Uttarakhand Panchayat Election Results: उत्तराखंड के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 के नतीजों ने राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. जहां एक तरफ बीजेपीऔर कांग्रेस दोनों पार्टियां अपनी-अपनी जीत का जश्न मना रही हैं, वहीं निर्दलीयों का दमदार प्रदर्शन सियासी समीकरणों को पूरी तरह से बदलता नजर आ रहा है. इस बार मतदाताओं ने पारंपरिक राजनीतिक दलों के बजाय नए चेहरों और स्थानीय उम्मीदवारों पर ज्यादा भरोसा जताया है.
उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025 में दिखा कैसे पुराने चेहरों और स्थापित पार्टियों से इतर युवा, महिलाएं और जमीनी नेता अब नई राजनीतिक धारा की पहचान बनते जा रहे हैं. 21 साल की प्रधान प्रियंका नेगी जैसी कहानियां इस बदलाव की अगुआई कर रही हैं और यह संकेत दे रही हैं कि उत्तराखंड में लोकतंत्र अब नई दिशा में आगे बढ़ रहा है.
चमोली की 21 वर्षीय प्रियंका नेगी बनीं सबसे युवा ग्राम प्रधान
इस बार के चुनाव में सबसे बड़ी खबर चमोली जिले से आई, जहां 21 वर्षीय प्रियंका नेगी ने ग्राम प्रधान बनकर इतिहास रच दिया. आदर्श ग्राम सारकोट की रहने वाली प्रियंका ने पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया है. उनके पिता राजेंद्र नेगी दो बार इसी ग्राम सभा के प्रधान रह चुके हैं. प्रियंका की जीत केवल युवाओं के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए भी प्रेरणा है कि नेतृत्व का कोई तय उम्र नहीं होता.
मुनस्यारी को मिली युवा महिला प्रधान
मुनस्यारी के क्वीरीजिमियां गांव की ईशा ग्राम प्रधान का चुनाव जीत गई हैं. वह महज 22 वर्ष की उम्र में ग्राम प्रधान बनी हैं. उनके गांव से तीन उम्मीदवार मैदान में थे. ईशा की शैक्षिक योग्यता बीए व बीएड है.
देहरादून में बीजेपी को बढ़त लेकिन निर्दलीयों ने दिखाई ताकत
राजधानी देहरादून में 30 जिला पंचायत सीटों में बीजेपी को 13, कांग्रेस को 7 और निर्दलीयों को 10 सीटें मिली हैं. यानी यहां भी निर्दलीयों ने यह जता दिया कि वे किसी भी बड़े राजनीतिक दल की जीत या हार में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.
पौड़ी में कांटे की टक्कर, बड़े चेहरे हारे
पौड़ी जिले में 38 सीटों में से बीजेपी ने 18, कांग्रेस ने 16 और निर्दलीयों ने 4 सीटों पर कब्जा जमाया. हालांकि बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटें मिलीं, लेकिन कई बड़े नेताओं को हार का सामना करना पड़ा. लैंसडाउन से विधायक महंत दिलीप रावत की पत्नी नीतू रावत और खिर्सू सीट से पूर्व जिलाध्यक्ष संपत सिंह को हार झेलनी पड़ी.
चमोली में निर्दलीयों की सुनामी
चमोली जिले में 26 में से 17 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे. बीजेपी को केवल 4 और कांग्रेस को 5 सीटें मिलीं. यहां का जनादेश साफ इशारा करता है कि जनता अब परंपरागत पार्टियों के बजाय जमीनी स्तर पर काम करने वालों को प्राथमिकता दे रही है.
उत्तरकाशी में महिलाओं ने मारी बाजी
उत्तरकाशी जिले की 28 जिला पंचायत सीटों में बीजेपी को 7, जबकि कांग्रेस और निर्दलीयों को 21 सीटें मिलीं. खास बात यह रही कि इनमें से 15 सीटों पर महिला प्रत्याशी विजयी हुईं, जो इस बार के चुनाव में महिला सशक्तिकरण की सबसे बड़ी मिसाल बनी.
अल्मोड़ा और रुद्रप्रयाग में भी निर्दलीयों का जलवा
अल्मोड़ा में कांग्रेस ने 21, बीजेपी ने 19 और निर्दलीयों ने 5 सीटें जीतीं. वहीं रुद्रप्रयाग में कुल 18 सीटों में से बीजेपी और कांग्रेस को 5-5 और निर्दलीयों को 8 सीटें मिलीं. यह साफ दर्शाता है कि निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका निर्णायक बन चुकी है.
टिहरी, बागेश्वर और चंपावत में भी नया समीकरण
टिहरी में 45 वार्डों में से बीजेपी ने 13, कांग्रेस ने 12 और निर्दलीयों ने 20 सीटें जीतीं. बागेश्वर में बीजेपी को 9, कांग्रेस को 6 और निर्दलीयों को 4 सीटें मिलीं. चंपावत में बीजेपी समर्थित 9 प्रत्याशी जीते, जबकि निर्दलीयों ने 6 सीटों पर कब्जा जमाया.













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