Who Is Anshika Singh? गोरखपुर हनीट्रैप कांड में 150 से ज्यादा लोग फंसे, पुलिसकर्मी भी बने शिकार; आरोपी अंशिका पर गैंगस्टर एक्ट लागू, जानें कौन है यह शातिर महिला
Anshika Singh

Who Is Anshika Singh?  उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए एक संगठित हनीट्रैप और रंगदारी रैकेट चलाने के आरोप में अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा नाम की महिला को गिरफ्तार किया है. पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी महिला ने अब तक लगभग 150 से अधिक लोगों को अपने जाल में फंसाकर लाखों रुपये की उगाही की है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी पर सख्त गैंगस्टर एक्ट (Gangsters Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया है, जिससे उसे जमानत मिलना अब काफी मुश्किल हो गया है.

कौन है अंशिका सिंह?

आरोपी अंशिका सिंह मूल रूप से गोरखपुर जिले के हरपुर बुढ़ट की रहने वाली है. वह गोरखपुर शहर में एक किराए के मकान में रह रही थी. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अंशिका सिंह का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है, जिसमें हत्या के प्रयास, रंगदारी और वाहन चोरी जैसे कई गंभीर मामले शामिल हैं. वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर काफी सक्रिय थी, जहां उसने 700 से अधिक रील्स अपलोड की थीं और उसके हजारों फॉलोअर्स थे.

क्या था ब्लैकमेलिंग का तौर-तरीका (Modus Operandi)?

पुलिस की विस्तृत तफ्तीश में अंशिका सिंह के शिकार बनाने के तरीके का खुलासा हुआ है. वह संभावित पीड़ितों को निशाना बनाने के लिए फेसबुक मैसेंजर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करती थी.

  • सोशल मीडिया पर संपर्क: सबसे पहले फेसबुक मैसेंजर के माध्यम से लोगों से बातचीत शुरू करना.

  • व्हाट्सएप पर शिफ्ट होना: थोड़ी जान-पहचान बढ़ने के बाद पीड़ितों के मोबाइल नंबर लेकर बातचीत को व्हाट्सएप पर ले जाना.

  • वीडियो कॉल रिकॉर्डिंग: पीड़ितों को अश्लील (Explicit) वीडियो कॉल के लिए राजी करना और कॉल के दौरान चुपके से स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर लेना.

  • फर्जी केस की धमकी: रिकॉर्ड किए गए वीडियो के आधार पर पीड़ितों को सार्वजनिक रूप से बदनाम करने या उन पर बलात्कार का झूठा मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देना.

इस डर से कई पीड़ितों ने अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने के लिए अंशिका को मोटी रकम का भुगतान किया.

पुलिस अधिकारी और रसूखदार लोग भी बने शिकार

जांच अधिकारियों के मुताबिक, अंशिका के जाल में फंसने वाले लोग अलग-अलग पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं. इस रैकेट में अयोध्या में तैनात एक क्षेत्राधिकारी (Circle Officer) और लगभग 15 अन्य पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. इसके अलावा, गोरखपुर के एक निजी अस्पताल के प्रबंधक को भी निशाना बनाया गया था.

मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित ने अंशिका द्वारा मांगी गई 50,000 रुपये की रंगदारी देने से इनकार कर दिया. इसके बाद अंशिका ने उसे झूठे बलात्कार के मामले में फंसाने और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी. यह विवाद बाद में इतना बढ़ गया कि गोलीबारी की नौबत आ गई.

जन्मदिन पर हुई फायरिंग के बाद हुई गिरफ्तारी

यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब 20 जनवरी को अंशिका के जन्मदिन के दौरान रंगदारी के पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद हो गया. इस बहस के दौरान अंशिका ने कथित तौर पर सरेबाजार गोलीबारी कर दी, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया.

घटना के तुरंत बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अंशिका सिंह को मौके से एक पिस्तौल के साथ गिरफ्तार कर लिया. इस मामले में उसका एक सहयोगी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. पुलिस वर्तमान में जब्त किए गए मोबाइल फोन, सोशल मीडिया गतिविधियों और बैंक खातों के वित्तीय लेनदेन की गहनता से जांच कर रही है.