गया: भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार, 11 जुलाई 2026 को बिहार के गयाजी स्थित बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (BIPARD) में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्घाटन किया. उन्होंने 18वीं बिहार विधानसभा के नवनिर्वाचित और पुराने सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय अभिविन्यास-सह-प्रशिक्षण (Orientation-cum-Training) कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक बड़ा बयान दिया। उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि 'विकसित बिहार' के बिना 'विकसित भारत' की परिकल्पना किसी भी स्थिति में संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन देश के संविधान के प्रति प्रतिबद्धता और जन कल्याण की भावना हमेशा सर्वोपरि रहनी चाहिए. यह भी पढ़ें: Bihar Fisheries Scheme: बिहार सरकार का व्यवसायियों को बड़ा तोहफा, मछली पालन पर मिलेगी 60% सब्सिडी, 31 अगस्त तक करें आवेदन
'सदन में विचार भिन्न हो सकते हैं, पर संविधान हमारा साझा मार्गदर्शक हो'
बिहार विधानसभा के सदस्यों को विधायी प्रक्रियाओं का पाठ पढ़ाते हुए उपराष्ट्रपति ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि विधानसभा के पटल पर अलग-अलग दलों के नेताओं के विचारों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन हमारा संविधान ही सबका साझा मार्गदर्शक (कॉमन कम्पास) होना चाहिए.
सदन की गरिमा और उत्पादकता को लेकर उन्होंने विधायकों से कहा:
"स्वस्थ बहस और चर्चाएं लोकतंत्र को मजबूत बनाती हैं, जबकि रचनात्मक सहयोग राष्ट्र को प्रगति के पथ पर आगे ले जाता है. चुनाव केवल वोटों के गणित से जीते जाते हैं, लेकिन जनता का असली सम्मान सत्ता से नहीं बल्कि निस्वार्थ सेवा से अर्जित होता है."
प्रश्नकाल और शून्यकाल के महत्व को रेखांकित किया
उपराष्ट्रपति ने विधायी कामकाज को सुचारू और प्रभावी ढंग से चलाने के लिए संसदीय उपकरणों के सही उपयोग की सलाह दी. उन्होंने सदन में 'प्रश्नकाल' (Question Hour), 'शून्यकाल' (Zero Hour) और 'कार्य मंत्रणा समिति' (Business Advisory Committee) की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया.
उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि वे इन विधायी उपकरणों का उपयोग दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने क्षेत्र की जनता की मूलभूत समस्याओं को उठाने के लिए करें. उपराष्ट्रपति ने लोकसभा सचिवालय के संसदीय लोकतंत्र अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (PRIDE) और बिहार विधानसभा के इस संयुक्त प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विधायकों को उनके संवैधानिक दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए सक्षम बनाते हैं.
बिहार को बताया भारतीय लोकतंत्र का 'मार्गदर्शक'
गया में इस भव्य कार्यक्रम के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष को धन्यवाद देते हुए उपराष्ट्रपति ने मजाकिया लहजे में टिप्पणी की कि इस पहल ने प्रतीकात्मक रूप से "पटना को ही गयाजी में लाकर खड़ा कर दिया है." उन्होंने ऐतिहासिक वैशाली गणराज्य की प्राचीन लोकतांत्रिक परंपराओं का स्मरण करते हुए कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें सदियों पुरानी हैं, इसीलिए इसे सही मायने में 'लोकतंत्र की जननी' (Mother of Democracy) कहा जाता है.
उन्होंने बिहार को भारत की पूरी लोकतांत्रिक यात्रा का 'मार्गदर्शक' घोषित किया. भगवान बुद्ध की ज्ञान भूमि से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविक ज्ञान इसी बात को समझने में है कि जनप्रतिनिधियों को जनता पर शासन करने के लिए नहीं, बल्कि उनकी सेवा के लिए चुना जाता है.
रोजगार और विकास का केंद्र बने बिहार
उपराष्ट्रपति ने विधायकों से सामूहिक रूप से एक ऐसा विजन तैयार करने की अपील की जिससे बिहार आने वाले समय में आर्थिक अवसरों, रोजगार और विकास का एक प्रमुख गंतव्य (डेस्टिनेशन) बन सके. उन्होंने कहा कि बिहार की नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो न केवल स्थानीय युवाओं को यहीं रोजगार दें, बल्कि दूसरे राज्यों के प्रवासी श्रमिकों को भी अपनी ओर आकर्षित करें.
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस उद्घाटन सत्र के दौरान बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, और बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह सहित कई अन्य वरिष्ठ राजनेता और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.













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