राजनीति

पिछड़े देशों में पलायन से अमीर देशों को हुआ खूब फायदा

जिन अमीर देशों ने विदेशी कामगारों के लिए अपने दरवाजे खोले, उन्हें बीते 34 साल में इससे खूब फायदा मिला.

पिछड़े देशों में पलायन से अमीर देशों को हुआ खूब फायदा
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जिन अमीर देशों ने विदेशी कामगारों के लिए अपने दरवाजे खोले, उन्हें बीते 34 साल में इससे खूब फायदा मिला. आंकड़ों के साथ यह दावा कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने किया है.जिन अमीर देशों में बीते 35 साल में आप्रवासन की दर ज्यादा रही है, उनकी अर्थव्यवस्था को इससे बड़ा फायदा हुआ है. एक नए शोध के मुताबिक, ऐसे देश अब भी अधिक कामगारों को अपने ढांचे में पिरो सकते हैं. कैलिफोर्नियां यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर के इस शोध को अगले हफ्ते यूरोपीय सेंट्रल बैंक के एक अहम सम्मेलन में पेश किया जाएगा.

शोध के लेखक और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जियोवानी पेरी कहते हैं, "जिन देशों में आव्रजन दर ज्यादा रही, वहां लेबर प्रोडक्टिविटी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई. यह वृद्धि आव्रजन के दौरान और उसके बाद भी जारी रही." उनके मुताबिक इस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा निवेश में बढ़ोतरी के कारण आया. इससे प्रति कामगार जीडीपी में सुधार हुआ.

हाल के बरसों में आव्रजन को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ा है. कई देशों में दक्षिणपंथी और आप्रवासन विरोधी दल मजबूत हुए हैं. अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों में यह मुद्दा राजनीति के केंद्र में आ गया है.

आप्रवासियों की ज्यादा आबादी का मतलब ज्यादा अपराध नहीं

लेकिन इस अध्ययन में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के कई समृद्ध देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. विश्लेषण बताता है कि आव्रजन से आर्थिक वृद्धि और उत्पादकता में साफ इजाफा हुआ. दक्षिणपंथी पार्टियां और संगठन आरोप लगाते हैं कि ज्यादा विदेशियों के आने से आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो रही है, यह शोध इस दावे को आंकड़ों के साथ चुनौती दे रहा है.

उत्पादकता को कैसे बेहतर किया विदेशी कामगारों ने

ओईसीडी देशों में बाहरी देशों से आने वाले प्रवासियों की संख्या 1990 में करीब 2.5 करोड़ थी. 2024 में यह बढ़कर करीब 10 करोड़ हो गई. इसी दौरान कई देशों में मूल आबादी की वृद्धि दर नकारात्मक हो गई. अध्ययन के मुताबिक, यदि किसी देश में आबादी के एक प्रतिशत बराबर अतिरिक्त आप्रवासी आते हैं, तो पांच साल में प्रति कामगार जीडीपी में 1.2 प्रतिशत और दस साल में 1.9 प्रतिशत की वृद्धि होती है.

ये निष्कर्ष यूरोपीय संघ के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं. वहां 2015 से जन्मदर काफी कम है. कोविड महामारी के बाद यह गिरावट और ज्यादा हो गई. अध्ययन नतीजे के तौर पर कहता है कि ब्रिटेन, इटली और स्पेन की 1990 से 2024 के बीच हुई प्रति व्यक्ति आर्थिक तरक्की में इसका बड़ा योगदान है.

भविष्य की तैयारी में मदद करते आप्रवासी

अच्छी पढ़ाई, बढ़िया करियर या फिर एक अच्छी लाइफस्टाइल की तलाश में भारत समेत कई देशों के हर साल लाखों प्रतिभाशाली युवा अमीर देशों का रुख करते हैं. समृद्ध देश कई तरीकों से यह तय भी करते हैं कि प्रतिभाशाली या फिर वित्तीय रूप से सक्षम युवा ही उनके देश में पहुंचे. 1980 के दशक से ही अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देश, कई गरीब या पिछड़े देशों के युवाओं को रिझा रहे हैं. अमेरिका की सिलिकॉन वैली, ब्रिटेन का हेल्थकेयर सिस्टम, जर्मनी, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में श्रम से जुड़े कई काम इसका उदाहरण हैं.

कुशल कामगारों को आकर्षित करने की जर्मनी की नई पहल

पलायन की इस प्रक्रिया से जहां समृद्ध देशों के ऊर्जा से भरे प्रतिभाशाली कामगार मिलते हैं, वहीं पीछे छूटे देशों कोब्रेन ड्रेन या प्रतिभा पलायन का सामना करना पड़ता है.

हालांकि पलायन देखने वाले देशों को भी इसका बड़ा आर्थिक लाभ तो मिलता ही है. भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल समेत विकास कर रहे कई देशों की अर्थव्यवस्था में, विदेशों में काम करने वाले लोगों द्वारा भेजे गए पैसे (रेमिटेंस) का बड़ा योगदान है. भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था को बीते कई साल से हर वर्ष ऐसी रेमिटेंस से 100 अरब डॉलर से ज्यादा मिल रहे हैं. यह रकम विदेशी मुद्रा भंडार को स्वस्थ बनाए रखने में भी मदद करती है. वहीं पाकिस्तान की जीडीपी में इस रेमिटेंस का योगदान करीब 9.4 प्रतिशत है तो नेपाल की जीडीपी में 25 से 27 फीसद.

आप्रवासियों की लगातार होने वाली आवक से भी आर्थिक वृद्धि के ये फायदे खत्म नहीं होते हैं. बड़ी संख्या में विदेशियों को अपनाने वाले कनाडा और ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए प्रोफेसर पेरी कहते हैं कि उत्पादकता और निवेश को नुकसान पहुंचाए बिना भी ज्यादा कामगारों शामिल करने के सकारात्मक तरीके बरकरार हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 26, 2026 08:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).