नहीं रहे मशहूर गीतकार गोपालदास 'नीरज', अब कौन कहेगा, 'ऐ भाई! जरा देख के चलो'
उत्तर प्रदेश सरकार ने भी यश भारती सम्मान से सम्मानित कर उनके दमदार लेखनी को सराहा था. बॉलीवुड फिल्मों में कई सुपरहिट गाने लिखकर अपना लोहा मनवाया था.
नई दिल्ली. लिखे जो खत तुझे', 'ऐ भाई! जरा देख के चलो', 'दिल आज शायर है', 'जीवन की बगिया महकेगी', 'खिलते हैं गुल यहां' जैसे मशहूर गानों के जरिए लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले हिंदी के प्रख्यात गीतकार और कवि गोपाल दास नीरज 93 वर्ष की उम्र में गुरुवार को दुनिया छोड़ चले, लेकिन ऐसा जिंदादिल कवि कभी मरता है क्या!
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले स्थित पुरवली गांव में 4 जनवरी, 1925 को जन्मे गोपाल दास नीरज जब छह वर्ष के थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था. सन् 1942 में एटा से हाईस्कूल परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास करने के बाद उन्होंने इटावा की कचहरी में कुछ समय टाइपिस्ट का काम किया. उसके बाद सिनेमाघर की एक दुकान पर नौकरी की, लेकिन लिखने की कला अपने हाथ में समेटे गोपाल दास लंबी बेकारी के बाद दिल्ली आ गए.
दिल्ली आकर उन्होंने सफाई विभाग में टाइपिस्ट की नौकरी की. वहां से नौकरी छूट जाने पर कानपुर के डीएवी कॉलेज में क्लर्की की. फिर बाल्कट ब्रदर्स नाम की एक प्राइवेट कंपनी में पांच साल तक टाइपिस्ट का काम किया. नौकरी करने के साथ प्राइवेट परीक्षाएं देकर 1949 में 12वीं, 1951 में बीए और 1953 में प्रथम श्रेणी में हिंदी से एमए पास किया.
'दर्द दिया है', 'आसावरी', 'बादलों से सलाम लेता हू', 'गीत जो गाए नहीं', 'कुछ दोहे नीरज के', 'नीरज की पाती' जैसे रचना संग्रह, 'तमाम उम्र मैं इक अजनबी के घर में रहा', 'हम तेरी चाह में, ऐ यार! वहां तक पहुंचे', 'अब तो मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाए', 'दूर से दूर तलक एक भी दरख्त न था' , 'पीछे है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिये' जैसी गजलें लिखने वाले मशहूर कवि और गीतकार गोपाल दास नीरज को 1991 में पद्मश्री और 2007 में पद्मभूषण सम्मान से भी नवाजा गया था.
उत्तर प्रदेश सरकार ने भी यश भारती सम्मान से सम्मानित कर उनके दमदार लेखनी को सराहा था. बॉलीवुड फिल्मों में कई सुपरहिट गाने लिखकर अपना लोहा मनवाया था. उन्हें उनकी लेखनी के लिए कई बार सम्मानित किया गया था. उन्होंने तीन बार फिल्म फेयर अवार्ड भी अपने नाम किया था.
हिंदी मंचों के प्रसिद्ध कवियों में शुमार नीरज को अंतिम दिनों में सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिस कारण मंगलवार को तबीयत बिगड़ने के बाद आगरा के लोटस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, लेकिन तबीयत ज्यादा खराब होने पर उन्हें एम्स लाया गया, हालांकि बुधवार को तबीयत में सुधार की भी खबरें आई थीं, लेकिन अगले दिन नीरज ने दुनिया को अलविदा कह दिया. उनके लाखों चाहने वालों का दिल आज रोएगा बहुत, उनकी प्रसिद्ध कविता 'रोने वाला ही गाता है' सबको ढाढस बंधाएगी. कवि कभी मरता नहीं, नीरज सदियों अपनी रचनाओं के रूप में जीवित रहेंगे। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!!!
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 19, 2018 11:26 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

