ईरान: जमीनी कार्रवाई की चर्चा, अमेरिकी सैनिक पहुंचे मध्य-पूर्व

एक ओर ईरान युद्ध खत्म कराने के लिए सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री पाकिस्तान में बातचीत कर रहे हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

एक ओर ईरान युद्ध खत्म कराने के लिए सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री पाकिस्तान में बातचीत कर रहे हैं. वहीं इस बीच अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने सैनिकों की पहली टुकड़ी भेज दी है.ईरान युद्ध के और बड़े इलाके में फैलने के डर के बीच अमेरिकी सैनिक मध्य-पूर्व में पहुंच चुके हैं. यमन में मौजूद ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने शनिवार को पहली बार इस्राएल पर हमला किया था, इससे खाड़ी के इलाके में हालात और तनावपूर्ण हो गए थे. इसी बीच अमेरिका ने युद्धग्रस्त क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए हजारों सैनिक भेजे हैं. अमेरिकी सेना ने बताया कि दो निर्धारित कंटिंजेंट्स में से पहला दस्ता शुक्रवार को एक सैन्य जहाज में सवार होकर मध्य-पूर्व पहुंच गया है.

वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि पेंटागन ईरान में कई सप्ताह चलने वाली जमीनी कार्रवाई की योजना बना रहा है. इसमें स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेस और पारंपरिक इन्फैंट्री के जरिए कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इस तरह की तैनाती को मंजूरी देंगे या नहीं, यह अब भी साफ नहीं है. अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ईरान में जमीनी सेना भेजने जैसे विकल्पों पर काफी समय से विचार कर रहा है.

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सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री पाकिस्तान में

अमेरिका और इस्राएल के 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद यह युद्ध अब पूरे मध्यपूर्व में फैल चुका है. हजारों लोग मारे जा चुके हैं और तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ा है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका अपने लक्ष्य बिना जमीनी सेना उतारे भी हासिल कर सकता है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के पास रणनीति बदलने की अधिकतम गुंजाइश रहे, इसलिए कुछ दस्ते तैनात किए जा रहे हैं. जल्द ही इस इलाके में अमेरिका की 82वीं एयरबोर्न डिविजन की बड़ी तादाद में तैनाती भी संभव है.

इस बीच पाकिस्तान क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए मध्यस्थ बनने की कोशिश में जुटा है. रविवार से इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत शुरू होगी. एक दिन पहले ही ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बात की थी.

ईरान और लेबनान पर हमले जारी

इस्राएल ने रविवार को दावा किया कि उसने ईरान की हथियार निर्माण इकाई को निशाना बनाया है. ईरानी मीडिया के मुताबिक ईरान के दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर-ए-खमीर में एक तट पर हुए हमले में पांच लोग मारे गए और दो जहाज नष्ट हो गए.

लेबनान में भी इस्राएल ने हमले तेज कर दिए हैं. कथित तौर पर हिज्बुल्लाह से जुड़े पत्रकारों पर एक स्ट्राइक में तीन लेबनानी पत्रकारों की मौत हुई है, साथ ही एक लेबनानी सैनिक भी मारा गया है. बचाव दल पर हुए दूसरे हमले में और लोगों के हताहत होने की खबर है. इस्राएली सेना का दावा है कि मारा गया पत्रकार हिज्बुल्लाह की इंटेलिजेंस यूनिट का हिस्सा था.

ईरान ने भी इस्राएल और खाड़ी देशों पर अपने ड्रोन हमले जारी रखे हैं. इराक के कुर्द नेता मसूद बरजानी के घर के पास एक ड्रोन मार गिराया गया. इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति के घर पर भी इसी तरह का हमला हुआ.

रूस ने ईरान से निकाले अपने कर्मचारी

हूथी विद्रोहियों के दोबारा इस्राएल पर हमले के बाद वैश्विक शिपिंग उद्योग के लिए नया खतरा पैदा हो गया है. होर्मुज जलडमरूमध्य पहले ही लगभग बंद है और दुनिया की ऊर्जा सप्लाई इसका खामियाजा भुगत रही है. अब बाब-अल-मंदेब पर भी खतरा बढ़ सकता है, जहां से होकर बड़ी संख्या में जहाज स्वेज नहर की ओर जाते हैं.

ईरान युद्ध के चलते अमेरिका में भी युद्ध विरोधी प्रदर्शनों ने भी रफ्तार पकड़ ली है. डॉनल्ड ट्रंप लगातार संकेत दे रहे हैं कि वे युद्ध जल्द खत्म करना चाहते हैं, हालांकि ईरान के बिजलीघरों और ऊर्जा ढांचे पर हमलों की चेतावनी भी उन्होंने अभी वापस नहीं ली है. फिर भी होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए दी गई समयसीमा उन्होंने 10 दिन और बढ़ा दी है. हालांकि ईरान कुछ जहाजों को होर्मुज से गुजरने दे रहा है. पाकिस्तान ने बताया है कि ईरान ने 20 पाकिस्तानी जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की मंजूरी दे दी है.

इस बीच रूस की परमाणु एजेंसी रोसएटॉम ने बसरा के बुशहर प्लांट से अपने कर्मचारियों को निकाल लिया है और चेतावनी दी है कि हमलों से परमाणु सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने भी कहा है कि यदि ईरान के आर्थिक ढांचे या इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला हुआ तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा.

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