Rahul Gandhi Press Conference: चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेद की रिपोर्ट के बाद राहुल गांधी का बड़ा हमला; आज शाम 4 बजे करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस
चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा लिए गए नीतिगत फैसलों पर असहमति दर्ज कराए जाने की मीडिया रिपोर्ट के बाद राजनीतिक टकराव चरम पर पहुंच गया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज गुरुवार, 24 सितंबर को शाम 4 बजे नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण संवाददाता सम्मेलन (प्रेस कॉन्फ्रेंस) को संबोधित करेंगे.
नई दिल्ली: निर्वाचन आयोग (ECI) की निष्पक्षता और आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर उपजे विवाद के बीच राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. कांग्रेस पार्टी ने घोषणा की है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज गुरुवार शाम 4 बजे एआईसीसी (AICC) मुख्यालय में पत्रकारों को संबोधित करेंगे.
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर कड़ा रुख अपनाया था. यह भी पढ़ें: Election Commission Dispute: SIR प्रक्रिया पर चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेद की रिपोर्ट पर बवाल; राहुल गांधी ने लगाया 'वोट चोरी' का आरोप, आयोग ने कहा—फैसले सर्वसम्मत
'वोट चोरी' के आरोपों पर आक्रामक हुआ विपक्ष
विपक्षी दलों और विशेष रूप से कांग्रेस ने हालिया मीडिया खुलासे को केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है:
- राहुल गांधी का तीखा हमला: बुधवार को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा था कि 'वोट चोरी' देश की जनता के खिलाफ अपराध और संविधान पर सीधा हमला है. उन्होंने आरोप लगाया कि इसे अंजाम देने वाले संविधान विरोधी तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा.
- आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल: कांग्रेस का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाला आयोग स्वतंत्र संस्था के रूप में कार्य करने के बजाय सत्तापक्ष के हितों को साधने का जरिया बनता जा रहा है. शाम 4 बजे होने वाली प्रेस वार्ता में राहुल गांधी द्वारा इन आरोपों के समर्थन में आंतरिक दस्तावेज या विस्तृत ब्योरा पेश किए जाने की संभावना है.
‘संविधान के दुश्मनों का पर्दाफ़ाश’
क्या है चुनाव आयोग के भीतर विवाद का पूरा मामला?
हाल ही में सामने आई एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के शीर्ष तीन अधिकारियों के बीच नीतिगत निर्णयों को लेकर मतभेद रहे हैं:
- 10 महीने में 14 आपत्तियां: रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 अवसरों पर आयोग के कई महत्वपूर्ण फैसलों पर औपचारिक रूप से लिखित असहमति (Formal Objections) दर्ज कराई थी.
- विवाद के मुख्य मुद्दे: इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े फॉर्म 6 में किए गए बदलाव, मतदाता सूची डेटा का केंद्रीयकरण, स्थानीय मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ERO) के अधिकार सीमित करने और विभिन्न राज्यों में नाम जोड़ने व हटाने की प्रक्रिया शामिल थी.
- विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR): विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की आड़ में चुनिंदा मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जबकि दोनों आयुक्तों ने भी इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे.
चुनाव आयोग दे चुका है सफाई
विवाद बढ़ने के बाद बुधवार दोपहर निर्वाचन आयोग ने एक औपचारिक बयान जारी कर आंतरिक फूट के दावों को खारिज कर दिया था:
- आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्थान में अंतिम निर्णय लेने से पहले अलग-अलग दृष्टिकोण और लिखित आपत्तियां आना स्वाभाविक और स्वस्थ विमर्श का हिस्सा है.
- आयोग के अनुसार, पिछले एक साल में एसआईआर (SIR) और 40 से अधिक चुनावी सुधारों सहित सभी प्रमुख निर्णय पूर्ण आयोग (Full Commission) की सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं. किसी विशिष्ट आंतरिक नोट को अलग-थलग करके देखना पूरी प्रक्रिया का केवल एक पक्ष दिखाता है.
शाम की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी निगाहें
चुनाव आयोग की सफाई के बावजूद विपक्षी दलों का रुख नरम नहीं पड़ा है। कांग्रेस का कहना है कि आयोग ने केवल प्रक्रियात्मक औपचारिकता की बात कहकर असली सवालों से पल्ला झाड़ लिया है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज शाम 4 बजे राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से यह विवाद और गहरा सकता है, जिससे आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी शुचिता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और स्वायत्त संस्थाओं की भूमिका पर राष्ट्रीय बहस और तेज होगी.