Nashik Students Strike: नासिक में आदिवासी छात्रों ने DM के आश्वासन के बाद खत्म की भूख हड़ताल, मांगें पूरी होने तक धरना प्रदर्शन रहेगा जारी; VIDEO
नासिक में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे आदिवासी छात्रों ने जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद से सकारात्मक बातचीत के बाद भूख हड़ताल समाप्त कर दी है. हालांकि, लिखित आदेश जारी होने तक धरना प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया गया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
Nashik Students Strike: महाराष्ट्र के नासिक में प्रशासनिक और नीतिगत सुधारों की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे आदिवासी छात्रों ने जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी है. हालांकि, छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी सभी मांगों पर राज्य सरकार द्वारा लिखित समयसीमा और आधिकारिक अधिसूचनाएं जारी नहीं कर दी जातीं, तब तक उनका शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन जारी रहेगा.
नासिक के अलावा पुणे और नागपुर सहित राज्य के विभिन्न जिलों में 13 अगस्त से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन छात्रावास नियमों, सुरक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं जैसे कई गंभीर मुद्दों को लेकर केंद्रित है. यह भी पढ़े: Mumbai BEST Workers Strike: मुंबईकरों की बढ़ सकती है परेशानी, वेतन और भत्तों की मांग को लेकर बेस्ट कर्मचारियों की हड़ताल शुरू
आदिवासी छात्रों ने ख़त्म की भूखहड़ताल
प्रशासन के साथ वार्ता और मांगों पर सहमति
जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी समस्याएं प्रमुखता से रखीं. बैठक के बाद जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद ने बताया कि राज्य सरकार और आदिवासी विकास विभाग छात्रों की मांगों के प्रति बेहद सकारात्मक रुख अपना रहे हैं.
उन्होंने कहा कि कई मुख्य विषयों पर प्रारंभिक स्तर पर सहमति बन चुकी है और वरिष्ठ मंत्रियों व राज्य प्रशासन के साथ लगातार संवाद जारी है. प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी परिचालनगत मुद्दों का शीघ्र समाधान हो ताकि छात्रों को अपनी पढ़ाई छोड़कर सड़कों पर न उतरना पड़े.
आंदोलन की पृष्ठभूमि और प्रमुख मांगें
यह आंदोलन शुरुआत में संशोधित छात्रावास प्रवेश नीति के विरोध में शुरू हुआ था, लेकिन समय के साथ इसमें राज्य भर के आदिवासी क्षेत्रों से जुड़ी व्यापक मांगें शामिल हो गईं. हाल ही में गड़चिरोली के एक सरकारी आश्रम शाला में सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की हुई दुखद मृत्यु के बाद छात्रावासों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे का मुद्दा और अधिक गहरा गया.
छात्रों द्वारा प्रशासन के समक्ष रखी गई प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
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सरकारी आदिवासी छात्रावासों और आश्रम शालाओं में बुनियादी सुविधाओं, स्वच्छता, सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए.
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गड़चिरोली में सर्पदंश से जान गंवाने वाली तीन छात्राओं के परिवारों को उचित वित्तीय मुआवजा दिया जाए और लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय की जाए.
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पेसा (PESA) कानून के तहत रुकी हुई भर्तियों को तुरंत शुरू किया जाए और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित 12,500 से अधिक रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए.
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फर्जी जाति प्रमाणपत्रों के आधार पर आरक्षित पदों का लाभ उठाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए और जाति वैधता प्रमाणपत्र सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए.
आंदोलन का अगला चरण
भूख हड़ताल खत्म होने से अनशन पर बैठे छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित स्थानीय प्रशासन ने राहत की सांस ली है. इसके बावजूद प्रदर्शन स्थल पर छात्रों की मौजूदगी बनी हुई है.
छात्र नेताओं ने कहा कि वे संवाद की प्रक्रिया का स्वागत करते हैं, लेकिन केवल मौखिक आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा. जब तक हर स्वीकार की गई मांग का सरकारी आदेश (GR) जारी नहीं हो जाता, उनका धरना जारी रहेगा. आगामी दिनों में छात्र प्रतिनिधियों की आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों के साथ मुंबई में अगले चरण की बैठक होना प्रस्तावित है.