Supreme Court on Waste Management: अब 'किसी और की समस्या' नहीं, कचरा प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट का देशव्यापी सख्त आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 (SWM Rules, 2026) के कड़ाई से क्रियान्वयन के लिए देशव्यापी दिशा-निर्देश जारी किए हैं. न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने समाज में कचरा निस्तारण को 'किसी और की जिम्मेदारी' समझने की उदासीनता पर कड़ी फटकार लगाई.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने देश भर में कचरे के बढ़ते अंबार और इसके निस्तारण (Waste Management) को लेकर नागरिकों व संस्थानों में नागरिक बोध (Civic Sense) के अभाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए देशव्यापी सख्त आदेश जारी किए हैं. न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 (SWM Rules, 2026) के अनुपालन की समीक्षा करते हुए कहा कि देश में कचरा प्रबंधन से जुड़े पूरे बुनियादी ढांचे का ऑडिट और अपग्रेडेशन किया जाना अनिवार्य है.

अदालत ने उस जन-मानसिकता की कड़ी आलोचना की जिसमें कचरा फैलाना तो अपना अधिकार समझा जाता है, लेकिन उसके सही निस्तारण को केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी मान लिया जाता है. पीठ ने इस दृष्टिकोण को कानूनी व व्यावहारिक रूप से गलत बताते हुए 'संवैधानिक रूप से अनैतिक' (Constitutionally Unethical) करार दिया.

"कचरा पैदा करने का हक, लेकिन सहयोग नहीं": सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज जैव-अपघटनीय (Biodegradable), अजैव-अपघटनीय, प्लास्टिक, खतरनाक और इलेक्ट्रॉनिक कचरे की मात्रा इतनी बढ़ चुकी है कि इसे केवल एक वर्ग या सफाई कर्मियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. यह भी पढ़ें: फांसी की जगह जहर का इंजेक्शन? सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका; कहा- 'फांसी की सजा संवैधानिक, भविष्य में सरकार चाहे तो कर सकती है समीक्षा'

पीठ ने टिप्पणी की:

"यह अत्यंत खेदजनक है कि पूरे समाज में यह मानसिकता घर कर गई है कि 'मुझे कचरा पैदा करने का अधिकार तो है, लेकिन स्रोत पर ही उसके प्रभाव को नियंत्रित करने और सहयोग करने की मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है'."

अदालत ने स्पष्ट किया कि स्कूल-कॉलेज, छात्र, पेशेवर, व्यापारी, शिक्षित और अशिक्षित सभी नागरिकों तथा संस्थानों पर स्रोत पर ही कचरा अलग-अलग करने (Segregation at Source) का कानूनी दायित्व है.

6 सप्ताह में बल्क वेस्ट जनरेटरों की पहचान का अल्टीमेटम

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के सभी जिलाधिकारियों (District Collectors) को स्थानीय निकायों के सहयोग से छह सप्ताह के भीतर अपने अधिकार क्षेत्र के सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स (Bulk Waste Generators - BWGs) की पहचान करने का निर्देश दिया है.

हर जिले में बनेगी स्पेशल सेल: कटेगी बिजली और पानी की आपूर्ति

नियमों का अनुपालन न करने वाले बड़े संस्थानों पर नकेल कसने के लिए कोर्ट ने प्रत्येक जिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारियों को शामिल कर एक विशेष सेल (Special Cell) गठित करने का आदेश दिया है.

4 श्रेणियों में करना होगा कचरे का वर्गीकरण

नए नियमों के तहत कचरे को स्रोत पर ही चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य किया गया है:

  1. गीला कचरा (Wet Waste)
  2. सूखा कचरा (Dry Waste)
  3. सैनिटरी अपशिष्ट (Sanitary Waste)
  4. घरेलू खतरनाक कचरा (Domestic Hazardous Waste)

अदालत ने रेखांकित किया कि केवल नियम बनाने या समितियां गठित करने से स्थायी समाधान नहीं निकलेगा, जब तक कि नागरिक और व्यापारिक प्रतिष्ठान अपनी जिम्मेदारियों को व्यक्तिगत स्तर पर स्वीकार नहीं करते.

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