राजनीति

नॉर्ड स्ट्रीम धमाकों का एक और संदिग्ध गिरफ्तार

क्रोएशिया की पुलिस ने एक यूक्रेनी गोताखोर को गिरफ्तार किया है.

नॉर्ड स्ट्रीम धमाकों का एक और संदिग्ध गिरफ्तार
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

क्रोएशिया की पुलिस ने एक यूक्रेनी गोताखोर को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारी यूरोपीय अरेस्ट वॉरंट के आधार पर की गई है. शक है कि इस गोताखोर ने अरबों यूरो की नॉर्ड स्ट्रीम, पाइपलाइनों को उड़ाने में हिस्सा लिया.क्रोएशिया के पुला शहर के पास जमीन, समंदर को तीन तरफ से घेरकर, एक झील जैसा लुक देती है. झील के तट पर सुंदर बीच है और पानी में कुछ जगहों पर कम गहराई में डूबी चट्टानें. झील वहां एकदम से गहरी नहीं होती, बल्कि गहराव एक हल्की ढाल के साथ बढ़ता है. और यही खासियत, पुला को स्कूबा डाइविंग के लिए विख्यात बनाती है.

शहर में स्कूबा डाइविंग, यानी ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ गोताखोरी सिखाने वाले कई स्कूल हैं. गोताखोरी सीखने वाले शुरुआती चरणों से 3 से 3 मीटर की गहराई तक जाते हैं. अनुभव, साहस और कौशल बढ़ने पर ये गहराई बढ़ती चली जाती है. गर्मियों में दुनिया भर के कई पेशेवर गोताखोर, नए लोगों को गोताखोरी सिखाने पुला आते हैं. क्रोएशिया की पुलिस ने यूक्रेन के एक निपुण तैराक को इसी शहर में गिरफ्तार किया है.

नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइनों में हुए धमाके में यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारियां

ये जानकारी जर्मनी के संघीय अभियोजन विभाग ने दी है. निजता के अधिकार के कारण, संदिग्ध की पहचान छुपाते हुए जर्मन अधिकारियों ने उसका नाम व्लादिमीर जेड बताया है. जर्मन अभियोजन विभाग के मुताबिक, "व्लादिमीर जेड एक प्रशिक्षित स्कूबा गोताखोर है, जो बोर्नहोम द्वीप (डेनमार्क) के पास नॉर्ड स्ट्रीम 1 और नॉर्ड स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइनों में विस्फोटक लगाने वाले ग्रुप का एक हिस्सा था."

26 सितंबर 2022 को बाल्टिक सागर की गहराई से गुजरने वाली इन पाइपलाइनों में कई धमाके हुए. इन पाइपलाइनों के जरिए रूसी गैस, जर्मनी तक आती थी. असल में फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमला करने के बाद, यूरोपीय देशों ने रूसी तेल और गैस पर अपनी निर्भरता घटाते हुए उसे खत्म करने की पहल शुरू कर दी. उसी दौरान नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइनों का बार बार जिक्र हो रहा था.

जर्मन अभियोजन अधिकारियों का कहना है कि, पाइपलाइनों को ध्वस्त करने की योजना, गैस पाइपलाइन को हमेशा के लिए बर्बाद करने के इरादे से बनाई गई. इसका मकसद था कि रूस किसी भी तरह से यूरोप तक गैस ना पहुंचा सके. लक्ष्य था कि, ऐसा होने पर मॉस्को को गैस के बदले मिलने वाली रकम में गिरावट आएगी और वह अपनी सैन्य गतिविधियों पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं कर सकेगा.

संदिग्धों पर कैसे आरोप लगा रहा है जर्मनी

जर्मन अधिकारी कहते हैं कि व्लादिमीर जेड "बहुत ही पुख्ता तौर पर धमाके करने, संविधान विरोधी बाधा डालने और इमारतों व ढांचों को नुकसान पहुंचाने का संदिग्ध है." जर्मन अभियोजन विभाग के बयान में कहा गया है कि अब व्लादिमीर जेड को क्रोएशिया से जर्मनी लाने की तैयारी की जानी चाहिए.

जुलाई 2026 में भी जर्मन के संघीय अभियोजन विभाग ने नॉर्ड स्ट्रीम पाइप लाइनों से जुड़े धमाकों के मामले में एक पूर्व यूक्रेनी सैन्य अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दायर किया. सेरही के. के खिलाफ विस्फोट करने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सार्वजनिक सेवाओं में बाधा डालने और नागरिक ढांचे पर हमला करने जैसे युद्ध अपराध के आरोप लगाए गए हैं.

दरसल, जर्मन अधिकारियों को धमाकों के कुछ समय बाद ही शक हो गया कि विस्फोट, पेशेवर गोताखोरों और सैन्य कौशल रखने वाले लोगों ने किए गए हैं. पाइपलाइनों में धमाके 70 से 80 मीटर की गहराई में किए गए. इतनी गहराई पर पानी का दबाव काफी ज्यादा होता है. इतनी ज्यादा दबाव में वहां जाकर संवेदनशील जगहों पर विस्फोटक लगाने के लिए खास उपकरणों और गैस मिश्रणों की जरूरत पड़ती है. फॉरेंसिक जांच में यह भी पता चला कि धमाके के लिए बेहद ताकतवर व सैन्य ग्रेड विस्फोटक इस्तेमाल किए गए.

यूक्रेन की सरकार अब तक इन धमाकों में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इंकार करती आई है.

क्या थीं नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइनें

रूस से जर्मनी तक सीधे गैस पहुंचाने वाले नॉर्ड स्ट्रीम सिस्टम में दो पाइपलाइन थीं. 1220 से 1230 किलोमीटर लंबी इन पाइपलाइनों का निर्माण रूस की सरकारी ऊर्जा कंपनी गाजप्रोम ने किया था. नॉर्ड स्ट्रीम 1 का निर्माण अप्रैल 2010 में शुरू हुआ और नवंबर 2011 में पाइपलाइन से गैस का फ्लो शुरू कर दिया गया.

नॉर्ड स्ट्रीम 2 भी सितंबर 2021 में बनकर तैयार हो गई, लेकिन इससे गैस सप्लाई कभी नहीं हुई. असल में अमेरिका और बाल्टिक देशों समेत जर्मनी के कई सहयोगी इस पाइपलाइन से खुश नहीं थे. भारी तनाव के बीच जर्मनी ने आपूर्ति प्रक्रिया को दी गई अनुमति रद्द कर दी. कुछ ही दिनों बाद फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया. यूक्रेन युद्ध के कारण रूसी गैस पर यूरोप की अति निर्भरता, एक बड़ा राजनीतिक, रणनैतिक और कूटनीतिक मुद्दा बन गई.

सितंबर 2022 में हुए धमाकों से पहले नॉर्ड स्ट्रीम 1 से यूरोप को 450 अरब घन मीटर रूसी गैस मिली थी. इस गैस का सबसे बड़ा उपभोक्ता जर्मनी था. जर्मनी पहुंचने के बाद यह गैस नीदरलैंड्स, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, चेक गणराज्य, ऑस्ट्रिया और स्लोवाकिया को भी सप्लाई की जाती थी.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 19, 2026 07:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).