Mumbai Water Crisis: मुंबई में जल संकट से निपटने की बड़ी पहल, पारंपरिक कुओं के पुनर्जीवन को मिली रफ्तार, हर वार्ड को मिलेंगे ₹30 लाख

इन कुओं के पानी का उपयोग पार्कों और उद्यानों की सिंचाई, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई, निर्माण कार्यों और सार्वजनिक शौचालयों में फ्लशिंग जैसे गैर-पीने योग्य कार्यों के लिए किया जाएगा. इससे पीने के पानी पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम होगा.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

Mumbai Water Crisis: मुंबई में संभावित जल संकट से निपटने के लिए पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. भाजपा के मुंबई सचिव और नगरसेवक प्रतीक कारपे की पहल पर शहरभर के कुओं की सफाई और पुनर्जीवन का अभियान शुरू होने जा रहा है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व और भाजपा मुंबई अध्यक्ष व विधायक अमित साटम के मार्गदर्शन में इस योजना को गति मिली है. इस संबंध में गुरुवार को महापौर कार्यालय में बैठक आयोजित की गई, जिसमें इसरो के पूर्व वैज्ञानिक भी शामिल हुए.

प्रतीक कारपे लंबे समय से नगर निगम स्तर पर पारंपरिक कुओं की सफाई, गाद निकालने, आवश्यक मरम्मत और गैर-पीने योग्य कार्यों के लिए कुएं के पानी के उपयोग की मांग उठा रहे थे. उन्होंने मुंबई के सभी कुओं के पुनर्जीवन को लेकर नगर निगम में प्रस्ताव भी दिया था. वहीं सभागृह नेता गणेश खंकार ने भी इस मुद्दे को लगातार उठाया. इन प्रयासों के बाद अब मुंबई में वैकल्पिक जल स्रोत विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं.

नगर निगम की योजना के अनुसार पहले चरण में प्रत्येक प्रशासनिक वार्ड में खुले कुओं की पहचान की जाएगी. इसके बाद उनकी सफाई, गाद निकालने और आवश्यक मरम्मत का कार्य किया जाएगा. प्रत्येक कुएं पर 5 हजार लीटर क्षमता की पानी की टंकी, 2 एचपी का वाटर पंप और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. एक कुएं पर करीब 4.82 लाख से 5 लाख रुपये तक खर्च होने का अनुमान है. जरूरत पड़ने पर सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद अतिरिक्त निधि भी उपलब्ध कराई जाएगी. शुरुआती चरण में प्रत्येक वार्ड के लिए 30 लाख रुपये आवंटित करने की तैयारी है.

पीने के पानी की होगी बचत

इन कुओं के पानी का उपयोग पार्कों और उद्यानों की सिंचाई, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई, निर्माण कार्यों और सार्वजनिक शौचालयों में फ्लशिंग जैसे गैर-पीने योग्य कार्यों के लिए किया जाएगा. इससे पीने के पानी पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम होगा. साथ ही संभावित जल संकट के दौरान ये कुएं वैकल्पिक जल स्रोत के रूप में भी उपयोगी साबित होंगे.

AI और GIS तकनीक से होगी जल स्रोतों की पहचान

प्रतीक कारपे ने मुंबई के कुओं, तालाबों और प्राकृतिक जल स्रोतों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट तकनीक, जीआईएस मैपिंग और IoT आधारित स्मार्ट वाटर मॉनिटरिंग सिस्टम के उपयोग का भी प्रस्ताव रखा है. इन आधुनिक तकनीकों की मदद से जल स्रोतों का सर्वेक्षण, उनकी उपलब्धता का आकलन और भविष्य में उनके उपयोग की संभावनाओं का मूल्यांकन किया जाएगा.

मुंबई में लगातार बढ़ते जल दबाव को देखते हुए पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन, वैकल्पिक जल आपूर्ति व्यवस्था का विकास और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन भविष्य में अहम भूमिका निभाएगा. प्रतीक कारपे का कहना है कि इन पहलों के जरिए आने वाली गर्मियों में मुंबईवासियों को संभावित जल संकट से राहत दिलाने का प्रयास किया जा रहा है.

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