Ram Temple Donation Scam Case: राम मंदिर दान घोटाला मामला, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट (Photo Credits: IANS)

Ram Temple Donation Scam Case:  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या के भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए दान में कथित घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की अवकाशकालीन पीठ ने याचिकाकर्ताओं को मामले को अदालत की रजिस्ट्री के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश दिया है. शीर्ष अदालत के इस रुख के बाद अब इस संवेदनशील मामले पर नियमित प्रक्रिया के तहत ही सुनवाई की जाएगी.

याचिकाकर्ताओं की दलील

यह याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा एक जनहित याचिका (PIL) के रूप में दायर की गई थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील एन. के. गोस्वामी ने अदालत से मामले की जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया था.  यह भी पढ़े:  Ram Mandir Donation Dispute: 'शिवसेना द्वारा दान की गई 4 किलो की चांदी की ईंट गायब'- संजय राउत का राम मंदिर ट्रस्ट पर बड़ा आरोप

उनका तर्क था कि इस मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है. इसलिए सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है. हालांकि, पीठ ने इस पर तुरंत आदेश पारित करने की तात्कालिकता को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि मामले की जांच नियत समय पर की जाएगी.

UP सरकार की SIT जांच पर उठाए सवाल

दायर याचिका में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार को प्रतिवादी बनाया गया है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर निर्माण के लिए दिए गए दान और चढ़ावे की राशि में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और वित्तीय गड़बड़ी हुई है.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) इस मामले की जांच तो कर रहा है, लेकिन उसने अब तक कोई नियमित आपराधिक मामला या प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की है. याचिका के अनुसार, बिना एफआईआर के की जा रही इस प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों की कानूनी प्रामाणिकता कमजोर हो सकती है. साथ ही, जटिल वित्तीय घोटालों की गहराई से जांच के लिए एसआईटी के पास आवश्यक फॉरेंसिक और आधुनिक जांच बुनियादी ढांचे की कमी है.

 याचिकाकर्ताओं की मांगें

राम मंदिर निर्माण के लिए चलाया गया दान संग्रह अभियान ऐतिहासिक था, जिसमें देश के कोने-कोने से लोगों ने स्वेच्छा से वित्तीय योगदान दिया था. ऐसे में दान के प्रबंधन में पारदर्शिता और वित्तीय अखंडता को लेकर उठे सवाल करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े हैं.

याचिका में मांग की गई है कि जनता के पैसे की सुरक्षा और दाताओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए एक बहु-विषयक विशेष जांच दल का गठन किया जाए, जिसका नेतृत्व सीबीआई करे. इसके अलावा, याचिका में केंद्र और राज्य सरकार को मंदिर ट्रस्ट के मामलों की निगरानी के लिए एक मजबूत नियामक, पर्यवेक्षी और ऑडिट तंत्र स्थापित करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब याचिकाकर्ताओं को सुनवाई की अगली तारीख के लिए नियमित अदालती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना होगा.