अनुसार मंगलवार को भी देश की राजधानी दिल्ली में हवा की खतरनाक स्थिति बनी रही, सुबह करीब 8 बजे शहर का ओवरऑल एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 378 था, जो इसे 'बहुत खराब' कैटेगरी में माना जाता है.
हालात ऐसे हैं कि लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और सड़कों पर कम दृश्यता का सामना करना पड़ रहा है. उड़ानें और ट्रेनें प्रभावित हो रही हैं, वहीं अस्पतालों में सांस की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है.
क्या फिर होगी आर्टिफिशियल बारिश?
प्रदूषण से बेहाल दिल्लीवासियों के मन में एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार आर्टिफिशियल बारिश (Artificial Rain) यानी क्लाउड सीडिंग का सहारा लेगी. इससे पहले भी इस सर्दी में दिल्ली सरकार ने कृत्रिम बारिश का प्रयोग किया था, लेकिन वह खास असर नहीं दिखा सका. मौजूदा हालात में फिलहाल इस तकनीक को दोबारा अपनाने की संभावना कम मानी जा रही है.
क्लाउड सीडिंग प्रयोग क्यों रहा असफल?
अक्टूबर के अंत में दिल्ली सरकार ने IIT कानपुर के सहयोग से क्लाउड सीडिंग के दो ट्रायल किए थे. इसके लिए एक छोटे विमान से सिल्वर आयोडाइड फ्लेयर्स छोड़े गए, जिस पर करीब एक करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुआ. हालांकि इन प्रयासों से बारिश नहीं हो सकी. सरकार की रिपोर्ट में बताया गया कि उस समय वातावरण में नमी केवल 10 से 15 प्रतिशत थी, जबकि क्लाउड सीडिंग के लिए कहीं अधिक नमी की आवश्यकता होती है. कुछ इलाकों में प्रदूषण कणों में हल्की गिरावट जरूर दर्ज की गई, लेकिन इसका असर बहुत सीमित रहा.
वैज्ञानिकों की चेतावनी
वैज्ञानिकों का भी मानना है कि दिल्ली की सर्दियों में क्लाउड सीडिंग कारगर नहीं हो सकती. IIT दिल्ली की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्दियों के मौसम में दिल्ली के वातावरण में पर्याप्त नमी नहीं होती, जिससे कृत्रिम बारिश कराना मुश्किल है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अगर बारिश हो भी जाए, तो उसका असर सिर्फ एक से तीन दिन तक ही रहेगा, जिसके बाद प्रदूषण फिर से बढ़ सकता है. विशेषज्ञों ने इसे एक महंगा और अस्थायी उपाय बताया है, जो वाहनों के धुएं, निर्माण कार्य, उद्योगों और पराली जलाने जैसी असली समस्याओं का समाधान नहीं करता.
राजनीतिक विवाद भी छिड़ा
क्लाउड सीडिंग को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी भी खूब हुई. आम आदमी पार्टी ने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया कि बिना ठोस नतीजों के जनता के पैसे खर्च किए गए. वहीं, पिछली सरकारें भी इस विकल्प पर विचार कर चुकी थीं, लेकिन मौसम और अनुमति संबंधी कारणों का हवाला देकर पीछे हट गई थीं.
प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार के मौजूदा कदम
दिल्ली सरकार फिलहाल आपात कदमों पर ध्यान दे रही है. निर्माण कार्य पर रोक, डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध, सड़कों पर पानी का छिड़काव और स्कूलों व दफ्तरों में ऑनलाइन काम की अनुमति जैसे फैसले लागू किए गए हैं. हालांकि पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये उपाय केवल अस्थायी राहत देते हैं. अगर प्रदूषण से स्थायी तौर पर निजात पानी है, तो उत्सर्जन को कम करने और दीर्घकालिक नीतियों पर गंभीरता से काम करना ही एकमात्र रास्ता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Dec 16, 2025 05:12 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

