8th Pay Commission: कब आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट? जानें महत्वपूर्ण तारीखें, नए नियम और सैलरी-पेंशन से जुड़ी उम्मीदें
8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) की रिपोर्ट और सिफारिशों को लेकर देश के करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों में उत्सुकता बनी हुई है. आयोग वर्तमान में विभिन्न राज्यों में हितधारकों के साथ बैठकें कर डेटा जुटा रहा है. जानें कब तक आ सकती है फाइनल रिपोर्ट.
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों (Central Government Employees And pensioners) के वेतन, भत्ते तथा सेवानिवृत्ति लाभों की समीक्षा के लिए गठित '8वां केंद्रीय वेतन आयोग' (8th Pay Commission) इस समय अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में है. आयोग विभिन्न कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगी संघों और राज्य सरकारों के साथ गहन विचार-विमर्श (Consultation Phase) कर रहा है. सरकारी नियमों के अनुसार, आयोग को अपने औपचारिक गठन से लेकर अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए कुल 18 महीने का समय दिया गया है. इस समय-सीमा के आधार पर, आयोग के मई 2027 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है, हालांकि कुछ अहम मुद्दों पर अंतरिम रिपोर्ट (Interim Report) पहले भी आ सकती है. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission Calculator: 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा अपडेट, वरिष्ठ कर्मचारियों को मिल सकता है 93 लाख रुपये तक का एरियर, जानें फिटमेंट फैक्टर और नया गणित
कब हुआ था आयोग का गठन?
भारत सरकार ने एक राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification) के माध्यम से 3 नवंबर 2025 को 8वें वेतन आयोग का आधिकारिक गठन किया था. सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को इसका अध्यक्ष बनाया गया है. उनके अलावा आईआईएम बेंगलुरु के प्रोफेसर पुलक घोष इसके अंशकालिक सदस्य और 1990 बैच के आईएएस अधिकारी पंकज जैन इसके सदस्य-सचिव (Member-Secretary) हैं.
बजट सत्र 2026 के दौरान संसद में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने भी लिखित जवाब में पुष्टि की थी कि आयोग अपना काम तय समय-सीमा के भीतर पूरा कर सरकार को सिफारिशें सौंप देगा.
रिपोर्ट सौंपने और लागू होने की समय-सीमा
नवंबर 2025 में हुए गठन के बाद 18 महीने की अवधि मई 2027 में समाप्त हो रही है. हालांकि, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नए वेतनमान का संदर्भ बिंदु (Reference Point) 1 जनवरी 2026 माना गया है, क्योंकि 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है.
आधिकारिक सूत्रों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि 1 जनवरी 2026 केवल एक संदर्भ तिथि है, न कि स्वचालित रूप से वेतन बढ़ने की तारीख. वेतन और पेंशन में वास्तविक संशोधन तभी प्रभावी होगा जब आयोग अपनी रिपोर्ट सौंपेगा और केंद्रीय कैबिनेट उसे मंजूरी देकर अधिसूचित (Notify) करेगी. चूंकि संशोधन पूर्वव्यापी (Retrospectively) प्रभाव से लागू होने की उम्मीद है, इसलिए कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का एरियर (Arrears) लगातार जमा हो रहा है.
देश भर में जारी हैं क्षेत्रीय बैठकें
आयोग ने अपनी प्राथमिक डेटा संग्रह प्रक्रिया पूरी कर ली है. मायगोव (MyGov) पोर्टल के माध्यम से आम जनता और कर्मचारियों से 18 बिंदुओं की एक प्रश्नावली पर ऑनलाइन फीडबैक मांगा गया था, जिसकी अंतिम तिथि 15 जून 2026 को समाप्त हो चुकी है.
अब आयोग देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर क्षेत्रीय बैठकें कर रहा है. इसी कड़ी में 22 और 23 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में राज्य स्तरीय हितधारकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है. इसके बाद जुलाई के पहले और दूसरे हफ्ते में क्रमशः भुवनेश्वर (ओडिशा) और कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में भी ऐसी ही बैठकें प्रस्तावित हैं. इससे पहले जून की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कर्मचारी संगठनों के साथ भी चर्चा की जा चुकी है.
क्या हैं कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की प्रमुख मांगें?
विभिन्न कर्मचारी संघों और नेशनल काउंसिल (NC-JCM) ने आयोग के समक्ष कई बड़े प्रस्ताव रखे हैं, जिन पर वर्तमान में विचार किया जा रहा है:
- न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर: डाक कर्मचारी महासंघ और अन्य यूनियनों ने न्यूनतम मूल वेतन (Minimum Basic Pay) को वर्तमान ₹18,000 से बढ़ाकर ₹54,000 करने की मांग की है. इसके लिए उन्होंने 00 से लेकर 3.83 तक के फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की सिफारिश की है.
- सालाना इंक्रीमेंट और लीव एनकैशमेंट: कर्मचारियों ने मौजूदा 3 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment) को बढ़ाकर 5 से 7 प्रतिशत करने और सेवानिवृत्ति पर मिलने वाले लीव एनकैशमेंट को 300 दिनों से बढ़ाकर 400 दिन करने की मांग की है.
- पेंशन सुधार और ओपीएस: पेंशनभोगी संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की वकालत की है. साथ ही प्रस्ताव दिया है कि न्यूनतम पेंशन आखिरी सैलरी के 67 प्रतिशत के बराबर होनी चाहिए और ग्रेच्युटी की सीमा को भी बढ़ाया जाना चाहिए.
भ्रामक खबरों से बचने की सलाह
श्रम और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर फिटमेंट फैक्टर या नए पे-मैट्रिक्स को लेकर चल रही सभी खबरें फिलहाल केवल अनुमानों पर आधारित हैं. जब तक आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर सरकार को नहीं सौंपता, तब तक कोई भी आंकड़ा आधिकारिक नहीं माना जाएगा.
इस बीच, सरकार ने वेतन आयोग की प्रक्रिया से अलग, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 1 जनवरी 2026 से महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है, जिससे अब डीए की दर मूल वेतन का 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई है.