How Nipah Virus Attack: निपाह वायरस कैसे करता है मस्तिष्क पर हमला? जानें लक्षण, खतरे और बचाव के जरूरी उपाय

भारत में निपाह वायरस (NiV) को लेकर हाई अलर्ट जारी है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह वायरस सीधे मस्तिष्क पर हमला करता है, जिससे जान जाने का खतरा 75% तक हो जाता है. जानिए इसके फैलने के तरीके और सुरक्षा के महत्वपूर्ण टिप्स.

How Nipah Virus Attack:  भारत में निपाह वायरस (NiV) के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने हाई अलर्ट जारी किया है. चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस घातक वायरस की क्षमता पर चिंता व्यक्त की है, जो सीधे इंसान के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) पर हमला करता है. मुख्य रूप से चमगादड़ों से फैलने वाले इस वायरस की मृत्यु दर 40% से 75% के बीच है. वर्तमान में इसका कोई सटीक टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है, इसलिए समय पर पहचान और सावधानी ही बचाव का एकमात्र रास्ता है.

मस्तिष्क पर कैसे हमला करता है निपाह?

निपाह वायरस को 'न्यूरोट्रोपिक' माना जाता है, जिसका अर्थ है कि यह विशेष रूप से मस्तिष्क की कोशिकाओं को निशाना बनाता है. शरीर में प्रवेश करने के बाद, यह 4 से 14 दिनों के 'इनक्यूबेशन पीरियड' के दौरान खुद को विकसित करता है. यह भी पढ़े:  Nipah Virus Outbreak in WB: बंगाल में निपाह वायरस के नए मामले सामने आते ही एशिया में अलर्ट, कई देश के हवाई अड्डों पर कोविड-स्टाइल स्वास्थ्य जांच शुरू

शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य बुखार, सिरदर्द और गले में खराश जैसे होते हैं. हालांकि, जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, यह मस्तिष्क में गंभीर सूजन (Encephalitis) पैदा करता है. इसके कारण मरीज को चक्कर आना, मानसिक भ्रम और बेहोशी महसूस होने लगती है. गंभीर मामलों में, मरीज 24 से 48 घंटों के भीतर कोमा में जा सकता है. संक्रमण से बचने वाले लोगों में अक्सर व्यक्तित्व में बदलाव या दौरे पड़ने जैसी दीर्घकालिक न्यूरोलॉजिकल समस्याएं देखी जाती हैं.

संक्रमण फैलने के मुख्य रास्ते

निपाह वायरस मुख्य रूप से तीन तरीकों से फैलता है:

बचाव और सुरक्षा के अनिवार्य टिप्स

चूंकि इस वायरस का कोई इलाज नहीं है, इसलिए विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह दी है:

  1. फलों के प्रति सावधानी: जमीन पर गिरे या पक्षियों द्वारा कुतरे गए फलों को न खाएं. खजूर के कच्चे रस के सेवन से बचें.

  2. हाथों की स्वच्छता: सार्वजनिक स्थानों से लौटने या किसी बीमार व्यक्ति से मिलने के बाद साबुन और पानी से हाथ अच्छी तरह धोएं.

  3. सुरक्षा उपकरणों का उपयोग: स्वास्थ्य कर्मी और देखभाल करने वाले लोग मास्क, दस्ताने और पीपीई किट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें.

  4. चमगादड़ों से दूरी: उन क्षेत्रों से दूर रहें जहां चमगादड़ रहते हैं, जैसे पुराने कुएं या घने पेड़.

सरकारी तैयारी और सतर्कता

स्वास्थ्य मंत्रालय और विभिन्न राज्य सरकारों ने उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी है. संभावित क्लस्टरों को रोकने के लिए मोबाइल टेस्टिंग लैब और आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं. अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि तेज बुखार या सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र को रिपोर्ट करें.

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