Mumbai Water Bill Hike: महंगाई से परेशान मुंबईकरों को लग सकता है एक और झटका, BMC पानी के बिल में 6 से 7% बढ़ोतरी की तैयारी में
मुंबई महानगरपालिका प्रशासन पानी की दरों (पानीपट्टी) में 6 से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रहा है. 2022 के बाद से पानी के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिसके चलते नगर निगम को वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना पड़ रहा है.
Mumbai Water Bill Hike: मुंबई में रहने वाले नागरिकों को जल्द ही पानी के बिल में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) का जल विभाग पानीपट्टी (वॉटर टैरिफ) में 6 से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है. मुंबई में साल 2022 के बाद से पानी की दरों में कोई संशोधन नहीं किया गया है. जल आपूर्ति प्रणाली के रखरखाव, शुद्धीकरण और बढ़ते प्रशासनिक खर्चों को ध्यान में रखते हुए बीएमसी प्रशासन ने यह समीक्षा शुरू की है. यह प्रस्ताव जल्द ही अंतिम मंजूरी के लिए नगर पालिका आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा.
2022 के बाद से नहीं बढ़ी हैं पानी की दरें
मुंबई को लगभग 120 किलोमीटर की दूरी से जलवाहिनियों (पाइपलाइनों) के माध्यम से रोजाना 4,000 मिलियन लीटर से अधिक पानी की आपूर्ति की जाती है. यह पानी तानसा, मध्य वैतरणा, भातसा, विहार और तुलसी जैसी प्रमुख झीलों से आता है. यह भी पढ़े: CNG-PNG Price Hike: महंगाई की मार, मुंबई में सीएनजी-पीएनजी और दूध के दाम बढ़े, ऑटो-टैक्सी का सफर भी हुआ महंगा
इतनी दूर से पानी लाने, उसके शुद्धीकरण, पाइपलाइनों के रखरखाव और वितरण तंत्र को सुचारू रखने के लिए नगर निगम को हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं. वर्ष 2022 के बाद से दरों में कोई बदलाव न होने के कारण बीएमसी के जल विभाग पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है, जिसे संतुलित करने के लिए वर्ष 2026 में दरों में संशोधन आवश्यक माना जा रहा है.
वित्तीय संतुलन बनाने के लिए नया प्रस्ताव
प्रशासनिक स्तर पर पानीपट्टी बढ़ाने को लेकर पहले भी चर्चाएं हुई हैं. इससे पूर्व भी वित्तीय स्थिति को स्थिर करने के लिए दर वृद्धि का प्रस्ताव सदन में रखा गया था. हालांकि, विपक्षी दलों और नागरिक प्रतिनिधियों के विरोध के बाद तत्कालीन नगर निगम नेतृत्व ने बढ़ोतरी पर रोक लगाने का उल्लेख किया था.
इसके बाद दर वृद्धि के फैसले को टाल दिया गया था. लेकिन मौजूदा वित्तीय स्थिति और बढ़ते खर्चों को देखते हुए बीएमसी प्रशासन ने एक बार फिर से पानीपट्टी बढ़ाने के प्रस्ताव पर नए सिरे से काम शुरू कर दिया है.
बढ़ोतरी न होने पर 125 करोड़ रुपये का नुकसान
वर्ष 2012 में स्थायी समिति द्वारा पारित एक प्रस्ताव के अनुसार, बीएमसी को हर साल जून महीने में पानी की दरों में अधिकतम 8 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का अधिकार दिया गया था.
स्थानीय चुनावों और कोरोना काल की परिस्थितियों के कारण पिछले चार वर्षों में इस नियम को लागू नहीं किया गया. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अगर इस साल भी दरों में बढ़ोतरी नहीं की गई, तो बीएमसी को करीब 100 से 125 करोड़ रुपये के राजस्व का घाटा सहन करना पड़ सकता है. इसी संभावित घाटे से बचने के लिए नगर निगम जल्द ही इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने जा रहा है