Mumbai Water Crisis: मुंबई में मानसून की दस्तक में हो रही देरी के बीच शहर पर पानी का संकट गहराने लगा है. मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले सात प्रमुख जलाशयों का कुल जलस्तर चिंताजनक रूप से गिरकर महज 12.49 प्रतिशत रह गया है. बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के आंकड़ों के अनुसार, 10 जून तक इन झीलों में केवल 1.80 लाख मिलियन लीटर (ML) पानी बचा था. पानी की इस भारी किल्लत के कारण नगर निकाय ने पूरे शहर में 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू कर दी है. इसके साथ ही अपर वैतरणा (Upper Vaitarna) झील का उपयोगी जल भंडार पूरी तरह समाप्त हो चुका है, जिससे शहर की चिंताएं और बढ़ गई हैं.
जलाशयों की स्थिति और गिरता जलस्तर
बीएमसी के हाइड्रोलिक इंजीनियर विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अपर वैतरणा झील में अब केवल रिजर्व स्टॉक (आपातकालीन भंडार) ही बचा है. शहर को रोजाना 440 मिलियन लीटर पानी देने वाली तानसा झील का जलस्तर घटकर उसकी कुल क्षमता का केवल 7 प्रतिशत रह गया है. इसके अलावा मिडिल वैतरणा में 15 प्रतिशत और भातसा झील में केवल 11 प्रतिशत उपयोगी पानी बचा है. वीहार झील में 43.46 प्रतिशत और तुलसी में 24.93 प्रतिशत जल भंडार मौजूद है.
पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर स्थिति
वर्तमान स्थिति चिंताजनक जरूर है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों को देखें तो इस बार जलाशयों की स्थिति थोड़ी बेहतर है. पिछले साल यानी 2025 में इसी अवधि के दौरान झीलों में कुल जल स्टॉक 10 प्रतिशत था, जबकि 2024 में यह केवल 5.81 प्रतिशत रह गया था. बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भले ही स्थिति गंभीर है, लेकिन पिछले सालों के मुकाबले इस बार उपलब्ध स्टॉक थोड़ा अधिक है. यह बढ़ा हुआ जलस्तर मानसून में होने वाली देरी से निपटने के लिए एक सुरक्षा कवच (बफर) की तरह काम कर रहा है.
रिजर्व स्टॉक के इस्तेमाल को मंजूरी
हालात को देखते हुए राज्य के सिंचाई विभाग ने अपर वैतरणा और भातसा झीलों से 2.33 लाख मिलियन लीटर अतिरिक्त रिजर्व स्टॉक का उपयोग करने की अनुमति दे दी है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस आपातकालीन रिजर्व स्टॉक का इस्तेमाल तभी शुरू किया जाएगा, जब सातों झीलों का सामूहिक जलस्तर गिरकर 8 प्रतिशत से नीचे चला जाएगा.
बीएमसी की आगामी रणनीति
नगर निगम प्रशासन मौसम के पूर्वानुमान और जून महीने में जल ग्रहण क्षेत्रों (catchment areas) में होने वाली बारिश पर लगातार नजर रख रहा है. बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक, अगर आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय नहीं होता है और जलस्तर में सुधार नहीं आता है, तो पानी की कटौती को 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ाया जा सकता है. इसके अलावा, स्थिति बिगड़ने पर कमर्शियल प्रतिष्ठानों और मॉल जैसे व्यावसायिक स्थानों को की जाने वाली पानी की आपूर्ति पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.













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