Jamui Viral Video Controversy: जमुई पीड़िता की तस्वीर शेयर करने पर घिरे सम्राट चौधरी; RJD ने लगाया POCSO एक्ट के उल्लंघन का आरोप

बिहार के जमुई जिले में 10वीं की नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ और बदसलूकी के मामले में अब पीड़िता की पहचान उजागर करने को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है. गुरुवार, 24 सितंबर को पटना में पीड़िता और उसके परिजनों से मुलाकात के बाद सम्राट चौधरी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स (पूर्व में ट्विटर) से एक तस्वीर साझा की गई, जिसमें कथित तौर पर नाबालिग पीड़िता का चेहरा स्पष्ट दिखाई दे रहा था.

Bihar CM Samrat Choudhary (Photo Credits: Facebook)

पटना: जमुई छेड़छाड़ कांड को लेकर बिहार की सियासत में टकराव और गहरा गया है. गुरुवार को राजधानी पटना में नाबालिग पीड़िता और उसके परिजनों ने सरकार के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की थी, जहां उन्हें स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को कठोरतम सजा दिलाने का आश्वासन दिया गया था.

लेकिन इस मुलाकात के तुरंत बाद सम्राट चौधरी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी एक तस्वीर ने बड़ा कानूनी और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया. विपक्ष का आरोप है कि इस पोस्ट के जरिए नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर की गई, जो कानूनन अपराध है. यह भी पढ़ें: Jamui Horror Reel Controversy: 'अगर रील नहीं बनाता तो क्या पकड़ा जाता?'; जमुई छेड़छाड़ कांड और एनकाउंटर पर सम्राट चौधरी का बयान हुआ वायरल

सोशल मीडिया पर पोस्ट और कुछ ही देर में हटाने की कार्रवाई

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुलाकात के बाद आधिकारिक एक्स हैंडल से एक तस्वीर साझा की गई थी, जिसमें सम्राट चौधरी पीड़िता और उसके परिजनों के साथ नजर आ रहे थे:

तेजस्वी यादव ने बिहार के सीएम सम्राट चौधरी पर हमला बोला

तेजस्वी यादव का तीखा हमला: 'POCSO एक्ट की उड़ीं धज्जियां'

The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर सरकार पर तीखा प्रहार किया:

सांसद मीसा भारती ने की एफआईआर दर्ज करने की मांग

पाटलिपुत्र से राजद सांसद मीसा भारती ने भी इस घटनाक्रम को लेकर बिहार पुलिस से सीधी कार्रवाई की मांग की है:

क्या कहता है POCSO और भारतीय कानून?

भारतीय कानून में नाबालिग पीड़िताओं की पहचान की सुरक्षा को लेकर बेहद कड़े प्रावधान हैं:

फिलहाल इस विवाद पर सत्तापक्ष की ओर से कोई विस्तृत औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विपक्षी दलों के कड़े रुख से यह मामला प्रशासनिक और कानूनी हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है.

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