Rent a Garba Partner Row: नवरात्रि से पहले 'किराए पर गरबा पार्टनर' के विज्ञापनों पर बवाल; BJP विधायक संजय उपाध्याय ने मुंबई पुलिस से की जांच की मांग

नवरात्रि 2026 के पावन पर्व से ठीक पहले सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे 'रेंट अ गरबा पार्टनर' के विज्ञापनों को लेकर मुंबई में नया विवाद खड़ा हो गया है. भारतीय जनता पार्टी के विधायक संजय उपाध्याय ने मुंबई पुलिस कमिश्नर और उपनगरीय थानों में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए इन विज्ञापनों के पीछे सक्रिय लोगों के खिलाफ त्वरित जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ₹1,000 से लेकर ₹5,000 तक के 'सिल्वर', 'गोल्ड' और 'प्लैटिनम' पैकेज की पेशकश की जा रही है.

मुंबई: शक्ति की उपासना के महापर्व नवरात्रि से पहले मायानगरी मुंबई में 'किराए पर गरबा पार्टनर' उपलब्ध कराने वाले विज्ञापनों ने बड़ा तूल पकड़ लिया है. रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर सशुल्क गरबा पार्टनर (Paid Companionship) के विज्ञापन तेजी से प्रसारित होने के बाद भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने मंगलवार को मुंबई पुलिस से संपर्क कर इस पूरे रैकेट की जांच की मांग की है.

विधायक ने मुंबई पुलिस आयुक्त, बोरीवली और दहिसर जोन के पुलिस उपायुक्तों (DCPs) तथा कांदिवली, चारकोप, कस्तूरबा मार्ग और बोरीवली सहित कई उपनगरीय थानों के वरिष्ठ निरीक्षकों को लिखित शिकायत सौंपी है. उन्होंने आशंका जताई है कि त्योहार के नाम पर महिलाओं का शोषण, साइबर धोखाधड़ी या अनैतिक गतिविधियों का जाल फैलाया जा सकता है. यह भी पढ़ें: ‘Rent a Garba Partner’ Controversy: नवरात्रि से पहले गुजरात में 'किराए पर गरबा पार्टनर' के विज्ञापन वायरल; साइबर सेल ने जारी किया फ्रॉड अलर्ट, बजरंग दल ने की जांच की मांग

₹1,000 से ₹5,000 तक के पैकेज: 'सिल्वर', 'गोल्ड' और 'प्लैटिनम' स्लैब

रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स और डिस्कशन फोरम्स पर प्रसारित पोस्टरों में गरबा कार्यक्रमों के लिए साथी उपलब्ध कराने के नाम पर बाकायदा अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं:

MLA संजय उपाध्याय ने ‘रेंट अ गरबा पार्टनर’ विज्ञापनों की मुंबई पुलिस से जांच की मांग की

"नवरात्रि साधना का पर्व, इसे बाजारीकरण से दूषित न करें": संजय उपाध्याय

संजय उपाध्याय ने नवरात्रि के आध्यात्मिक स्वरूप का हवाला देते हुए इस तरह के विज्ञापनों का पुरजोर विरोध किया है:

साइबर फ्रॉड और महिला सुरक्षा पर चिंता 

रिपोर्ट के अनुसार, इस विवाद के बाद साइबर अपराध प्रकोष्ठ ने भी सतर्कता बढ़ा दी है:

मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि विधायक की ओर से मिली शिकायत और डिजिटल लिंक्स का प्रारंभिक सत्यापन किया जा रहा है. पुलिस साइबर सेल यह पता लगा रही है कि क्या ये पोस्ट केवल इंटरनेट पर प्रैंक (मजाक) के तौर पर डाले गए हैं या इसके पीछे कोई संगठित वित्तीय व अनैतिक गिरोह सक्रिय है.

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