Kamalkant Batra Death: शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की मां कमलाकांत बत्रा का निधन, पाकिस्तान को धुल चटाने वाले बेटे पर था गर्व
शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की मां कमलकान्त बत्रा का आज निधन हो गया. वे 83 वर्ष की थीं. बत्रा को वीर माता के नाम से जाना जाता था, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने बेटे की शहादत को गर्व के साथ स्वीकार किया था.
Kamalkant Batra Passes Away: शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की मां कमलकान्त बत्रा का आज निधन हो गया. वे 83 वर्ष की थीं. बत्रा को वीर माता के नाम से जाना जाता था, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने बेटे की शहादत को गर्व के साथ स्वीकार किया था.
कमलकान्त बत्रा एक गृहिणी थीं, जिन्होंने अपने बच्चों को संस्कार और देशभक्ति से भरपूर वातावरण में पाला। उनके बेटे, विक्रम बत्रा, 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हो गए थे. कैप्टन बत्रा को अदम्य साहस और वीरता के लिए परमवीर चक्र, भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार, से सम्मानित किया गया था.
शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की माता श्रीमती कमलकांत बत्रा का निधन।@DDNewslive pic.twitter.com/nXQ8NyOFyQ
— DD News Himachal (@DDNewsHimachal) February 14, 2024
कौन थे कैप्टन विक्रम बत्रा
कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म 9 सितंबर 1974 को हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में हुआ था. बचपन से ही उनमें देशभक्ति और साहस की भावना थी. उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पालमपुर में ही पूरी की और उसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लिया.
सेना में प्रवेश:
कॉलेज के बाद, विक्रम बत्रा ने भारतीय सेना में शामिल होने का फैसला किया. उन्होंने 1996 में 13 कुमाऊं रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त किया.
कारगिल युद्ध:
1999 में कारगिल युद्ध के दौरान, कैप्टन विक्रम बत्रा ने अदम्य साहस और वीरता का प्रदर्शन किया. उन्होंने कई महत्वपूर्ण चोटियों पर कब्जा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
प्वाइंट 4875:
कारगिल युद्ध के दौरान, प्वाइंट 4875 एक महत्वपूर्ण चोटी थी जो पाकिस्तानी सेना के कब्जे में थी. कैप्टन विक्रम बत्रा के नेतृत्व में, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के जवानों ने इस चोटी पर हमला किया.
वीरता का प्रदर्शन:
इस हमले के दौरान, कैप्टन विक्रम बत्रा ने अदम्य साहस और वीरता का प्रदर्शन किया. उन्होंने कई पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और अपनी टुकड़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.
शहादत:
7 जुलाई 1999 को, प्वाइंट 4875 पर दुश्मन से लड़ते हुए कैप्टन विक्रम बत्रा वीरगति को प्राप्त हुए.
पुरस्कार:
अपनी वीरता के लिए, उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया.
विरासत:
कैप्टन विक्रम बत्रा देश के लिए वीरता और बलिदान का प्रतीक बन गए हैं. उनकी कहानी युवाओं को प्रेरित करती है और देशभक्ति की भावना जगाती है.
कैप्टन विक्रम बत्रा के कुछ प्रसिद्ध कथन:
- "ये दिल मांगे मोर"
- "माँ, मुझे शेरशाह की चोटी पर तिरंगा फहराना है. शायद मैं वापस न आ सकूँ."
- "जो डर गया, समझो वो मर गया."
कैप्टन विक्रम बत्रा एक सच्चे देशभक्त और वीर सैनिक थे. उनकी वीरता और बलिदान को सदैव याद किया जाएगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 14, 2024 05:18 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

