Surgical Strike 10th Anniversary: सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल, भारतीय सेना के साहस को देश ने किया सलाम
सितंबर 2016 में जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में भारतीय सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर हुए भीषण आतंकवादी हमले के जवाब में यह दंडात्मक सैन्य कार्रवाई की गई थी. उरी हमले में भारत के 19 सैनिक शहीद हुए थे, जिसके बाद पूरे देश में भारी जनआक्रोश था.
Surgical Strike 10th Anniversary: भारतीय सेना द्वारा नियंत्रण रेखा (LoC) के पार जाकर आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ की गई ऐतिहासिक 'सर्जिकल स्ट्राइक' की आज 10वीं वर्षगांठ है. 28-29 सितंबर 2016 की रात भारतीय सेना के पैरा स्पेशल फोर्सेज (Para SF) के जवानों ने LoC पार कर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकवादी लॉन्च पैड्स को निशाना बनाया था.
इस मौके पर देशभर में सर्जिकल स्ट्राइक को याद किया जा रहा है. इससे एक दिन पहले, 27 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 138वें एपिसोड में सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र किया. उन्होंने 28-29 सितंबर 2016 की कार्रवाई को याद करते हुए भारतीय सेना के जवानों की बहादुरी और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख किया.
सर्जिकल स्ट्राइक का पृष्ठभूमि और कारण
सितंबर 2016 में जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में भारतीय सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर हुए भीषण आतंकवादी हमले के जवाब में यह दंडात्मक सैन्य कार्रवाई की गई थी. उरी हमले में भारत के 19 सैनिक शहीद हुए थे, जिसके बाद पूरे देश में भारी जनआक्रोश था.
हमले के 11 दिनों के भीतर भारतीय सेना ने सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और संभावित आतंकवादी हमलों को नाकाम करने के उद्देश्य से एक रणनीतिक और सटीक सैन्य अभियान की योजना बनाई.
कैसे अंजाम दिया गया था गुप्त ऑपरेशन?
28 और 29 सितंबर 2016 की मध्यरात्रि को भारतीय सेना के विशेष कमांडोज ने एलओसी पार कर पीओके में 1 से 3 किलोमीटर तक अंदर प्रवेश किया.
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सटीक निशाना: स्पेशल फोर्सेज ने आतंकवादियों के कम से कम 7 लॉन्च पैड्स को निशाना बनाया, जिन्हें नियंत्रण रेखा के पास भारतीय सीमा में घुसपैठ के लिए तैयार किया गया था.
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भारी नुकसान: इस अचानक और त्वरित हमले में दर्जनों आतंकवादियों और उनके मददगारों को मार गिराया गया.
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सुरक्षित वापसी: अपनी कार्रवाई को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद भारतीय सेना के सभी जांबाज जवान बिना किसी बड़े नुकसान के अपनी सीमा में सुरक्षित लौट आए.
भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में ऐतिहासिक मोड़
सर्जिकल स्ट्राइक ने भारत की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत की. इसने दुनिया के सामने भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को मजबूती से रेखांकित किया कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए सीमा पार जाकर भी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा.
इस सैन्य अभियान के 10 साल पूरे होने पर रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सर्जिकल स्ट्राइक ने भारतीय सशस्त्र बलों के रक्षात्मक रुख को आक्रामक और निर्णायक प्रतिक्रियात्मक नीति में बदल दिया, जिसे बाद में 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक में भी देखा गया.