UPI Charges Bill: लोकसभा में बिल पास, भविष्य में UPI और अन्य डिजिटल पेमेंट पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ
साल 2020 से UPI के अधिकांश लेनदेन उपभोक्ताओं और व्यापारियों के लिए निशुल्क हैं. इस दौरान डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत का एक हिस्सा सरकार वहन करती रही है. बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं का कहना है कि MDR नहीं होने के कारण तेजी से बढ़ते UPI लेनदेन के बीच परिचालन लागत (Operational Cost) निकालना मुश्किल हो रहा है.
UPI Charges Bill: लोकसभा ने गुरुवार को Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को पारित कर दिया. इस बिल के जरिए केंद्र सरकार को भविष्य में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और अन्य अधिसूचित डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क (Charges) लगाने की अनुमति देने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा. हालांकि, इस बिल के पास होने का मतलब यह नहीं है कि UPI लेनदेन पर तुरंत शुल्क लग जाएगा. UPI Charges Myth vs Reality: क्या ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर लगेगा शुल्क? PSS एक्ट संशोधन का सच जानें
Payment and Settlement Systems Act में संशोधन
यह विधेयक Payment and Settlement Systems (PSS) Act, 2007 में संशोधन करता है. इसके तहत उस कानूनी प्रावधान को हटाया गया है, जो सरकार को Merchant Discount Rate (MDR) या इसी तरह के अन्य शुल्क डिजिटल भुगतान माध्यमों पर लागू करने से रोकता था.
अब केंद्र सरकार भविष्य में अलग से अधिसूचना (Notification) जारी कर UPI या अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लागू करने का फैसला कर सकती है.
क्या अभी UPI पर चार्ज लगेगा?
फिलहाल UPI उपयोगकर्ताओं को किसी भी तरह का नया शुल्क नहीं देना होगा. सरकार ने अभी यह घोषणा नहीं की है कि UPI पर शुल्क कब लागू होगा या होगा भी या नहीं. साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि यदि शुल्क लागू किया जाता है, तो वह किन प्रकार के लेनदेन पर लागू होगा.
किन लेनदेन पर लग सकता है शुल्क?
उद्योग जगत में चल रही चर्चाओं के अनुसार, संभावित Merchant Discount Rate (MDR) मुख्य रूप से उच्च मूल्य (High-Value) वाले व्यापारी (Merchant) लेनदेन पर लागू किया जा सकता है. वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति (Person-to-Person या P2P) होने वाले UPI ट्रांसफर को प्रस्तावित ढांचे से बाहर रखा जा सकता है. हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.
सरकार यह बदलाव क्यों ला रही है?
साल 2020 से UPI के अधिकांश लेनदेन उपभोक्ताओं और व्यापारियों के लिए निशुल्क हैं. इस दौरान डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत का एक हिस्सा सरकार वहन करती रही है. बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं का कहना है कि MDR नहीं होने के कारण तेजी से बढ़ते UPI लेनदेन के बीच परिचालन लागत (Operational Cost) निकालना मुश्किल हो रहा है. इसी वजह से सरकार ने भविष्य में जरूरत पड़ने पर नया राजस्व मॉडल लागू करने के लिए यह कानूनी प्रावधान तैयार किया है.
बिल में और क्या-क्या प्रावधान हैं?
UPI और डिजिटल भुगतान से जुड़े प्रावधानों के अलावा इस विधेयक में कई कर (Tax) संबंधी संशोधन भी शामिल हैं. इनका उद्देश्य.
विदेशी निवेश को बढ़ावा देना
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (Manufacturing) को प्रोत्साहन देना
डेटा सेंटर विकास को बढ़ावा देना
निवेशकों को अधिक कर संबंधी स्पष्टता (Tax Certainty) उपलब्ध कराना
सरकार का कहना है कि ये बदलाव भारत में निवेश का माहौल बेहतर बनाने और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति देने के लिए किए गए हैं.
आगे क्या होगा?
लोकसभा से पारित होने के बाद इस विधेयक को अब राज्यसभा की मंजूरी भी लेनी होगी.
कानून बनने के बाद भी UPI या अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क तभी लागू होगा, जब केंद्र सरकार अलग से अधिसूचना जारी करेगी. उसी में यह तय होगा कि.
किन लेनदेन पर शुल्क लगेगा,
शुल्क की दर क्या होगी,
और उसका भुगतान कौन करेगा.