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Pune Court Verdict: नसरापुर मासूम दुष्कर्म-हत्या मामले में भीमराव कांबले दोषी करार; 55 दिनों के भीतर आया कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

महाराष्ट्र के पुणे की एक विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत ने नसरापुर गांव में 3 साल की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में 65 वर्षीय भीमराव कांबले को दोषी ठहराया है. कोर्ट ने घटना के महज 55 दिनों के भीतर यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जबकि सजा की अवधि (पर निर्णय 29 जून को आएगा.

Pune Court Verdict: नसरापुर मासूम दुष्कर्म-हत्या मामले में भीमराव कांबले दोषी करार; 55 दिनों के भीतर आया कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pexels)

पुणे: महाराष्ट्र (Maharashtra) के पुणे जिले (Pune) की एक विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत (Fast Track Court) ने गुरुवार, 25 जून 2026 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 65 वर्षीय भीमराव कांबले को तीन साल की मासूम बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और बेरहमी से की गई हत्या के मामले में दोषी करार दिया है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. आर. साळुंखे ने आरोपी को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की गंभीर धाराओं सहित हत्या और अपहरण के सभी आरोपों में दोषी पाया. न्याय प्रणाली की मुस्तैदी दिखाते हुए अदालत ने 1 मई को हुई इस हृदयविदारक घटना के महज 55 दिनों के भीतर यह फैसला सुनाया है. अदालत ने दोषी की सजा की अवधि पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसकी आधिकारिक घोषणा 29 जून को की जाएगी. यह भी पढ़ें: Delhi Horror: दिल्ली में फुटपाथ पर सो रही 11 वर्षीय बच्ची का अपहरण, दुष्कर्म के बाद हत्या; ऐप-आधारित कैब ड्राइवर गिरफ्तार

वैज्ञानिक और फॉरेंसिक सबूतों ने ढहाया बचाव पक्ष का दावा

विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) अजय मिसार ने पुष्टि की कि अभियोजन पक्ष बुजुर्ग दिहाड़ी मजदूर भीमराव कांबले के खिलाफ सभी आरोपों को अदालत में पूरी तरह साबित करने में सफल रहा. मुकदमे के दौरान, कांबले ने खुद को बेकसूर बताते हुए एक मनगढ़ंत कहानी पेश की थी. उसने दावा किया था कि वह बच्ची को गाय का बछड़ा दिखाने ले गया था और अचानक पैर फिसलने के कारण बच्ची गिर गई, जिससे उसके सिर में घातक चोट आई.

हालांकि, फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने उसके इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया. अभियोजन पक्ष ने 55 गवाहों और 350 से अधिक दस्तावेजों के साथ एक अचूक केस पेश किया. अदालत ने हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, डीएनए (DNA) प्रोफाइलिंग, आरोपी के मेडिकल पोटेंसी टेस्ट और स्थानीय बच्चों द्वारा पुलिस परेड के दौरान की गई पहचान को पुख्ता तकनीकी सबूत माना.

'रेरेस्ट ऑफ रेयर' की श्रेणी में मृत्युदंड की मांग

अदालत में दोषी के लिए मृत्युदंड (Capital Punishment) की पुरजोर वकालत करते हुए अभियोजन पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के 12 ऐतिहासिक फैसलों का हवाला दिया. सरकारी वकील ने दलील दी कि यह अपराध 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) की श्रेणी में आता है.

राज्य के मुख्य चिकित्सा परीक्षक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने आरोपी की बर्बरता को उजागर किया. रिपोर्ट के अनुसार, मासूम के साथ लगभग 39 मिनट तक लगातार क्रूरता की गई, जिसके कारण उसके शरीर पर 18 गहरे जख्म और आंतरिक चोटें आईं.इसके बाद बच्ची का मुंह दबाकर (Gagging) उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई. फॉरेंसिक जांच में बच्ची के शरीर से बरामद हुए जैविक नमूनों का मिलान सीधे तौर पर दोषी के डीएनए से हुआ, जो इस मामले का सबसे अकाट्य सबूत बना.

आदतन अपराधी है दोषी; सजा पर फैसला 29 जून को

अदालत के समक्ष राज्य सरकार के वकीलों ने दलील दी कि कांबले समाज के लिए एक अत्यंत गंभीर और सुधर न सकने वाला खतरा है. अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, 65 वर्षीय भीमराव कांबले एक आदतन अपराधी (Habitual Offender) है. उसका पुराना आपराधिक इतिहास रहा है, जिसमें एक 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला और एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की का यौन उत्पीड़न करने समेत पशु क्रूरता के मामले दर्ज हैं.

दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकील ने दोषी की ढलती उम्र और उसके लगातार इनकार को आधार बनाकर सजा में नरमी बरतने की अपील की है. न्यायाधीश साळुंखे ने दोषी की जेल की प्रशासनिक फाइलों, उसके व्यवहार और पारिवारिक मूल्यांकन रिपोर्टों की समीक्षा के लिए समय देते हुए आजीवन कारावास या मृत्युदंड के बीच अंतिम फैसला सोमवार, 29 जून तक के लिए टाल दिया है.

क्या था नसरापुर का यह दर्दनाक मामला?

यह खौफनाक वारदात 1 मई 2026 को दोपहर 3:00 से 4:00 बजे के बीच हुई थी. तीन साल की यह मासूम बच्ची गर्मियों की छुट्टियां बिताने अपनी नानी के घर नसरापुर आई हुई थी. आरोपी भीमराव कांबले ने घर के बाहर खेल रही बच्ची को बिस्कुट और बछड़ा दिखाने का लालच देकर अगवा कर लिया.

वह उसे पास के एक सुनसान तबेले (गौशाला) में ले गया, जहां उसने इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया और पकड़े जाने के डर से बच्ची की हत्या कर दी. इस घटना के बाद पूरे महाराष्ट्र में भारी जनआक्रोश फैल गया था और तीव्र विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे तुरंत फास्ट-ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया था.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 25, 2026 05:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).