UP Police K-9 Mary: संभल में मासूम से दरिंदगी का अंधा केस सुलझाने वाली पुलिस डॉग 'मैरी' को 10,000 रुपए का ईनाम, सूंघकर दबोचा आरोपी
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक 6 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुए यौन उत्पीड़न के अंधे कत्ल जैसे पेचीदा मामले को पुलिस के खोजी कुत्ते (Sniffer Dog) 'मैरी' ने सुलझा लिया है. कोई चश्मदीद या सीसीटीवी फुटेज न होने के बावजूद मैरी ने घटनास्थल से मिले दुपट्टे की गंध के सहारे आरोपी को उसके घर से ढूंढ निकाला.
संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले से अपराध अनुसंधान (Crime Investigation) का एक बेहद अनूठा और सफल मामला सामने आया है. यहां के बबराला इलाके में एक छह वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले में जब पुलिस की पारंपरिक जांच बिना किसी सबूत के बंद होने की कगार पर पहुंच गई, तब जिला पुलिस की के-9 (K-9) डॉग स्क्वाड की एक जांबाज सदस्य ने इस अंधे केस को सुलझाने में कामयाबी हासिल की। 'मैरी' नाम की सात वर्षीय लैब्राडोर रिट्रीवर (Labrador Retriever) नस्ल की स्निफर डॉग ने मंगलवार, 23 जून 2026 को न केवल आरोपी के घर का पता लगाया, बल्कि थाने में हुई शिनाख्त परेड के दौरान उसकी सटीक पहचान भी की.
सीसीटीवी और चश्मदीदों के अभाव में फंसा था मामला
यह दर्दनाक घटना 19 जून को संभल के बबराला क्षेत्र में हुई थी, जहां छह साल की एक बच्ची को उसकी मां ने बेहद गंभीर और बदहवास स्थिति में पाया था. उम्र बेहद कम होने और गहरे मानसिक सदमे (Trauma) के कारण बच्ची अपने साथ हुई दरिंदगी को खुलकर बताने या हमलावर की पहचान करने में पूरी तरह असमर्थ थी.
स्थानीय पुलिस टीम ने तुरंत मामला दर्ज कर आसपास के इलाकों में गहन तलाशी अभियान शुरू किया, लेकिन उन्हें बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ा. घटनास्थल या उसके आसपास कोई भी चालू सीसीटीवी (CCTV) कैमरा मौजूद नहीं था. पुलिस द्वारा घर-घर जाकर की गई पूछताछ में भी कोई चश्मदीद गवाह या सुराग हाथ नहीं लगा. हालांकि, फॉरेंसिक टीम ने मौके से कुछ नमूने और पीड़ित से संबंधित वस्तुएं एकत्र की थीं, लेकिन आरोपी का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था.
300 मीटर तक गंध का पीछा करते हुए आरोपी के दरवाजे पर पहुंची 'मैरी'
मामले की जांच अटकती देख संभल पुलिस के आला अधिकारियों ने जिले के विशेष के-9 डॉग स्क्वाड की मदद लेने का फैसला किया. इसके बाद खोजी कुत्ते 'मैरी' और उसके हैंडलर्स को घटनास्थल पर लाया गया. मैरी को सुराग के तौर पर वारदात वाली जगह से बरामद एक दुपट्टा (Scarf) सूंघाया गया.
दुपट्टे की गंध को भांपते हुए मैरी ने तुरंत एक ट्रैक पकड़ा और पुलिस टीम को आवासीय इलाके की बेहद संकरी और घुमावदार गलियों में ले जाने लगी. लगभग 300 मीटर की दूरी तय करने के बाद मैरी एक मकान के बाहर जाकर रुक गई. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "मैरी की गंध को ट्रैक करने की असाधारण क्षमता इस मामले में गेम-चेंजर साबित हुई. उसने बिना भटके हमें सीधे आरोपी के घर तक पहुंचा दिया."
शिनाख्त परेड में आरोपी को चुना, एसपी ने दिया 10,000 रुपये का ईनाम
मैरी के इशारे के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध को हिरासत में ले लिया. तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को और मजबूत करने के लिए पुलिस ने थाने में एक औपचारिक 'सेंट आइडेंटिफिकेशन परेड' (Scent Identification Parade) का आयोजन किया. इसके तहत कई व्यक्तियों की लाइन में आरोपी को भी खड़ा किया गया. मैरी ने एक बार फिर अपनी सूँघने की क्षमता का प्रदर्शन करते हुए उस भीड़ में से वास्तविक आरोपी को चुन लिया और उसके पास जाकर बैठ गई.
के-9 द्वारा की गई अकाट्य पहचान और पुलिस की सख्त पूछताछ के बाद आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया, जिसके बाद उसे 'पॉक्सो एक्ट' (POCSO Act) के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. विपरीत परिस्थितियों में मैरी के इस शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए संभल के पुलिस अधीक्षक (SP) के.के. बिश्नोई ने मैरी के लिए 10,000 रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की है. वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यह मामला साबित करता है कि आधुनिक तकनीक (जैसे सर्विलांस फुटेज) की अनुपस्थिति में भी अच्छी तरह से प्रशिक्षित के-9 इकाइयां आज भी पुलिस अनुसंधान की रीढ़ हैं.