टैक्सियों को लेकर क्यों लड़ते रहते हैं भारत के दो राज्य, असम और मेघालय

असम और उसके पड़ोसी मेघालय के बीच पांच दशक से भी ज्यादा पुराना सीमा विवाद रह रह कर भड़कता रहा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

असम और उसके पड़ोसी मेघालय के बीच पांच दशक से भी ज्यादा पुराना सीमा विवाद रह रह कर भड़कता रहा है. बीते सप्ताह भी असम से पर्यटकों को ले जाने वाले करीब तीन दर्जन वाहनों में तोड़-फोड़ की गई. अब भी हालात तनावपूर्ण हैं.मेघालय में बीते सप्ताह असम रजिस्ट्रेशन वाले पर्यटक वाहनों पर हमले और तोड़ फोड़ के बाद राज्य में पर्यटकों की तादाद तेजी से गिरी है. होटल उद्योग से जुड़े लोगों का दावा है कि 80 फीसदी से ज्यादा होटलों और होमस्टे की बुकिंग रद्द हो गई है.

दोनों राज्यों की सरकारों ने अब इस विवाद को सुलझाने की पहल की है. हिंसा के आरोप में खासी छात्र संघ (केएसयू) के चार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है. मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने बताया, "मैंने असम के मुख्यमंत्री से इस हिंसा पर बात की है. हम हालात सामान्य बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं."

इस बीच, मेघालय हाईकोर्ट ने इस हिंसा का संज्ञान लेते हुए सरकार से स्टेटस रिपोर्ट और केस डायरी मांगी है. इस मामले की अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी.

क्या है असम और मेघालय के बीच विवाद मामला?

केएसयू ने बीते सप्ताह राजधानी शिलांग में एक रैली निकाली थी. उसी दौरान कुछ नकाबपोश लोगों ने अचानक असम के नंबर प्लेट वाले पर्यटक वाहनों पर हमला शुरू कर दिया था. इससे पर्यटकों में आतंक फैल गया. बाद में सुरक्षा बलों के पहरे में उनको किसी तरह सुरक्षित सीमा पार कर असम पहुंचाया गया.

यह हिंसा धीरे धीरे राज्य के कई हिस्सों में फैल गई थी. उस दौरान सरकारी वाहनों पर भी हमले किए गए. मेघालय पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू को बताते हैं, "असम पंजीकरण वाले कुल 31 वाहनों में तोड़-फोड़ की गई. इसके अलावा शहर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमाओं के साथ भी तोड़-फोड़ हुई."

इस घटना के बाद जवाबी कार्रवाई के तौर पर असम के ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों ने मेघालय से लगी सीमा पर वाहनों की आवाजाही रोक दी और मेघालय के वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी. इससे दोनों ओर हजारों पर्यटक फंस गए.

दोनों तरफ से सुलह की पहल

इस विवाद के बाद दोनों राज्यों की सरकारें सामान्य स्थिति बहाल करने का प्रयास कर रही हैं. इसकी जिम्मेदारी मेघालय के उप-मुख्यमंत्री एस धर और असम के कैबिनेट मंत्री अतुल बोरा को सौंपी गई है. बोरा ने मंगलवार को 14 विभिन्न ट्रांसपोर्ट यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में हरसंभव सुरक्षा मुहैया कराने का भरोसा दिया है.

बोरा ने पत्रकारों को बताया, "बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई. लेकिन दोनों राज्यों के बीच यातायात सामान्य होने में अभी दो-एक दिन का समय लगेगा."

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वाहनों की आवाजाही के मुद्दे पर अक्सर होने वाले विवाद के स्थायी समाधान के लिए मेघालय सरकार ने 10 सितंबर से पहले असम सरकार के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित करने का फैसला किया है. मेघालय के गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू को बताया, "प्रस्तावित बैठक का मकसद एक ऐसा सिस्टम बनाना है जो दोनों राज्यों की ट्रांसपोर्टर यूनियनों को मंजूर हो."

असम के ट्रांसपोर्ट आपरेटरों और टैक्सी चालक यूनियन ने मेघालय सरकार से क्षतिग्रस्त वाहनों और घायलों को मुआवजा देने की मांग उठाई है. ग्रेटर गुवाहाटी टूरिस्ट टैक्सी एसोसिएशन के सदस्य सुजीत दत्ता डीडब्ल्यू को बताते हैं, "हमने मेघालय सरकार से लिखित भरोसा देने को कहा है कि भविष्य में असम में पंजीकृत वाहनों पर हमले नहीं होंगे और उनको पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी."

यूनियनों का कहना है कि मांगे पूरी नहीं होने तक मेघालय में पंजीकृत वाहनों को असम की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा.

यहां इस बात का जिक्र प्रासंगिक है कि असम ही मेघालय का प्रवेश द्वार है. वहां तक जाने के लिए असम से होकर ही गुजरना पड़ता है.

पर्यटकों में आतंक

बीते सप्ताह मेघालय की हिंसा में फंसने वाले लोगों में कोलकाता के रंजीत मंडल भी शामिल थे. वो डीडब्ल्यू को बताते हैं, "हम गुवाहाटी से जब शिलांग पहुंचे तो वहां खासी छात्रों की रैली चल रही थी. उसी दौरान अचनाक हमले शुरू हो गए. हमारी कार का शीशा तोड़ दिया गया."

उनका कहना था कि रैली के कारण फंसे दर्जनों वाहनों पर हमले होने लगे. हमारे साथ बच्चे और महिलाएं थीं. हमें लगा कि आज जान बचाना मुश्किल है. लेकिन कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे सुरक्षा बल के जवानों ने हमें बचा कर सुरक्षित असम की ओर भेजा.

कोलकाता के ही बेहला इलाके की रहने तनुश्री बनिक भी अपने परिवार के साथ मेघालय घूमने गई थीं. वो डीडब्ल्यू को बताती है, "अचानक होने वाले हमलों से हमलोग काफी आतंकित हो गए थे. लेकिन आगे-पीछे वाहनों की कतार होने के वापसी का भी रास्ता नहीं था. घंटे भर तक फंसे रहने के बाद किसी तरह देर रात गुवाहाटी लौटने में कामयाबी मिली. हमारे करीब एक लाख रुपये बर्बाद हो गए. हमने एक सप्ताह के लिए होटल बुक किए थे."हाल की हिंसा की जांच के लिए मेघालय सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है. मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने पत्रकारों से कहा, "हम ऐसी हिंसा बर्दाश्त नहीं करेंगे. इस मामले में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा."

पर्यटन उद्योग प्रभावित

मेघालय के पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में पर्यटन उद्योग का सालाना कारोबार 1600 करोड़ रुपये है. इसे राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ माना जाता है. पर्यटन विभाग ने पर्यटकों के लिए हेल्पलाइन जारी की है और उनको सुरक्षा मुहैया कराने का भरोसा दिया है. लेकिन इस उद्योग से जुड़े लोगों का दावा है कि बीते सप्ताह की हिंसा के बाद होटलों और होमस्टे की 80 फीसदी बुकिंग रद्द हो गई है.

दरअसल, पर्यटकों को लेकर असम से मेघालय जाने वाले वाहनों के मुद्दे पर टकराव कोई नया नहीं है. इससे पहले भी ऐसी घटनाएं होती रही हैं. जुलाई, 2024 में स्थानीय संगठन हनीट्रैप यूथ फेडरेशन ने ईस्ट खासी हिल्स में असम के नंबर प्लेट वाली टैक्सियों की आवाजाही रोक दी थी. उसके बाद आल खासी मेघालय टूरिस्ट टैक्सी एसोसिएशन ने दावा किया था कि असम की टैक्सियों के कारण राज्य के टैक्सी चालकों को भारी नुकसान हो रहा है. उसके बाद अगस्त, 2025 में भी ऐसी घटनाएं दोहराई गईं. अब ताजा घटना भी उसी की कड़ी है.

देश के बाकी हिस्सों से असम पहुंचने वाले पर्यटक मेघालय घूमने के लिए राजधानी गुवाहाटी से ही कार किराये पर लेते रहे हैं. लेकिन मेघालय के टैक्सी चालकों की दलील है कि इससे उनको भारी नुकसान होता है. यही नाराजगी रह रह कर भड़क उठती है.

ऑल शिलांग टूरिस्ट टैक्सी एसोसिएशन के अध्यक्ष एंथोलियस बी मराक डीडब्ल्यू से कहते हैं, "मेघालय आने वाले पर्यटकों से होटल, होमस्टे और रेस्तरां मालिकों को भले फायदा होता हो, हमारे लिए यह घाटे का सौदा है. ज्यादातर पर्यटन असम से ही टैक्सी लेकर आते हैं. ऐसे में हमें कोई रोजगार नहीं मिलता."

उनका कहना था कि दोनों राज्यों को मिल कर इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में पहल करनी चाहिए. ऐसा नहीं होने तक अक्सर विवाद और हिंसा का आशंका बनी रहेगी. उनके मुताबिक, असम की टैक्सी पर्यटक को शिलांग तक छोड़ सकती है. उसके बाद उनको राज्य के दूसरे हिस्सों में घूमाने का काम स्थानीय टैक्सी चालक कर सकते हैं.

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