Nepal Floods: नेपाल की बाढ़ से गंडक नदी में बहकर आए गैस सिलेंडर, लकड़ियां और 50 किलो की मछली; कुशीनगर में जान जोखिम में डालकर सामान लूटने की होड़
नेपाल के रसुवा जिले में आई विनाशकारी बाढ़ का असर उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिले कुशीनगर में बड़ी गंडक (नारायणी) नदी में देखने को मिल रहा है. नेपाल की ओर से उफनती नदी में बहकर आए घरेलू गैस सिलेंडर, ड्रम, कीमती इमारती लकड़ियां और विशालकाय मछलियों को पकड़ने के लिए छितौनी तटबंध के पास ग्रामीणों में होड़ मच गई है. तेज बहाव के बीच लोग जान जोखिम में डालकर पानी में उतर रहे हैं.
कुशीनगर: नेपाल (Nepal) के पहाड़ी इलाकों और रसुवा जिले में आई भीषण बाढ़ व तबाही के बाद सीमा पार से बहकर आया भारी मलबा उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कुशीनगर जिले (Kushi Nagar) से गुजरने वाली बड़ी गंडक (नारायणी) नदी में उतराता दिखाई दे रहा है. गुरुवार को नदी का जलस्तर और डिस्चार्ज कुछ कम होने के बाद पानी की सतह पर तैर रहे गैस सिलेंडर, ड्रम, इमारती लकड़ियां और बड़ी मछलियां दिखाई देने लगीं.
इन सामानों और मछलियों को निकालने के लिए छितौनी तटबंध के आसपास बसे गांवों के लोग अपनी जान की परवाह किए बिना उफनती नदी में कूद पड़े. यह भी पढ़ें: Nepal Flash Floods: नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 392 हुआ; 290 भारतीय लापता, नई बनी झील से फिर बाढ़ का खतरा
50 किलो की मछली और गैस सिलेंडरों को पकड़ने की होड़
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हनुमानगंज मंदिर टोला के दो युवकों ने नदी के तेज बहाव में उतरकर लगभग 50 किलोग्राम वजनी गोसटा (समुद्री) मछली पकड़ी. जब दोनों युवक इतनी बड़ी मछली को कंधे पर लादकर गांव पहुंचे, तो उसे देखने के लिए ग्रामीणों का तांता लग गया.
इसके अलावा नदी में तैर रहे एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडरों, ड्रमों और पहाड़ों से बहकर आई बेशकीमती लकड़ी के लट्ठों को रस्सियों के सहारे किनारे खींचने के लिए लोगों में होड़ मची रही. कई ग्रामीणों के हाथ भारी मात्रा में सामान लगा.
तेज बहाव में हादसे का जोखिम, स्थानीय लोगों ने जताई चिंता
तेज धार और मलबे से भरी नदी में लोगों का इस तरह उतरना गंभीर हादसे को दावत दे रहा है.
- बहाव का खतरा: नदी में कीचड़, मलबा और पानी का तेज खिंचाव किसी भी समय बड़ी अनहोनी की वजह बन सकता है.
- प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग: क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस से अपील की है कि तटबंधों और नदी घाटों पर निगरानी बढ़ाई जाए तथा लोगों को पानी में उतरने से तत्काल रोका जाए.
कुशीनगर में बाढ़ का कोई तात्कालिक खतरा नहीं: प्रशासन
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि जिले की सीमा में बाढ़ का कोई तात्कालिक खतरा नहीं है.
- वाल्मीकि बैराज से प्रवाह: वाल्मीकिनगर बैराज से पानी का नियंत्रित डिस्चार्ज (लगभग एक लाख क्यूसेक) हो रहा है.
- 24x7 मॉनिटरिंग: सीमावर्ती इलाकों और तटबंधों पर राजस्व व जल संसाधन विभाग की टीमें लगातार निगरानी बनाए हुए हैं.
नेपाल में भारी तबाही, 390 से अधिक की मौत
उल्लेखनीय है कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर और भूस्खलन के चलते त्रिशूली व भोटे कोशी नदी तंत्र में आई भीषण बाढ़ ने भारी विनाश मचाया है. इस त्रासदी में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और 1,400 से अधिक लोग लापता हैं. सड़कों, पुलों, मकानों और जलविद्युत परियोजनाओं के क्षतिग्रस्त होने से जान-माल का व्यापक नुकसान हुआ है, जिसका मलबा बहकर भारतीय सीमा की नदियों तक पहुंच रहा है.