मुंबई झीलों का जलस्तर आज: जलाशयों में बढ़ोतरी, 90 फीसदी से ज्यादा जमा हुआ पानी
मुंबई को पीने का पानी आपूर्ति करने वाले सात प्रमुख जलाशयों का जलस्तर लगातार बारिश के बाद 90 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर चुका है. बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के हाइड्रोलिक इंजीनियर विभाग द्वारा सुबह 6 बजे जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, झीलों में जल भंडारण क्षमता तेजी से बढ़ी है
Mumbai Lakes Water Level Today: मुंबई को पीने का पानी आपूर्ति करने वाले सात प्रमुख जलाशयों का जलस्तर लगातार बारिश के बाद 90 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर चुका है. बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के हाइड्रोलिक इंजीनियर विभाग द्वारा सुबह 6 बजे जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, झीलों में जल भंडारण क्षमता तेजी से बढ़ी है. इससे पहले बीएमसी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों में कुल जलस्तर 89.08 प्रतिशत दर्ज किया गया था, जिसमें अब और सुधार देखा गया है.
जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी
मुंबई की वार्षिक जल आवश्यकता को पूरा करने के लिए शहर सात झीलों पर निर्भर है. ये झीलें हैं— भातसा, अपर वैतरणा, मध्य वैतरणा, मोदक सागर, तानसा, विहार और तुलसी. यह भी पढ़े: मुंबई झीलों का जलस्तर आज: जलाशयों में जमा हुआ करीब 90% पानी, क्या मायानगरी में 10 फीसदी पानी कटौती होगी खत्म?
बीएमसी का पोस्ट
हाल के दिनों में जलभराव क्षेत्रों में हुई अच्छी बारिश के कारण इन झीलों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हुई है. 89.08 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से अधिक हुआ यह जल भंडार मुंबई निवासियों के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है.
10 फीसदी पानी कटौती खत्म होने की उम्मीद
झीलों में पर्याप्त जल भंडारण न होने की स्थिति में बीएमसी को पूर्व में 10 प्रतिशत तक की पानी कटौती लागू करनी पड़ी थी. अब जलस्तर 90 प्रतिशत के पार पहुंच जाने से नगर निगम इस कटौती को वापस लेने पर विचार कर सकता है.
अधिकारियों के अनुसार, यदि मानसून के शेष दिनों में जलस्तर इसी तरह बना रहा या पूर्ण क्षमता तक पहुंच गया, तो शहर में नियमित और निर्बाध जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी.
सात जलाशयों की वर्तमान स्थिति
बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, सात झीलों में से मोदक सागर, तानसा, विहार और तुलसी जैसी झीलें या तो लबालब भर चुकी हैं या अपने ओवरफ्लो स्तर के बेहद करीब हैं.
सबसे अधिक जल आपूर्ति करने वाली भातसा और वैतरणा श्रृंखला की झीलों में भी जल संग्रहण की स्थिति काफी मजबूत हुई है. बीएमसी जल विभाग की एक टीम लगातार झीलों के जलस्तर और जलभराव क्षेत्रों में होने वाली बारिश पर नजर बनाए हुए है.