Ramadan 2026: तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में मुस्लिम कर्मचारियों को बड़ी राहत, ऑफिस से एक घंटा पहले जाने की अनुमति; स्कूलों का समय भी बदला

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सरकारों ने रमजान के पवित्र महीने के दौरान मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी से एक घंटा पहले घर जाने की अनुमति दे दी है. इसके साथ ही उर्दू माध्यम के स्कूलों के समय में भी बदलाव किया गया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

हैदराबाद: पवित्र महीने रमजान (Ramadan) के मद्देनजर तेलंगाना (Telangana) और आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) की सरकारों ने मुस्लिम समुदाय (Muslim Employees) के सरकारी कर्मचारियों के लिए विशेष रियायतों की घोषणा की है. दोनों राज्यों में मुस्लिम कर्मचारियों को कार्यालय समय से एक घंटा पहले घर जाने की अनुमति दी गई है ताकि वे इबादत और रोजा इफ्तार के समय पर अपने परिवार के साथ शामिल हो सकें. यह आदेश नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ अनुबंध (Contract) और आउटसोर्सिंग स्टाफ पर भी समान रूप से लागू होगा. यह भी पढ़ें: Ramadan Moon Sighting in Saudi Arabia: सऊदी अरब में नजर आया रमजान का चांद, 18 फरवरी को पहला रोजा

तेलंगाना: शाम 4 बजे छुट्टी, स्कूल समय में भी बदलाव

तेलंगाना के मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव द्वारा मंगलवार को जारी मेमो के अनुसार, राज्य के सभी सरकारी मुस्लिम कर्मचारियों, शिक्षकों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों को रमजान के दौरान शाम 4 बजे कार्यालय छोड़ने की अनुमति होगी।

आंध्र प्रदेश: स्वर्णग्राम सचिवालय तक लागू होंगे आदेश

आंध्र प्रदेश सरकार ने भी इसी तरह के आदेश जारी किए हैं। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री एन.एम.डी. फारूक के अनुसार, राज्य में यह छूट 18 फरवरी से 19 मार्च 2026 तक लागू रहेगी.

यह आदेश ग्राम और वार्ड सचिवालयों (स्वर्णग्राम और स्वर्णवार्ड सचिवालय) में कार्यरत कर्मियों सहित सभी विभागों पर लागू होगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल आपातकालीन सेवाओं (Exigencies of services) को छोड़कर, सभी पात्र कर्मचारियों को आधिकारिक समय से एक घंटा पहले जाने की अनुमति दी जाएगी.

सांख्यिकीय संदर्भ और प्रशासनिक निर्देश

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में मुस्लिम आबादी कुल जनसंख्या का क्रमशः लगभग 12.7% और 9.5% है. सरकारी सेवाओं में इस समुदाय का प्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण है, जिसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है.

सभी विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. यह रियायत हर साल की तरह इस बार भी धार्मिक प्रथाओं को सुगम बनाने के उद्देश्य से दी गई है.

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