SIR Political Row: चुनाव आयोग में असहमति के दावों से गरमाई राजनीति, विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की

एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य दो चुनाव आयुक्तों के बीच विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर गंभीर असहमति है.

Gyanesh kumar

SIR Political Row:  भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के भीतर निर्णयों को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति की खबरें सामने आने के बाद देश में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है. एक प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्र की खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूचियों के प्रबंधन को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और अन्य दो चुनाव आयुक्तों के बीच गंभीर मतभेद हैं.

इन दावों के सामने आते ही कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), आम आदमी पार्टी (AAP) और वामपंथी दलों समेत पूरे विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे या पद से हटाए जाने की मांग की है.  यह भी पढ़े:   Election Commission Dispute: SIR प्रक्रिया पर चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेद की रिपोर्ट पर बवाल; राहुल गांधी ने लगाया 'वोट चोरी' का आरोप, आयोग ने कहा—फैसले सर्वसम्मत

क्या है विवाद और असहमति का मुख्य कारण?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित रूप से आपत्ति दर्ज कराई थी. उनका आरोप था कि आयोग की ओर से लिए जा रहे कई महत्वपूर्ण फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए जा रहे हैं.

विवाद के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

विपक्ष का हमला: "लोकतंत्र पर बड़ा हमला"

रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे हमले किए हैं:

चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण

दूसरी ओर, चुनाव आयोग के आधिकारिक सूत्रों ने इन दावों को खारिज करते हुए स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास किया है. आयोग का कहना है कि:

  1. चुनाव आयोग में लिखित आपत्तियां, सुझाव और अलग-अलग राय रखना आंतरिक निर्णय प्रक्रिया का एक सामान्य और स्वाभाविक हिस्सा है.

  2. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) समेत चुनाव आयोग के सभी आधिकारिक निर्णय सर्वसम्मति और तीनों आयुक्तों की मंजूरी के बाद ही लागू किए गए हैं.

वर्तमान में यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट और संसद के आगामी सत्रों के संदर्भ में राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र बन गया है.

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