23 अप्रैल की बड़ी खबरें और अपडेट्स

भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.रूस से लड़ने के लिए यूरोप देगा यूक्रेन को 90 अरब यूरो का लोन

भारत-चीन को ‘हैल होल’ बताने वाले पॉडकास्ट को ट्रंप ने किया रीपोस्ट

ईरान युद्ध का असर, भारत को यूरिया खरीदने के लिए देने पड़ेंगे दोगुने दाम

जर्मनी ने भारत के साथ जल्द पनडुब्बी समझौता होने की उम्मीद जताई

पीएम मोदी पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

ईरान ने कहा, नाकेबंदी के साथ युद्धविराम बेमानी, बातचीत फिर टली

पश्चिम बंगाल में 91 और तमिलनाडु में 84 फीसदी से अधिक वोटिंग

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में गुरुवार, 23 अप्रैल को विधानसभा चुनावों में बंपर वोटिंग हुई है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु में 84 फीसदी से अधिक और पश्चिम बंगाल में 91 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई है. इन आंकड़ों में अभी और बढ़ोतरी भी हो सकती है. 23 अप्रैल को तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल की 152 सीटों के लिए मतदान हुआ.

पश्चिम बंगाल के बांकुरा में 93.49 फीसदी, कूचबिहार में 94.20, दक्षिण दिनाजपुर में 94.64, जलपाईगुड़ी में 92.88, मुर्शिदाबाद में 92.81, पश्चिमी मेदिनीपुर में 91.73 और उत्तरी दिनाजपुर में 91.92 फीसदी वोटिंग हुई. वहीं, तमिलनाडु के धर्मपुरी और इरोड में करीब 90 फीसदी, दिंडीगुल में 88.45 फीसदी, कांचीपुरम में 86.99 फीसदी और करूर में 92.19 फीसदी वोटिंग हुई है.

तमिलनाडु में मुकाबला त्रिकोणीय है. डीएमके-कांग्रेस गठबंधन सत्ता में वापसी के प्रयास में है, जिसे एआईएडीएमके और बीजेपी का गठबंधन चुनौती दे रहा है. इसके अलावा, अभिनेता विजय की टीवीके पार्टी पर भी निगाहें टिकी हुई हैं. विश्लेषकों का मानना है कि उनकी पार्टी चुनाव में बड़ा असर छोड़ सकती है. वहीं, पश्चिम बंगाल में मुख्य मुकाबला ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच में है.

‘हैल होल’ वाले कमेंट को ट्रंप द्वारा रीपोस्ट किए जाने पर भारत ने क्या कहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने राजनीतिक टिप्पणीकार और रेडियो होस्ट माइकल सैवेज के पॉडकास्ट के उस कमेंट को रीपोस्ट किया है, जिसमें भारत, चीन और अन्य देशों को “नरक जैसे देश” यानी ‘हैल होल’ बताया गया है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बारे में कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "हमने कुछ रिपोर्टें देखी हैं. मैं इसे यहीं छोड़ दूंगा."

इस पॉडकास्ट में जन्म आधारित नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) को लेकर कड़ी आपत्तियां जताई गई हैं. पॉडकास्ट में माइकल सैवेज ने आरोप लगाया कि भारत और चीन जैसे देशों से लोग अमेरिका आकर “नौवें महीने में बच्चे को जन्म दे देते हैं” ताकि बच्चा तुरंत अमेरिकी नागरिक बन जाए. इसी टिप्पणी में उन्होंने भारतीय और चीनी प्रवासियों को “लैपटॉप वाले अपराधी” कहा और यह भी दावा किया कि उन्होंने अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाया है.

भारत में इस साल 5 से 10 फीसदी कम हो सकती है गेहूं की पैदावार

भारत में इस साल गेहूं की पैदावार में 2025 की तुलना में 5 से 10 फीसदी की कमी आ सकती है. फसल की कटाई से ठीक पहले बारिश होने और ओले गिरने की वजह से यह कमी आएगी. एग्रीकल्चरल कमोडिटी ट्रेडर ओलम एग्री इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी नितिन गुप्ता ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से कहा, गेहूं की फसल अच्छी स्थिति में थी लेकिन असमय बारिश की वजह से पैदावार में कमी आ सकती है.

भारत की 80 फीसदी से अधिक गेहूं की पैदावार मध्य प्रदेश और उत्तरी राज्यों- उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से होती है. इन सभी राज्यों में मार्च से मध्य अप्रैल के बीच औसत से अधिक वर्षा हुई, जब गेहूं की कटाई का समय होता है. इस वजह से ही पैदावार की कमी का अनुमान लगाया जा रहा है. हालांकि, पैदावार कम होने की वजह से देश में गेहूं की कमी होने की कोई आशंका नहीं है क्योंकि सरकारी भंडार में जरूरत से करीब तीन गुना ज्यादा गेहूं मौजूद है.

अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद ईरान ने टोल लगाकर कमाई की

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर लगाए गए टोल से पहली कमाई मिलने की पुष्टि की है. संसद के उपाध्यक्ष हमीदरेजा हाजीबाबाई ने बताया, “होर्मुज जलडमरूमध्य के टोल से मिली पहली राशि सेंट्रल बैंक के खाते में जमा कर दी गई है.” हालांकि, इस आय के बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है.

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां सामान्य हालात में दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल और गैस गुजरता है. मौजूदा हालात में ईरान ने यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या काफी सीमित कर दी है. पहले ईरानी संसद इस बात पर विचार कर रही थी कि इस मार्ग पर टोल लगाया जाए या नहीं और अधिकारियों ने संकेत दिए थे कि समुद्री यातायात “युद्ध से पहले जैसी स्थिति में वापस नहीं आएगा.”

दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप लगातार ईरान पर इस जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने का दबाव बना रहे हैं लेकिन उनकी नाकेबंदी भी जारी है. वहीं ब्रिटेन, फ्रांस और 30 से ज्यादा देशों के सैन्य योजनाकार इस क्षेत्र में नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चर्चा कर चुके हैं. पेरिस और लंदन ने कहा है कि हालात अनुकूल होने पर वे एक बहुराष्ट्रीय मिशन का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं.

पेंटागन में फेरबदल जारी, अमेरिकी नौसेना सचिव जॉन फेलन पद से हटे

अमेरिका के रक्षा विभाग में नेतृत्व बदलाव का सिलसिला जारी है. पेंटागन ने बुधवार को घोषणा की कि नौसेना सचिव जॉन फेलन ने अपना पद छोड़ दिया है. यह जानकारी पेंटागन के प्रवक्ता और रक्षा मंत्री के सहायक शॉन पार्नेल ने सोशल मीडिया पर दी, जहां उन्होंने कहा कि विभाग “उन्हें उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देता है.”

फेलन के अचानक हटने की कोई वजह नहीं बताई गई है. लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि फिलहाल अमेरिकी नौसेना ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू किए हुए है और युद्धविराम के बीच जहाजों को निशाना बना रही है. उसके बीच पद छोड़ना हैरान करता है. फिलहाल यह पद अंतरिम तौर पर नौसेना के उप सचिव हुंग काओ संभालेंगे.

यह बदलाव पेंटागन में हाल के हफ्तों में हुए बड़े फेरबदल का हिस्सा है. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पहले ही सेना के शीर्ष अधिकारी जनरल रैंडी जॉर्ज समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटा चुके हैं. इससे पहले एडमिरल लिसा फ्रांकेटी और जनरल जिम स्लाइफ को भी पद से हटाया गया था, जबकि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल चार्ल्स “सीक्यू” ब्राउन जूनियर को भी बर्खास्त किया था.

जॉन फेलन का कार्यकाल ऐसे समय खत्म हुआ जब नौसेना मध्य पूर्व में सक्रिय भूमिका निभा रही है और उसके तीन विमानवाहक पोत तैनात हैं या तैनाती की तैयारी में हैं. खास बात यह रही कि फेलन का सैन्य पृष्ठभूमि से सीधा जुड़ाव नहीं था. उनके स्थान पर आए हुंग काओ, जो 25 साल के नौसैनिक अनुभव वाले हैं, पहले राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं. उन्होंने यूक्रेन को दी जाने वाली मदद और सैन्य नीतियों पर अपने विचार भी खुलकर रखे थे.

ईरान के पूर्व शाह के निर्वासित बेटे रजा पहलवी समर्थन जुटाने बर्लिन पहुंचे

ईरान के पूर्व शाह के निर्वासित बेटे रजा पहलवी ने बर्लिन में यूरोपीय देशों से अपील की कि वे ईरान की मौजूदा सरकार के साथ समझौते की नीति न अपनाएं. उन्होंने कहा कि बातचीत जारी रखने से सिर्फ मौजूदा सत्ता व्यवस्था मजबूत होगी. बर्लिन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर आप सोचते हैं कि इस शासन के साथ शांति बना सकते हैं, तो आप बहुत गलत हैं” और आगे जोड़ा, “भले ही इस व्यवस्था का कमजोर रूप बच भी जाए, स्थिरता कभी नहीं आएगी.”

पहलवी ने कहा कि यूरोप के सामने विकल्प है, “एक ऐसे मरते हुए शासन के बीच जो हम सबके लिए खतरा है और एक आजाद ईरान.” उन्होंने मौजूदा नेतृत्व को “एक ही शासन के अलग-अलग चेहरे” बताया और दावा किया कि हाल के हफ्तों में 19 राजनीतिक कैदियों को फांसी दी गई है. उन्होंने सवाल उठाया, “क्या स्वतंत्र कही जाने वाली दुनिया कुछ करेगी या चुपचाप इस हत्याकांड को देखती रहेगी?”

पहलवी जर्मनी में अपने राजनीतिक अभियान के लिए समर्थन जुटाने पहुंचे हैं और विभिन्न नेताओं से बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक देशों को “उन लोगों से बात करनी चाहिए जो बेआवाज लोगों की आवाज हैं.” बर्लिन में उनके समर्थन में सैकड़ों लोग जुटे, जबकि विरोध प्रदर्शन भी हुए और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उन पर टमाटर फेंका गया.

वे जर्मनी में एक साधारण व्यक्ति के रूप में हैं, लेकिन राजनीतिक वार्ता भी करेंगे. पहलवी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की कंजर्वेटिव क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) के सांसद आर्मिन लाशेट और अन्य दलों के विदेश नीति विशेषज्ञों से मिलने की उम्मीद है. हालांकि, सरकार के किसी सदस्य से उनकी मुलाकात की कोई योजना नहीं है.

कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट

अमेरिकी नाकेबंदी और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की सख्ती के चलते कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई है और इस वजह से गुरुवार, 23 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई. बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 में 0.84 फीसदी ​​की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,173.05 पर बंद हुई, जबकि सेंसेक्स में 1.09 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 77,664 पर बंद हुई.

16 प्रमुख क्षेत्रों में से 13 में गिरावट दर्ज हुई. ऑटो स्टॉक करीब 2.4 फीसदी और फाइनेंशियल स्टॉक करीब 1.4 फीसदी गिरे. आईटी इंडेक्स करीब 1.2 फीसदी गिरी. वहीं, दूसरी ओर फार्मा सेक्टर में 2.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. विदेशी निवेशकों ने अप्रैल में 4.4 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेचे हैं और 2026 में अब तक 18.6 अरब डॉलर के शेयर बेचे हैं. इस बिकवाली के चलते मार्च में भारतीय शेयर बाजार 11 फीसदी गिरा था, जबकि अप्रैल में इसमें आठ फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है.

बर्लिन में उत्पादन बढ़ाने के लिए टेस्ला देगा 1000 नई नौकरियां

टेस्ला ने घोषणा की है कि वह अपने यूरोप के एकमात्र कार प्लांट में 1,000 नए कर्मचारियों की भर्ती करेगा. यह प्लांट जर्मनी में बर्लिन के पास स्थित है. इस विस्तार के बाद इस फैक्ट्री में कुल कर्मचारियों की संख्या लगभग 11,700 हो जाएगी. कंपनी के अनुसार यह कदम बढ़ती मांग को देखते हुए उठाया गया है, खासकर मॉडल वाय एसयूवी की बिक्री में बढ़ोतरी के कारण उत्पादन बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है.

टेस्ला का लक्ष्य है कि तीसरी तिमाही से उत्पादन को लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए. इसके साथ ही कंपनी करीब 500 अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी नौकरी देने की भी योजना बना रही है. इसके अलावा, बैटरी सेल उत्पादन से जुड़े कई सौ नए पदों पर भर्ती भी शुरू हो चुकी है, जिसका उत्पादन 2027 की पहली छमाही में शुरू होने की उम्मीद है. यह प्लांट लगभग चार साल पहले ग्रुएनहाइड में शुरू हुआ था और इसे टेस्ला के यूरोपीय विस्तार का अहम केंद्र माना जाता है.

कंपनी के प्रमुख इलॉन मस्क पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वह इस साइट को और बड़ा बनाना चाहते हैं, संभव है कि यह यूरोप का सबसे बड़ा औद्योगिक परिसर बन जाए. हालांकि, विस्तार योजनाएं बाजार की परिस्थितियों और पर्यावरण संबंधी विरोध के कारण कुछ समय के लिए धीमी रही हैं.

दूसरी तरफ, टेस्ला की वैश्विक बिक्री पर भी दबाव देखा गया है, जिसमें अमेरिका में टैक्स प्रोत्साहन खत्म होने का असर भी शामिल है. इसी बीच कंपनी अब रोबोटिक्स और रोबोटैक्सी जैसे नए तकनीकी क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दे रही है और उम्मीद है कि उसकी एडवांस ड्राइविंग तकनीक को जल्द ही यूरोपीय संघ में मंजूरी मिल सकती है.

अमेरिकी सीनेट ने आईसीई और बॉर्डर पैट्रोल के लिए बजट योजना पास की, प्रक्रिया पर विवाद गहराया

अमेरिकी सीनेट ने गृह सुरक्षा विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी) को दोबारा चालू करने की दिशा में शुरुआती कदम उठाते हुए एक बजट योजना को मंजूरी दी है, जिसमें आव्रजन प्रवर्तन एजेंसियों यानी आईसीई और बॉर्डर पैट्रोल के लिए फंडिंग शामिल है. यह कदम डेमोक्रेट्स के विरोध के बावजूद लिया गया और अब इसे प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में भेजा जाएगा.

असल में नीतिगत बदलावों की मांग को लेकर अमेरिकी फेडरल एजेंटों द्वारा दो प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया था और इसके चलते यह पूरा विभाग फरवरी के मध्य से बंद है. रिपब्लिकन पार्टी इस फंडिंग को ‘बजट सुलह प्रक्रिया’ यानी ‘बजट रिकॉन्सिलेशन’ के जरिए आगे बढ़ा रही है, जिससे बिना डेमोक्रेट समर्थन के भी कानून पास किया जा सकता है.

सीनेट में रातभर चली वोटिंग के बाद यह प्रस्ताव 50-48 से पास हुआ. रिपब्लिकन नेताओं का कहना है कि इससे अमेरिका की सीमाओं की सुरक्षा मजबूत होगी, जबकि डेमोक्रेट्स का आरोप है कि यह पैसा सामाजिक सेवाओं की बजाय प्रवर्तन एजेंसियों पर ज्यादा केंद्रित है. डेमोक्रेट नेता चक शूमर ने कहा, “हमें आईसीई और बॉर्डर पैट्रोल में भारी निवेश के बजाय लोगों की स्वास्थ्य लागत कम करने पर काम करना चाहिए.” वहीं रिपब्लिकन नेता जॉन थ्यून ने इसे सीमा सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया.

इस बजट को लेकर आगे की प्रक्रिया अब भी जटिल है, क्योंकि इसे हाउस की मंजूरी और संसदीय नियमों की जांच से गुजरना होगा. हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी चाहती है कि पहले प्रवर्तन एजेंसियों की फंडिंग तय हो, फिर बाकी विभागों पर बात आगे बढ़े. इसी खींचतान के बीच यह साफ नहीं है कि पूरा होम सिक्योरिटी विभाग कब पूरी तरह दोबारा सक्रिय हो पाएगा और क्या दोनों पार्टियां समय पर किसी साझा सहमति तक पहुंच सकेंगी.

डेनमार्क में कोपेनहेगन के पास दो ट्रेनों की टक्कर, 17 घायल, 5 की हालत गंभीर

डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन के उत्तर में गुरुवार सुबह दो लोकल ट्रेनों की आमने-सामने टक्कर हो गई, जिसमें 17 लोग घायल हो गए. इनमें से पांच की हालत गंभीर बताई जा रही है. यह हादसा सुबह करीब 6:30 बजे उस रेल मार्ग पर हुआ जो हिलेरोड और कागेरुप शहरों को जोड़ता है. दुर्घटना के समय दोनों ट्रेनों में कुल मिलाकर लगभग 38 यात्री सवार थे.

घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों में पीले और ग्रे रंग की दोनों ट्रेनें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हालत में एक-दूसरे के सामने खड़ी दिखीं. आपातकालीन सेवाओं ने अंदर के हालात को “अराजक” बताया. अग्निशमन और बचाव सेवा प्रमुख क्रिस्टोफर बुहल मार्टेकिल्डे ने कहा, “दोनों ट्रेनों की आमने-सामने टक्कर हुई, जिससे भारी नुकसान हुआ और चारों तरफ टूटे शीशे बिखर गए.”

पुलिस ने बताया कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हादसा कैसे हुआ और इसकी विस्तृत जांच की जाएगी. हादसे के तुरंत बाद सभी यात्रियों को ट्रेनों से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी के फंसे होने की सूचना नहीं है. घायलों को एंबुलेंस और हेलीकॉप्टर की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया है. राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचे और मोर्चा संभाला, जबकि रेल सेवा पर असर डालने वाले इस हादसे ने क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है.

भारत-चीन को ‘हैल होल’ बताने वाले पॉडकास्ट को ट्रंप ने किया रीपोस्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने राजनीतिक टिप्पणीकार और रेडियो होस्ट माइकल सैवेज के पॉडकास्ट को रीपोस्ट किया है, जिसमें भारत, चीन और अन्य देशों को “नरक जैसे देश” यानी ‘हैल होल’ बताया गया है. इस पॉडकास्ट में जन्म आधारित नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) को लेकर कड़ी आपत्तियां जताई गई हैं और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की दलीलों की भी आलोचना की गई है. ट्रंप ने न केवल वीडियो बल्कि उसकी ट्रांसक्रिप्ट भी साझा की, जिससे यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है.

पॉडकास्ट में माइकल सैवेज ने आरोप लगाया कि भारत और चीन जैसे देशों से लोग अमेरिका आकर “नौवें महीने में बच्चे को जन्म दे देते हैं” ताकि बच्चा तुरंत अमेरिकी नागरिक बन जाए. उन्होंने कहा, “अमेरिका में जन्मा बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है” और इस व्यवस्था को बदलने के लिए राष्ट्रीय जनमत संग्रह की मांग की. इसी टिप्पणी में उन्होंने भारतीय और चीनी प्रवासियों को “लैपटॉप वाले अपराधी” कहा और यह भी दावा किया कि उन्होंने अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने हमारे देश को लूटा है और हमारे झंडे का अपमान किया है.”

ईरान युद्ध का असर, भारत को यूरिया खरीदने के लिए देने पड़ेंगे दोगुने दाम

ईरान युद्ध के चलते पैदा हुए उर्वरक संकट के बीच, भारत 25 लाख मीट्रिक टन यूरिया आयात करने जा रहा है. हालांकि, इसके लिए उसे बढ़ी हुई कीमतें चुकानी होंगी. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने एक सरकारी सूत्र के हवाले से यह जानकारी दी है. सूत्र ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि इंडियन पोटाश लिमिटेड 935 डॉलर प्रति टन की दर से 15 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 959 यूरो प्रति टन की दर से 10 लाख मीट्रिक टन यूरिया खरीदने पर सहमत हुआ है. इसमें से 15 लाख टन यूरिया की डिलीवरी पश्चिमी तट पर और 10 लाख टन यूरिया की डिलीवरी पूर्वी तट पर होगी.

भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक है. उसने अप्रैल में ही 25 लाख टन यूरिया खरीदने के लिए टेंडर जारी किया था. इसमें सबसे निचली बोली 935 डॉलर प्रति टन और सबसे ऊंची बोली 1,136 डॉलर प्रति टन की थी. वहीं, इससे पहले राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स ने यूरिया का जो टेंडर जारी किया था, उसमें पश्चिमी तट के लिए 508 डॉलर प्रति टन और पूर्वी तट के लिए 512 डॉलर प्रति टन की बोलियां प्राप्त हुई थीं. ये हालिया टेंडर में मिली बोलियों के मुकाबले लगभग आधी हैं. यानी भारत को अब यूरिया खरीदने के लिए पहले के मुकाबले लगभग दोगुने दाम चुकाने होंगे.

विश्लेषकों का कहना है कि भारत की इस रिकॉर्ड खरीद से यूरिया की वैश्विक आपूर्ति सीमित हो जाएगी और कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. उर्वरक उद्योग के एक अधिकारी ने रॉयटर्स से कहा कि भारत ने तो अपनी आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है लेकिन अब दूसरे खरीदारों को उर्वरक खरीदने के लिए चुनौतियां का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि उत्पादक पहले ही भारत को शिपमेंट भेजने की प्रतिबद्धता जता चुके हैं.

वॉशिंगटन में इस्राएल और लेबनान के बीच बातचीत का नया दौर होगा शुरू

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया है, लेकिन इसी बीच इस्राएल और लेबनान के बीच बातचीत का नया दौर वॉशिंगटन में शुरू होने जा रहा है. यह वार्ता उस नाजुक युद्धविराम को आगे बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा है, जो पिछले हफ्ते शुरू हुआ था. बातचीत का मकसद फिलहाल बड़े मुद्दों को हल करना नहीं, बल्कि आगे की रूपरेखा तय करना है, क्योंकि जमीनी हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं.

दूसरी ओर, ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता आगे नहीं बढ़ पा रही है. ईरान ने अमेरिका पर बातचीत में “ईमानदारी की कमी” का आरोप लगाया है, जिसके बाद पाकिस्तान में प्रस्तावित अगला दौर भी टल गया है. इसी खींचतान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव और बढ़ गया है, जहां जहाजों पर हमले और कब्जे की घटनाओं ने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है.

युद्ध के बावजूद रूस के अरबपतियों की संपत्ति में रिकॉर्ड 11 फीसदी का इजाफा

यूक्रेन में युद्ध और कड़े पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस के अरबपतियों की कुल संपत्ति पिछले एक साल में 11 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 696.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई है. रूस की अर्थव्यवस्था पर बाहरी दबाव लगातार बना हुआ है, उसके बावजूद ऐसा होना बड़ी बात मानी जा रही है. देश के सबसे अमीर लोग अब भी मुख्य रूप से प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े कारोबार पर निर्भर हैं और वैश्विक व्यापार में आई रुकावटों के कारण कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी ने उनकी संपत्ति को और बढ़ाया है. हालांकि, अमीरों की सूची में कोई नया नाम शामिल नहीं हुआ है.

फोर्ब्स के अनुसार, निवेश कंपनी सेवेरग्रुप के प्रमुख अलेक्सी मोर्दाशोव 37 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ रूस के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं, जिनकी दौलत में पिछले साल के मुकाबले 8.4 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई. उनके बाद इंटररोस और नॉर्निकेल से जुड़े व्लादिमीर पोटानिन 29.7 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर हैं. लुकोइल के पूर्व प्रमुख वागित अलेकपेरोव 29.5 अरब डॉलर के साथ तीसरे और नोवाटेक के सीईओ लियोनिद मिचेल्सन अपने परिवार के साथ 28.3 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ चौथे स्थान पर हैं.

वैश्विक स्तर पर तुलना करें तो रूस के ये अरबपति अब भी अमेरिकी टेक उद्योग के दिग्गजों से काफी पीछे हैं. फोर्ब्स की वैश्विक सूची में इलॉन मस्क 839 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ सबसे आगे हैं, जबकि गूगल के लैरी पेज 257 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर हैं. इससे साफ है कि रूस के अरबपतियों की संपत्ति भले ही बढ़ी हो, लेकिन वैश्विक दौड़ में उनका प्रभाव सीमित ही बना हुआ है.

रूस से लड़ने के लिए यूरोप देगा यूक्रेन को 90 अरब यूरो का लोन

यूरोपीय संघ के नेता गुरुवार को साइप्रस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का स्वागत करेंगे. असल में बहुत विचार विमर्श के बाद आखिरकार यूरोप ने यूक्रेन को 90 अरब यूरो की वित्तीय मदद देने का फैसला किया है. इस बैठक में उसे अंतिम मंजूरी मिलने की उम्मीद है. इस फंड पर हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान और जेलेंस्की के बीच विवाद के कारण रोक लगी हुई थी.

ओरबान ने शर्त रखी थी कि रूस के हमले में क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत के बाद ही वह वीटो हटाएंगे. जेलेंस्की ने मंगलवार को कहा कि मरम्मत पूरी हो चुकी है और इसके बाद यूक्रेन ने हंगरी और स्लोवाकिया के लिए तेल आपूर्ति फिर शुरू कर दी. तब कहीं जा कर इस कदम के बाद रास्ता साफ हुआ. फिलहाल यूरोपीय संघ में इस फैसले को बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है.

यह बैठक सिर्फ यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगी. साइप्रस, जो इस समय ईयू की रोटेशन वाली अध्यक्षता संभाल रहा है, वहां मध्य पूर्व के हालात और बढ़ती ऊर्जा कीमतों पर भी चर्चा होगी. हालिया तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और यूरोप में ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है.

ईयू ने संकेत दिया है कि हालात ठीक होने पर वह इस अहम समुद्री मार्ग को खुला रखने में योगदान देने के लिए तैयार है. शुक्रवार को लेबनान, मिस्र, सीरिया और जॉर्डन के नेता भी बातचीत में शामिल होंगे, जहां क्षेत्रीय संघर्ष और उसके असर पर गहन चर्चा होगी.

इसके अलावा, 2028 से 2034 तक के ईयू बजट पर भी पहली बार विचार होगा. यूरोपीय आयोग करीब दो ट्रिलियन यूरो का बड़ा बजट चाहता है, लेकिन सदस्य देशों में इस पर मतभेद हैं. फ्रांस ज्यादा निवेश के पक्ष में है, जबकि जर्मनी खर्च को सीमित रखने की बात कर रहा है. ऐसे में यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट और आंतरिक मतभेदों के बीच ईयू के सामने संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है.

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